प्रसवोत्तर मनोविकृति

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प्रसवोत्तर मनोविकृति क्या है?

प्रसवोत्तर मनोविकृति (या ज़च्चा मनोविकृति) मानसिक बीमारी का एक गंभीर प्रकरण है जो अक्सर बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती दिनों या हफ़्तों में अचानक शुरु होता है.

प्रसवोत्तर मनोविकृति किसी भी महिला को पीड़ित कर सकते हैं जिसे कभी कोई मानसिक बीमारी न हुई हो उन्हें भी. यह नई माँ, उसके पति और परिवार के लिए एक भयावह अनुभव हो सकता है. महिलाएँ आमतौर पर प्रसवोत्तर मनोविकृति के एक प्रकरण के बाद पूरी तरह से ठीक हो जाती हैं.

महत्वपूर्ण: प्रसवोत्तर मनोविकृति आपातकालीन है, और माँ जितनी जल्दी संभव हो मदद की जरूरत है. बीमारी अक्सर नाटकीय है और लक्षण भी अस्थिर हो सकते हैं. अक्सर परिवार इन लक्षणों को समझ नहीं पाता है और अंध-विश्वास की जकड़ में उसे मंत्रवादी के पास चिकित्सा के लिए ले जाता है. अत: सही इलाज में देरी की वजह से माँ और बच्चे के लिए परिणाम घातक हो सकते हैं. प्रारंभिक उपचार बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के लक्षण क्या हैं?

प्रसवोत्तर मानसिकता के अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं:

• मूड में तेजी से बदलाव: 'उच्च' या 'उन्मत्त', जोर से गाना गाना या नाचना

• बेचैनी होना, उत्तेजित रहना, एक स्थान पर बैठने या रहने में असमर्थ होना

• चिड़चिड़ापन, दूसरों को डाँटना या चिल्लाना

• विचारों के उद्वेग के कारण बहुत तेज़ गति में बात करना और उल्झन में रहना

• बिना किसी संकोच के किसी अपिरिचित से भी ऐसे बात करना या ऐसा व्यवहार जैसे बहुत पहचान हो.

• अधिक बातूनी, सक्रिय और सामान्य से अधिक मिलनसार होना

• अपनी ही अलग दुनिया में रहना और लोगों की बातों का जवाब न देना.

• नींद करने में कठिनाई, और थकान होने पर भी सोने की इच्छा न होना.

• हमेशा ये डर लगा रहना या आशंका होना कि उसे खतरा है.

भ्रम: झूठी मान्यताएँ जो उसके स्वभाव के विपरीत हों. उदाहरण के लिए, उसका सोचना कि उसे विरासत में बहुत सा धन मिला है या बच्चा उसका नहीं है.

मतिभ्रम: ऐसी चीज़ों को देखना या ऐसी आवाज़ें सुनना जो किसी और को दिखाई न दें या सुनाई न दें.

ऐसे लक्षणों से एक माँ को अपने बच्चे की देखभाल करने में बहुत मुश्किल होती है. उसे अपनी बीमारी का एहसास भी नहीं हो सकता है. पति, परिवार या दोस्तों को पता चलता है कि कुछ गड़बड़ है. लेकिन क्या गड़बड़ है ये जानने में परिवार को कठिनाई हो सकती है. इसलिए तुरंत मदद लेने की आवश्यकता है.

नोट: प्रसवोत्तर मनोविकृति के लक्षण घंटे से एक घंटे के लिए और एक दिन से अगले करने के लिए बहुत जल्दी बदल सकते हैं।

क्या प्रसवोत्तर मानसिकता का कारण बनता है?

प्रसवोत्तर मनोविकृति मां की गलती नहीं है। यह भी रिश्ते की समस्याओं या तनाव या तो की वजह से नहीं है। कई कारकों एक औरत आनुवंशिकी से एक है, जिनमें से इसे विकसित करने की संभावना है कि क्या निर्धारित करते हैं। माँ भी उसकी मां या बहन के रूप में एक करीबी रिश्तेदार इस तरह की बीमारी से पीड़ित है, तो प्रसवोत्तर मानसिकता है की संभावना है। हार्मोन के स्तर में परिवर्तन इस शर्त के साथ जुड़े होने के लिए लगा रहे हैं। गंभीर सोने के अभाव में इस बीमारी के लिए एक ज्ञात ट्रिगर है।

जो महिलाएँ अत्यंत जोखिम में हैं, वे प्रसवोत्तर मानसिकता को रोकने के लिए क्या कर सकती हैं?

जो महिलाएँ द्विध्रुवी विकार, मानसिक असंतुलन, या किसी अन्य मानसिक बीमारी से ग्रस्त रही हैं उन्हें बच्चे के जन्म के बाद फिर से बीमार होने का खतरा अधिक होता है. जो महिलाएँ पहले ही इस गंभीर बीमारी के प्रकरण से गुज़र चुकी हैं उन्हें गर्भ-धारण से पहले ही अपने डॉकटर और मनोचिकित्सक से अपनी दवाओं के बारे में चर्चा करनी चाहिए ताकि गर्भवती होने से पहले वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाए. कुछ क्षेत्रों में प्रसवकालीन मनोचिकित्सक नियुक्त किए जाते हैं जो महिलाओं की वर्तमान या पिछले मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का ख्याल रखते हैं.

यदि आप गर्भवती हैं और जानती हैं कि आपको प्रसवोत्तर मानसिकता का खतरा बढ़ जाएगा, तो आप अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से इसका उल्लेख ज़रूर करें. आवश्यकता पड़ने पर वह आपको मनोचिकित्सक से मिलने की सलाह देंगी. इससे आपको अपने देखभाल की योजना बनाने में मदद मिलेगी.

प्रसवोत्तर मनोविकृति का इलाज

प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित महिला का अस्पताल में इलाज कराना ज़रूरी है. कुछ अस्पतालों में गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त महिलाओं के लिए अलग विभाग होते हैं जिसमें माँ-बच्चे को एक साथ भर्ती किया जा सकता है. उनके साथ उनकी देखभाल करने के लिए उसकी सास या माँ भी रह सकती हैं.

प्रसवोत्तर मानसिकता से रिकवरी हफ्तों या महीनों लग सकते हैं. बहुत गंभीर लक्षण हों तो दो से बारह सप्ताह लग सकते हैं. अक्सर महिलाएँ पूर्ण रूप से ठीक हो जाती हैं लेकिन अगर फिर से बीमार पड़ने लगें तो दूसरी गर्भावस्था में गंभीर होने का खतरा रहता है.

उपचार के दौरान स्तनपान

स्तनपान के बारे में अपने मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लें. कुछ दवाएँ स्तन के दूध में स्रावित होते हैं, लेकिन कई अन्य दवाएँ सुरक्षित हैं. डॉक्टर आपकी दवा दे सकते हैं. माँ की सेहत और माँ-शिशु के संबध के लिए स्तनपान का जारी रखना आवश्यक है. माँ की बीमारी बच्चे को पारित नहीं होगी. अगर माँ की हालत बहुत गंभीर है तो कुछ समय के लिए शिशु को उससे दूर रखें. शिशु माँ के पास हो तो उस पर एक नज़र ज़रूर रखें.

स्वस्थ होने के बाद

प्रसवोत्तर मानसिकता के दौरे के बाद महिलाएँ अक्सर अवसाद, चिंता से पीड़ित होती हैं और आत्म-विश्वास भी कम हो जाता है. प्रारंभिक मातृत्व का अनुभव छूट जाने की उदासी रहती है. रिश्तों और दोस्ती में विश्वास के पुनर्निर्माण में समय लग सकता है. ज्यादातर महिलाओं फिर से खुद को सामान्य महसूस करने लगती हैं.

परिवार और दोस्तों के साथ भावनात्मक बातचीत से मदद मिल सकती है. इससे उबरने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है इसलिए मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक और काउंसलर की सलाह ज़रूर लें.

प्रसवोत्तर मानसिकता से समझौता

माँ के लिए :-

प्रसवोत्तर मनोविकृति के बाद माँ को अपने मातृ-ममता में विश्वास की कमी लगती है जो सामान्य है. ज्यादातर नई माताओं, जिनको कोई बीमारी न भी हो तो ऐसा ही लगता है.

कुछ माताओं को बच्चे के साथ संबंध बनाने में कठिनाई होती है जो बहुत चिंताजनक हो सकता है लेकिन ये भावना क्षणिक है. अधिकतर माताएँ बीमारी के बाद भी अपने बच्चों से अच्छे संबंध बना पाने में सफल होती हैं. अपने डॉक्टरों की सलाह की मदद से माँ अपने शिशु से अच्छे संबंध रख सकती है. उसके स्वास्थ्य के सुधार में उसके परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है.

पति के लिए :-

आपकी पत्नी को प्रसवोत्तर मानसिकता आपके लिए परेशानी भी हो सकती है, और साथ ही भय और हैरानी का कारण. आपकी पत्नी को अपनी बीमारी का अंदाज़ा नहीं हो सकता है, इसलिए पेशेवर मदद लेने की आवश्यकता होगी. पत्नी और बच्चे के अस्पताल में भर्ती होने से आप निराशा और अकेलापन महसूस कर सकते हैं. और अगर वह अकेले ही भर्ती हो तो परिवार के लिए आपकी परेशानी और ज़िम्मेदारी भी बढ़ जायेगी. बेहतर होगा कि आप उसके मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लें जो आपका सही मार्गदर्शन करेंगे.

आपकी पत्नी और बच्चे के वापस घर आने के बाद कोशिश करें कि:

• आप शांत रहें और उसका सहयोग दें

• अपने साथी की बात सुनने के लिए समय निकालें

• घर के कामकाज और खाना पकाने में सहायता करें

• बच्चे की देखभाल में मदद करें, या एक नर्स को मदद के लिए रख लें.

• आपकी पत्नी अस्पताल से निर्धारित दवाएँ ले रहीं हो तो दवा जारी रखने में सहयोग दें और अपनी मर्ज़ी से दवा न रोकें या डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएँ न बदलें.

• रात के समय बच्चे को बोतल की दूध देने में सहायता करें ताकि माँ आराम कर सके और सो सके क्यों कि दवाओं से थकान हो सकती है.

• घर के काम के लिए परिवार के अन्य सदस्यों और दोस्तों से मदद लें. इससे आपको अपनी पत्नी और बच्चे के साथ समय बिताने में मदद मिलेगी.

• कोशिश करें कि बहुत दोस्त या रिश्तेदार घर न आएँ, यह माँ के लिए थकान व उत्तेजना का कारण बन सकती है.

• कोशिश करें कि घर में खूब शांति रहे.

• धैर्य रखें. महिलाओं को प्रसवोत्तर मनोविकृति के एक प्रकरण से उबरने में समय लगता है.

• अच्छा खाना-पीना, व्यायाम, आराम कर अपने आपको स्वस्थ रखें. मादक दवाओं और ऑल्कोहॉल का उपयोग न करें.

• अपने अनुभवों के बारे में बात करने से सुधार लाने में सहायता करते हैं.

• दंपति का साथ में काउंसलिंग के लिए जाना काफ़ी सहायक होता है.