किशोरावस्था

क्या आप घर छोड़कर पढ़ने के लिये दूसरे शहर जा रहे हैं?

वाइट स्वान फ़ाउंडेशन

युवा अपने जीवन के किसी न किसी समय पर अपने माता पिता का घर छोड़ते हैं। यह परिपक्वता का ही एक प्राकृतिक तरीका है और वयस्क होने का भी। आजकल यह भी सामान्य है कि युवा दूसरे शहरों या देशों में उच्च शिक्षा के लिये जाते हैं और बेहतर करियर विकल्प चुनते हैं। कुछ के लिये यह बड़ा उत्साह से भरा होता है क्योंकि उन्हे स्वावलंबन चाहिये होता है जो उन्हे नवीन अनुभव से मिलता है। लेकिन कुछ के लिये यह काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

इस बदलाव में शामिल होता है नए स्थान के साथ सामंजस्य बैठाना, नए मित्र बनाना, अपनी प्राथमिकताओं की व्यवस्था करना और एक सामाजिक जीवन बनाना। उन युवाओं के लिये, जो रहवासी महाविद्यालयों में जाते हैं, एक व्यवस्थित दिनचर्या और नियम एकदम नए और चिंता बढ़ाने वाले हो सकते हैं, लेकिन जो स्वतंत्र रहते हैं, उन्हे अपने दैनिक खर्चों और बाकी चीज़ों को लेकर निरंतर तनाव का सामना करना होता है। यदि आप कभी भी अपने माता पिता से दूर नही रहे हैं, तब संभव है कि आप:

  • स्थान बदलने से अभिभूत हो सकते हैं

  • भाषा के अवरोध का सामना कर सकते हैं

  • नए लोगों से मिलने में व्यग्र हो सकते हैं

  • घर की याद आ सकती है

  • एकाकीपन और आत्मसम्मान की कमी जैसी स्थितियां हो सकती हैं

  • आपको यह महसूस हो सकता है कि पढ़ाई और नींद पर आप ध्यान केन्द्रित नही कर पा रहे हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिये कुछ तरीके यहां दिये जा रहे हैं:

  • यह पहले से ही तय कर लें कि आप होस्टल में रहेंगे या स्वतंत्र तरीके से

  • अपने वर्तमान मित्रों के साथ मिलकर एक साथ ही दूसरे स्थान पर जाने का सोचे

  • कॉलेज के पुराने दोस्तों से मित्रता बढ़ाएं और उनके अनुभवों से सीखे

  • यदि आपको कोई समस्या आती है तब विद्यार्थी कल्याण संघ से संपर्क करें

  • कोई अंशकालिक काम किया जा सकता है या क्लब की सदस्यता ली जा सकती है। नए लोगों से मिलने का यह बेहतर तरीका है!

अधिकांश परेशान करने वाले विचार और ड़र अस्थायी होते हैं जो सही तरीके से हल किये जाने पर जल्दी ही समाप्त हो जाते हैं। बहरहाल यदि ये विचार और अनुभूतियां आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, तब आपको मानसिक चिकित्सक की मदद लेनी चाहिये। आपको यह खोजना होगा कि क्या परिसर में ही कोई सलाहकार मौजूद है और उनसे मदद लेनी चाहिये।