क्या गुस्से का इलाज किया जा सकता है?

गुस्सा, और जब यह मुद्दा बन जाए

हम सभी ने गुस्से को किसी न किसी रुप में अपने दैनिक जीवन में अनुभव किया है। गुस्से का आना संवेदनात्मक रुप से प्राकृतिक, वैध, आवश्यक और उपयुक्त है। गुस्सा एक आधारभूत संवेदना है जो आन्तरिक या बाह्य घटनाओं के कारण उत्पन्न हो सकती है। यदि हम जांच करें, तब निम्न में से एक या अधिक स्थितियों के कारण हम गुस्से के रुप में प्रतिक्रिया देते हैं:

बाहरी घटनाएं

·         कोई अनचाही स्थिति, जिसके कारण तनाव होता है

·         किसी दूसरे व्यक्ति की अनपेक्षित या गलत क्रिया

·         हमारी ज़रूरतें दूसरे व्यक्ति के साथ मेल नही खाती हैं

आन्तरिक घटनाएं

·         किसी व्यक्ति या स्थिति से दुखी या अवसाद में रहना या परेशान होना

·         कुछ यादें, अनसुलझी समस्याएं या आपसी विवाद

·         दूसरों से और जीवन से अवास्तविक अपेक्षाएं

गुस्सा होने से हमें अनेक प्रकार के करीबी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जैसे अतिक्रमण, अन्याय, अपमान या बाकी भौतिक या संवेदनात्मक नुकसान। वैसे देखा जाए, तो गुस्सा आना किसी भी अप्रिय स्थिति या घटना के प्रति सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है लेकिन यह विशेष मुद्दा बन सकती है जब:

·         यह अत्यधिक हो

·         इसकी अभिव्यक्ति अनुपयुक्त हो

·         इसे व्यक्त ही नही किया जाए या समावेशन कर लिया जाए

अत्यधिक गुस्सा बार बार करते रहने से व्यक्ति को उच्च रक्तचाप और ह्र्दय संबंधी बीमारियां होने का खतरा होता है। जब गुस्से का अनुभव या प्रतिक्रिया बहुत जल्दी या ज्यादा दी जाती है, तब इससे हमारे शरीर और मस्तिष्क पर तनाव आता है।

गुस्से का अनुपयुक्त प्रदर्शन करने से, फिर वह भौतिक हो या शाब्दिक, कोई भी व्यक्ति आक्रामक, परेशान करने वाला और शोषण करने वाला हो सकता है। इसके कारण बाकी व्यक्ति उस व्यक्ति से सुरक्षात्मक व्यवहार रखने लगते हैं और व्यक्तिगत व व्यावसायिक संबंध भी खराब हो जाते हैं।

जब गुस्सा आता है या उसे दबा दिया जाता है, तब वह हमारे मस्तिष्क और शरीर में तनाव के रुप में भन्डारित हो जाता है। बचपन के कुच अनुभव जिनके कारण गुस्सा आता है, उन्हे समय पर अभिव्यक्ति न हो पाने के कारण दबा दिया जाता है। कुछ प्रकार का गुस्सा जिसमें किसी व्यक्ति के बारे में निरंतर सोचते रहने के कारण या किसी घटना के बारे में सोचने से वह आन्तरिक गुस्से में बदल जाता है। लम्बे समय तक गुस्से को दबाकर रखने से मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर आता है। यदि गुस्से को सही समय पर नियमित नही किया गया या अभिव्यक्त नही किया गया, तब वह सही के स्थान पर गलत व्यक्ति या परिस्थिति पर भी बाहर आ सकता है। इसके कारण कई बार गलतफहमी होती है और आन्तरिक विवाद होते हैं।

गुस्से के मुद्दे को सही करना

गुस्से की स्थिति तब एक मुद्दा बन जाती है जब किसी व्यक्ति को अपने गुस्से की संवेदना को नियमित करने में परेशानी होती है। वैसे देखा जाए, तो गुस्सा अनुभव करना सामान्य हौ, यह सही तरीके से अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करने का तरीका है जिसमें किसी अन्य को या स्वयं को कोई नुकसान नही होता है।


गुस्से को सही प्रकार से नियामित करने के लिये निम्न तथ्यों से मदद मिल सकती है

·         अपने गुस्से संबंधी मुद्दे को लेकर जागरुक रहना: यह अपने गुस्से के प्रबन्धन का पहला चरण है। हम अपने गुस्से के मुद्दे के बारे में जान सकते हैं कि:

1.    किसके कारण हमें गुस्सा आया

2.    गुस्सा होने के कारण को बेहतर तरीके से जानना

3.    यह जानना कि गुस्सा करने के कारण या सोच सही है या किसी गलत जानकारी से जुड़ी है

·         शांत रहने की तकनीकों का नियमित अभ्यास:हम यह जानते हैं कि गुस्से के कारण हमें शारीरिक तनाव होता है जैसे ह्र्दय की धड़कन बढ़ जाती है और हमारी सांस तेज़ चलने लगती है। नियमित रुप से गहरी सांस लेने और अन्य श्वसन अभ्यास करने व पेशियों को आराम देने के तरीकों का अभ्यास करने से आप गुस्से को कम कर सकते हैं व शांत रह सकते हैं।

·         उपयुक्त प्रकार से गुस्से की अभिव्यक्ति:कोई भी संवेदना हो, उसे अभिव्यक्त करने की आवश्यकता होती है। यह खासकर गुस्से की संवेदना के साथ अधिक सही है। यही कारण है कि अवसाद, गुस्सा आदि के बारे में अपनी बात कहना और शांत प्रकार से अपनी संवेदनाओं को सामने लाने से गुस्से की अनुभूति कम हो जाती है। अन्य तरीके होते हैं जिनसे गुस्से की अभिव्यक्ति की जाती है जैसे दैनिक डायरी लिखना, कविता लिखना या अपनी कला के किसी साधन के साथ जुड़ना आदि।
 

·         अपनी आवश्यकताओं व इच्छाओं के बारे में बताना:अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बारे में बेहतर तरीके से बता देने पर बाकी व्यक्तियों के पास आपकी अपेक्षाओं को लेकर बेहतर जानकारी होती है।
 

·         व्यावसायिक मदद लेना:यदि आपने उपरोक्त सभी प्रकार उपयोग में लाकर देख लिये हैं और आपका गुस्सा आपकी सहनशक्ति से बाहर चला जाता है, तब आपको व्यावसायिक मदद अवश्य लेनी चाहिये। कोई प्रमाणित सलाहकार या मानसशास्त्री आपकी स्थिति को समझकर आपके गुस्से को प्रबन्धित करने का बेहतर तरीका बता पाएंगे।

सन्दर्भ:

गुस्से को नियंत्रित करना, इससे पहले कि वह आपको नियंत्रित करे: http://www.apa.org/topics/anger/control.aspx
गुस्सा प्रबन्धन: http://www.helpguide.org/articles/emotional-health/anger-management.htm

 

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