डिसकैलकुलिया यानि गणना करने में असक्षमता

डिसकैलकुलिया (गणित की समस्या) क्या है?

डिसकैलकुलिया, सीखने से जुड़ी एक विशिष्ट विकलांगता है जिसमें बच्चा अंकों के बारे में बुनियादी बातें याद नहीं रख पाता है और गणित के सवालों को बहुत देर से समझता है या ग़लत करता है. ये लक्षण हर बच्चे में अलग अलग हो सकते हैं. कुछ बच्चों को गणित की वर्ड प्रॉब्लम करने में मुश्किल आती है तो कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें हल तक पहुँचने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया समझने में मुश्किल होती है. और कुछ ऐसे भी होते हैं जो ख़ास तरह की गणितीय अवधारणाओं को समझ ही नहीं पाते हैं.

डिसकैलकुलिया क्या नहीं है?

आमतौर पर देखें तो ज़्यादातर बच्चों के लिए गणित एक मुश्किल विषय हो सकता है. और कुछ बच्चे धीरे धीरे ही सीख पाते हैं, उन्हें लगातार दोहराना और अभ्यास करना होता है, वे अवधारणाओं को याद कर लेते हैं.

कुछ बच्चों को गणित चुनौतीपूर्ण लग सकती है और इसलिए नर्वस हो सकते हैं या तनाव में आ सकते हैं, इसका असर उनकी परीक्षा में किए गए प्रदर्शन पर पड़ता है.

ये डिसकैलकुलिया के चिन्ह नहीं हैं.

डिसकैलकुलिया के चिन्ह क्या हैं?

हर बच्चे की सीखने की रफ़्तार अलग होती है. औसत बच्चे को गणितीय अवधारणाओं को समझने के लिए समय और नियमित अभ्यास की ज़रूरत होती है. लेकिन अगर सीखने में कोई एक ख़ास या चिंहित करने लायक अंतराल या देरी आने लगती है और आप ये नोट करते है कि अतिरिक्त कोचिंग और ट्रेनिंग के बावजूद बच्चे को समस्या आ रही है तो हो सकता है कि बच्चे को डिसकैलकुलिया हो.

हर अवस्था और हर बच्चे में लक्षण अलग अलग होते हैं.

प्री-स्कूल या प्लेग्रुप या नर्सरी

• गिनती सीखना

• छपे हुए अंकों को पहचानना

• वास्तविक जीवन की चीज़ों से अंकों का संबंध जोड़ पाना (मिसाल के लिए 3 घोड़े, 5 पेंसिलें आदि)

• न्यूमेरिकल को याद करना

• चिन्हों, पैटर्न, आकार को पहचानना और चीज़ों को व्यवस्थित करना (गोल गेंदे एक जगह, चौकौर चीज़ें अलग जगह आदि)

प्राइमेरी और मिडिल स्कूल

• अंकों और चिन्हों को पहचानना

• गणित के सवाल सीखना- जोड़, घटाव, गुणा, भाग

• गणित में वर्ड प्रॉब्लम हल करना

• चीज़ों की माप करना

• मैंटल गणित (मैथ) करना

• फ़ोन नंबर याद रखना

• उन खेलों में शामिल होना जिनमे अंक होते हैं या जिनमें योजना या तर्क की ज़रूरत होती है

किशोर और युवा

• कीमतों की गणना करना, मूल्य आंकना

• बेसिक गणित से आगे सीखना

• जमा खाते को समझना, उसका प्रबंध करना

• चीज़ों की माप करना

• समय, स्थान और दूरी की अवधारणाओं को समझना

• मैंटल गणित करना यानि दिमाग में गणनाएँ करने में सक्षम होना

• एक ही सवाल को अलग अलग तरीकों से हल करने के तरीक़े खोजना

• उन गतिविधियों में भागीदारी करना जिनमें गति और दूरी का आकलन किया जाता है जैसे खेल और ड्राइविंग सीखना. बच्चे में भरोसे की कमी हो सकती है और वो इन गतिविधियों से परहेज़ कर सकता है.

डिसकैलकुलिया की वजह क्या है?

शोधकर्ताओं को अभी डिसकैलकुलिया की सटीक वजह का पता नहीं चला है. फिर भी वे मानते हैं कि जीन्स और आनुवंशिकी इस विकार की एक वजह हो सकती है.

डिसकैलकुलिया की पहचान कैसे की जाती है?

डिसकैलकुलिया का कोई विशेष टेस्ट नहीं है. बाल रोग विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिक इस स्थिति का पता करने के लिए कुछ निश्चित आकलन या टेस्ट कर सकते हैं.

डिसकैलकुलिया का इलाज

इसका कोई एक अकेला टेस्ट नहीं है. स्थिति का पता लगाने के लिए कई आकलन और कई तरह के टेस्ट किए जा सकते हैं.

• मेडिकल हिस्ट्री: सीखने की अन्य समस्याओं या एडीएचडी के साथ डिसकैलकुलिया भी हो सकता है. इसलिए विशेषज्ञ, विकार की पहचान करने या उसका इलाज करने से पहले बच्चे के चिकित्सा इतिहास की जाँच करते हैं.

• पहचानः विशेष शिक्षा से जुड़ा विशेषज्ञ विकार की जाँच के लिए कुछ विशिष्ट टेस्ट करता है. बच्चे की पढ़ाई लिखाई का प्रदर्शन भी ध्यान में रखा जाता है. सीखने के वैकल्पिक तरीके और तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं जिनसे बच्चा उस स्थिति से निपटने में सक्षम हो सके.

• स्कूल में सहायताः अभिभावकों को अपने बच्चे की समस्या के बारे में शिक्षकों को बताना चाहिए और मदद लेनी चाहिए. शिक्षक गणित पढ़ाने के लिए कोई वैयक्तिक योजना तैयार कर सकते हैं. बच्चे को अतिरिक्त सहायता दी जा सकती है मिसाल के लिए उसे टेस्ट में अतिरिक्त समय दिया जाए, या कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए. शिक्षक बच्चे की तरक्की का रिकॉर्ड रख सकते हैं और अगर उनका पिछला तरीक़ा कारगर नहीं रहता तो सिखाने के तरीक़े में बदलाव भी कर सकते हैं.

• हस्तक्षेप पर प्रतिक्रियाः कुछ स्कूल उन बच्चों को इस प्रोग्राम को चलाते हैं जिनकी सीखने की रफ़्तार कम है. छोटे ग्रुप को अतिरिक्त कोचिंग दी जाती है या कभीकभार अकेले बच्चे को भी. ये ज़रूरत पर निर्भर करता है.

• मनोवैज्ञानिक या काउंसलरः किसी भी तरह की सीखने की अक्षमता बच्चे के आत्मसम्मान और भरोसे पर असर डाल सकती है जिसका नतीजा तनाव और घबराहट भी हो सकता है. एक मनोवैज्ञानिक या काउंसलकर बच्चे को इस स्थिति से निपटने में मददगार हो सकता है.

डिसकैलकुलिया से जूझ रहे किसी बच्चे की देखभाल

अभिभावक के तौर पर, आपका प्रेम और आपकी सहायता बच्चे को इस समस्या से निजात पाने के लिए अनिवार्य है.

ये भी ज़रूरी है कि हर बच्चा अपने आप में विशिष्ट है और उसकी अपनी क्षमताएँ और प्रतिभाएँ हैं. आपको उसके लिए, सीखने के कई सारे तरीकें ढूँढने पड़ सकते हैं, उन्हें अमल में लाना पड़ सकता है. इनसे बच्चा अपनी गणितीय क्षमता में सुधार कर सकता है.

आप अपने बच्चे की मदद निम्न तरीक़ों से भी कर सकते हैं-

• डिसकैलकुलिया को समझकरः आप डिसकैलकुलिया के बारे में पढ़ें और जानें. सुधार की दिशा में जागरूकता और समझ पहला क़दम है. बच्चे के प्रति अपने प्यार और समर्थन और सहायता का इज़हार करें. उसे महसूस हो कि आप उससे प्यार करते हैं और उसके साथ हैं. अपने बच्चे से बात करें और उन्हें ये समझने का अवसर दें कि आप उनकी मुश्किल को समझ रहे हैं.

• गणित के खेल खेलें: घरेलू चीज़ों जैसे खिलौने, बर्तन, थाली चम्मच, सब्जी या फल का इस्तेमाल कर अंकों को रोज़ाना की गतिविधि से जोड़ें. अपने बच्चे को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने दें. अलग अलग तरीकें इस्तेमाल करें और देखें कि आपके बच्चे को किस तरीके से सीखने में सुविधा है. गणित की ज़रूरत रोजाना के कामों में पड़ती है, इसलिए उसे पैसे और समय का महत्व, हिसाबकिताब और प्रबंधन सिखाएँ.

• प्रोत्साहन और सहायताः अपने बच्चे की सामर्थ्य को पहचानें और जिस किसी काम या गतिविधि में उसकी दिलचस्पी है उसमें उसको प्रोत्साहित करें. इससे बच्चे का आत्मसम्मान बढ़ेगा और उसमें भरोसा भी पैदा होगा. प्रशंसा और प्यार से बच्चे को अपनापन और सुरक्षा महसूस होती है.


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