आप देखभाल करने वाले की सहायता कर सकते है

देखभाल करने वाले को सहायता प्रदान करने से उनके बोझ कम हो सकता है।
डॉ. कृष्ण प्रसाद

परिनीता स्किज़ोफ्रेनिया से पीड़ित है। उसके पति ने उसे छोड़ दिया क्योंकि शादी के समय उसकी मानसिक बीमारी को छुपाया गया।  परिनीता की माँ, जो गार्मेंट के कारखाने में काम करती है, इकलौती देखभाल करने वाली है।  यदि परिनीता की माँ उसको  नियमित जाँच के लिए उसके साथ जाती है तो उसे उस दिन के वेतन की हानि होती है। परिनीता की माँ  की सहेली, श्यामला, परिणीता को जाँच के लिए अस्पताल ले जाती है। श्यामला ने परिनीता को विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सहायता की। उसने परिनीता के विवाह-विछेदन से जुड़ी कानूनी बाधाओं को भी संभाला। 

(यह वास्तविक जीवन के एक मामले का अध्ययन है जो मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर द्वारा बताया गया।  निजता की रक्षा हेतु नाम बदले गए हैं)

इस कहानी बताता है कि कैसे एक दोस्त देखभाल करने वाले की मदद करती है। दुर्भाग्यवश, हर किसीको अतिरिक्त मदद नहीं मिलती। देखभाल करने वाले अक्सर अनेक दायित्व निभाते हैं। मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करने के अलावा, वे कार्य या पढ़ाई करते हैं, घरेलू काम को संभालते हैं। इन अतिरिक्त कर्तव्यों के कारण, वे दूसरों का ध्यान रखने में अपना अधिक समय बिता देते हैं, और अपने स्वास्त्य को नज़र अंदाज कर देते हैं।  इससे उनकी सेहत बिगड़ सकती है।  इस परिस्थिति से उभरने के लिए  देखभाल करने वाले अपने परिवार, दोस्त और रिश्तेदारों से मदद ले सकते हैं।

परिवार के सदस्यों  से सहायता

परंपरागत संयुक्त परिवारों में, परिवार के सदस्य मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करने में मदद करते हैं। शहरीकरण के कारण, आज कल छोटे परिवार का ज़माना है। यह देखभाल करने वालों पर अधिक दबाव पैदा करता है क्योंकि उन्हे कम सहायता मिलती है।  ऐसे में, परिवार के सदस्य, मुख्य देखभाल करने वाले के बोझ को बांटने  में मदद कर सकते है।

उदाहरण के लिए, यदि एक परिवार में माँ, बाप, बेटी और मानसिक रोग से पीड़ित किशोर बेटा है, और माँ मुख्य देखभाल करने वाले की भूमिका निभाती है, तो पिता और बेटी मदद कर सकते हैं ।  परिवार के अन्य सदस्य समस्या के बारे में जान सकते हैं और कार्य तथा समय के आधार पर (मैं उसकी देखभाल सुबह कर लूँगा, तुम दोपहर को कर लेना) देखभाल कार्यों में मदद कर सकते हैं।

दूर का रिश्तेदार या दोस्त बनकर मदद करना

यदि आपका दोस्त या रिश्तेदार हैं जो कि देखभाल करने वाला है, आप उसकी मदद कई तरीकों में कर सकते हैं 

  • काम दिलवाना: गंभीर मानसिक रोग जैसे बैपोलर डिसॉर्डर की समस्या के कारण बहुत दिन काम नहीं किया होगा. ऐसे परिस्थिति में आप कुछ काम दिलवा सकते हैं । व्यक्ति के लिए रोज़गार अवसरों की तलाश करें।
  • सहानुभूति: देखभाल करने वाले की तरफ सहानुभूति दिखाना उन्हे इस समुदाय का हिसा होने का अहसास दिलाती है। यह अलगाव को कम करती है और मानसिक रोग के कलंक के विरुद्ध लडने में मदद करेगी।  डॉ. कृष्ण प्रसाद, सह–प्राध्यापक, निम्हाँस कहते हैं कि "दैहिक अनारोग्य से पीड़ित व्यक्ति के प्रति लोग सहानुभूति दिखाते हैं, क्योंकि यह उनको दिखता है।  लेकिन मानसिक अस्वस्थता अदृश्य है और बरताव से संबद्ध है। इस कारण से लोग कम समजते हैं और सहानुभूति नहीं दिखा सकते हैं । इसमें सुधार तभी होगा जब वे अवगत होंगे कि मानसिक रोग एक गंभीर समस्या है और इसका इलाज हो सकता है।"
  • अस्पताल जाते समय साथ जाएं: यदि आपके पास समय है तो आप अस्पताल मरीज़ के साथ जाएं।  यह देखभाल करने वाले के बोझ को काफी हद तक कम करेगा।
  • उन्हे सुनिए: देखभाल करने वाले की बात और भावनाओं को सुने।  यह उन्हें राहत की सांस प्रदान करेगा।
  • समस्या के बारे मे जाने: देखभाल करने वाले के साथ केवल समस्या के बारे मे बात करने से बचें। उनसे ऐसे बात करें जैसे कि अन्य किसी व्यक्ति से करते हैं। आरती जगन्नाथन, सहायक प्राध्यापक, निम्हांस कहती हैं "हर बार की तरह मैं अपने दोस्त के साथ गपशप करती हूँ, मैं अपने बच्चे की जन्मदिन के पार्टी पर उन्हे आमंत्रित करती हूँ, मैं उनके साथ शॉपिन्ग पर जाती हूँ... यह व्यक्ति और उसके देखभाल करने वाले को सामाजिक रूप से जुड़े रहने और बोझ कम होने का अहसास दिलाती है।”  यदि आप थोड़ा समय अपने दोस्त या रिश्तेदार, जो कि देखभाल करने वाले हैं, को देने से मदद पहुँचाती हैं, चाहे बड़ी या छोटी तरह से, यह उनकी देखभाल करने की ज़िम्मेदारियों को आसान बनाती है।

और पढ़ें