ब्लू व्हेल चैलेंज: माता-पिता किस तरह सावधानी रख सकते हैं

ब्लू व्हेल चुनौती में भाग लेने वाले भारतीय किशोरों के बारे में पिछले कुछ दिनों में कई समाचार प्रकाशित हुए हैं। हमने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से यह समझने के लिए बात की कि इस चुनौती में भाग लेने के लिए किसी को क्या प्रेरित करता है, और माता-पिता क्या सावधानी रख सकते हैं:

ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में हम क्या जानते हैं?

हम ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में सुन रहे हैं, लेकिन यह केवल संदेह है कि मौत के पीछे यही कारण है। फिलहाल हमारे पास इस इस खेल को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी और निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है । यूरोप से उत्पन्ना इस चुनौती का एक छिपा हुआ समुदाय है और विशेषज्ञों को प्रतिभागियों के व्यवहार का विश्लेषण करने को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है।

क्यों किशोरवय बच्चे ही, विशेष रूप से, ब्लू व्हेल चैलेंज के प्रति आकर्षित होते हैं?

ब्लू व्हेल चैलेंज, प्रतिभागियों के लिए लगातार चुनौतियां प्रस्तुत करता है, जिन्हें उन्हें पूरा करना होता है और प्रत्येक चुनौती पूरा करने पर रिवॉर्ड मिलता है (उदाहरण के लिए, अगले स्तर पर आगे बढ़ने के लिए)। किशोरों के लिए ये चुनौतियां रोमांचक हो सकती हैं, और यह रिवॉर्ड उनमें एड्रेनालाईन का तेज प्रवाह और आकस्मिक पुष्टि प्रदान करता है।

इसका शिकार कौन बनता है?

हालांकि ऐसे बच्चे भी हो सकते हैं जो सहकर्मी दबाव के बावजूद चुनौती का हिस्सा बनना नहीं चाहते हैं, कोई भी बच्चा या किशोर जो ऑनलाइन संचालन के बारे में पर्याप्त रूप से नहीं जानता है, खासकर सुरक्षा के मामले में, वह इसका शिकार हो सकता है। जो लोग चुनौती में भाग लेते हैं वे अकेलेपन और अलगाव वाली स्थिति के हो सकते हैं, भावनात्मक रूप से परेशान और किसी के भी धमकाने पर आसानी से डर जाने वाले हो सकते हैं। कुछ बच्चे सहारा और समुदाय तलाशने वाले हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर माता-पिता में ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूकता की कमी होती है, जिसके कारण बच्चे आसानी से इसका शिकार बन जाते हैं।

किशोरों को ऑनलाइन किसी पर भी भरोसा करने के लिए क्या चीज कमजोर बनाती है?

किशोरावस्था में संकटकालीन सोच और भावनात्मक लचीलापन को छोड़कर सभी वयस्क शक्तियां होती हैं। जबकि अन्य सभी संज्ञानात्मक आंतरिक शक्तियां किशोरावस्था तक लगभग विकसित हो जाती हैं, मस्तिष्क - विशेष रूप से प्रीफ्रंटल लोब, जो महत्वपूर्ण सोच और भावनात्मक लचीलेपन को निर्धारित करता है - वह, जब तक कोई व्यक्ति 25 वर्ष का नहीं हो जाता, तब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है। संक्षेप में, यह एक अनियंत्रित शक्तिशाली कार की तरह है, जिसकी यंत्रप्रणाली पर नियंत्रण नहीं है। जब एक किशोर भावनात्मक रूप से कमजोर या अकेला होता है, तो वे इन निर्णयों से होने वाले परिणामों का आंकलन नहीं कर पाएंगे। वे यह जानने में सक्षम नहीं हो सकते कि उनके निर्णय कितने स्वस्थ, या नुकसानदेह हैं। इन उपलब्धियों से आत्म-सम्मान और सक्षमता की भावना पैदा होना उनके लिए ललचाने वाला होता है। 

माता-पिता को क्या देखने की ज़रूरत है?

- यदि आपका बच्चा मित्रों और परिवार से दूर अकेले खुद में ही बहुत समय बिता रहा है (यह शर्मीले अंतर्मुखी किशोरों से अलग है - इन किशोरों के पास हमेशा दोस्तों का एक छोटा सर्कल होगा, जिनके साथ वे समय बिताने का आनंद लेते हैं, और अकेले समय बिताने में सहज हैं )

- अगर आपका बच्चा उदास मनोदशा में, दुख की स्थिति में है या उसने उन गतिविधियों में भाग लेना बंद कर दिया है, जिनका पहले वह आनंद लिया करता था

- अगर अक्सर वे अपने कमरे में घुसे रहते हैं, और आपको यह बताने में संकोच करते हैं कि वे ऑनलाइन क्या कर रहे हैं; या इंटरनेट पर पढ़े गए या किए गए काम के बारे में जुनूनी तरीके से बात कर रहे हैं

- यदि आप उनके स्वयं को नुकसान पहुंचाने, काटने, या बार-बार चोटों के संकेत देखते हैं जिनका उनके पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है

यदि आप यहां दिए गए किसी भी संकेत को देखते हैं, तो आपका बच्चा जोखिम में हो सकता है। उसे तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंचें।

माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं? क्या फोन और इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाना इसका समाधान है?

प्रतिबंध लगाने की तकनीक लगभग हमेशा इसका जवाब नहीं है। इसके बजाय माता-पिता क्या कर सकते हैं, उनके बच्चे ऑनलाइन क्या कर रहे हैं इस चीज़ से जुड़े रहें। उदाहरण के लिए, ब्लू व्हेल चैलेंज के प्रतिभागी बेवक्त आधी रात में टास्क पूरा कर रहे होते हैं। इस बारे में जागरूक होने का प्रयास करे, जब आपका बच्चा ऑनलाइन होता है उस समय उनकी गोपनीयता का उल्लंघन किए बिना यह जानते रहें कि वे क्या कर रहे हैं या उन्हें यह लगने दें कि आप उनकी निगरानी कर रहे हैं। माता-पिता के लिए जागरूक होना जरूरी है। इसलिए बातचीत करते रहें कि वे ऑनलाइन क्या कर रहे हैं और यह किसलिए है। इसके बारे में बातचीत करें।

माता-पिता के रूप में, आप टेक्नोलॉजी के स्वस्थ उपयोग को दिखाकर एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं, जब आप घर पर हों, भोजन के दौरान, या सोने के समय में अपने फोन और गैजेट को दूर रखें। फोन और इंटरनेट के उपयोग के लिए नियम बनाएं। प्रौद्योगिकी की अनुमति के लिए स्पष्ट नियमों का निर्धारण करें; आप अपने बच्चे से रात के समय अपने फोन या इंटरनेट को बंद करने के लिए कह सकते हैं और उन्हें अपने फोन को लॉक करके अपनी गोपनीयता रख सकते हैं। आप सुनिश्चित करें कि वे सुबह तक इसका उपयोग नहीं करेंगे।

यह लेख बच्चों और किशोरवय मामलों के मनोचिकित्सक डॉ भूषण शुक्ला और मनोवैज्ञानिक सोनाली गुप्ता से मिले तथ्यों के आधार पर लिखी गई है। 

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