भावनात्मक दुर्व्यवहार या घाव शारीरिक चोट से ज़्यादा गहरा होता है

हम में से अधिकतर लोग यह जानते हैं कि शारीरिक दुर्व्यवहार क्या है और हिंसात्मक होने पर शारीरिक आक्रामकता को पहचानने में सक्षम हैं। हालांकि, दुर्व्यवहार का दूसरा रूप जो समान रूप से हानिकारक और अधिक सूक्ष्म हो सकता है वह है भावनात्मक दुर्व्यवहार।

भावनात्मक दुर्व्यवहार क्या है?

भावनात्मक दुर्व्यवहार आमतौर पर घनिष्ठ संबंधों में देखी जाने वाली घटना है। यह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जानबूझकर किया गया व्यवहार है जो अपमानित, अपमानजनक या नीचा दिखाने वाला है। जो व्यक्ति दुर्व्यवहार से पीड़ित होता है वह दुर्व्यवहार के कारण कम आत्मसम्मान महसूस करता है और इसका उसके संबंधों पर भी असर पड़ता है। एक रिश्ते में पुरुष और महिला दोनों ही भावनात्मक दुर्व्यवहार कर सकते हैं।

शारीरिक आक्रामकता और दुर्व्यवहार की तरह, भावनात्मक दुर्व्यवहार भी रिश्ते में दूसरे व्यक्ति को कमजोर या शक्तिहीन महसूस करा सकते हैं। अक्सर, पीड़ित व्यक्ति इस व्यवहार को दुर्व्यवहार नहीं समझता है। कभी-कभी, दुर्व्यवहार करने वाला भी दूसरे व्यक्ति पर अपने शब्दों और कार्यों के असर से अनभिज्ञ होता है। 

भावनात्मक दुर्व्यवहार कैसाहोता है?

भावनात्मक दुर्व्यवहार में निम्न में से एक या अनेक व्यवहार शामिल हो सकते हैं:

·         बेवफाई के आरोपों के कारण लगातार संदेह करना और अपने साथी पर नज़र रखना। दुर्व्यवहार करने वाला बार-बार सवाल भी कर सकता है कि व्यक्ति क्या कर रहा है, वे कहाँ जा रहे हैं और वे किसके साथ समय व्यतीत कर रहे हैं। वे इस बात पर जोर दे सकते हैं कि उनका साथी उनके साथ ईमानदार नहीं है, और उनकी कथित बेवफाई के बारे में उन्हें परेशान करता है।

·         आकस्मिक आलोचक टिप्पणियां जो हानिकारक हैं। ये उनके भोजन, दिखने या ड्रेसिंग शैली, उनके कौशल या उनकी जिम्मेदारियों को प्रबंधित करने की उनकी क्षमता पर टिप्पणी कर सकते हैं। वे यह संकेत दे सकते हैं कि जिस तरह के व्यक्ति है, उसके साथ मूलभूत रूप से कुछ गलत है।

·         दूसरों के सामने अपमानित करना, सुधारना या मज़ाक उड़ाना और इसके बाद अकेले में पछतावे से भरकर माफी मांगना।

·         सज़ा या लगाव को रोककर दूसरे व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करना। यह नियंत्रण कि किस तरह से वे कपड़े पहने से लेकर वे कहाँ जाएँ और कैसे पैसा खर्च करें तक हो सकता है। इस वजह से, अगले व्यक्ति को लगने लगता है कि उसको अपने साथी को छोटे से छोटे कार्यों या व्यय के लिए 'रिपोर्ट' करना या उनकी 'अनुमति' लेनी है। 
·         भावनात्मक स्नेह को एक तरह से रोकना जिससे कि अगला मानता रहे कि वह अपने साथी के प्रेम के लायक नहीं है। अक्सर, यह व्यक्ति की 'गलतियों' की सजा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 
·         दूसरे व्यक्ति को नकाराना या अनदेखा करना, फैसला लेते समय जब वे बोल रहे हों या अपना दृष्टिकोण रख रहे हों तब जानबूझकर उन पर ध्यान नहीं देना, दुर्व्यवहार करने वाला हो सकता है व्यक्ति के सपने या इच्छाओं को भी अनदेखा करे, या उनकी आवाज़ को दबाए।
·         टिप्पणियां जो व्यक्ति को यह मानने पर मजबूर करती हैं कि वे अपने दिमाग का नियंत्रण खो रहे हैं या पर्याप्त विश्वसनीय नहीं हैं। दुर्व्यवहार करने वाला यह दिखता है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है; या कि कुछ घटनाओं की स्मृति अलग है क्योंकि दूसरा व्यक्ति 'इसको बहुत अच्छे से समझ रहा है' या वे 'बहुत संवेदनशील' हैं और यह कि दुर्व्यवहार करने वाला चीज़ों को अलग तरह से याद करता है। 
·         कुछ मामलों में, दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति अगले की गतिविधियों और कार्यकलापों को इस हद तक नियंत्रित कर सकता है कि वे अपने मित्रों और परिवार से अलग हो जाएं।    

दुर्व्यवहार करने वाला प्रणालीगत मौखिक और मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार का स्वरूप बनाने के लिए इनमें से एक या अधिक तरीकों का उपयोग कर सकता है जो पीड़ित को कगार पर ले आता है। पीड़ित को दुर्व्यवहार करने वाले के साथ रहने में हमेशा अनावश्यक कार्य करने की भावना हो सकती है; हमेशा सतर्क रहें, और कभी नहीं जानते कि कब कुछ करते या कहते है जो दुर्व्यवहार करने वाले को हटा दे। वे उस पर विश्वास करना शुरू कर सकते हैं जो दुर्व्यवहार करने वाला कहता है--कि वे बेवकूफ, अक्षम या बेकार हैं, और वे दुर्व्यवहार करने वाले के व्यवहार का कारण हैं।

भावनात्मक दुर्व्यवहार बहुत आसानी से शुरू हो सकता है - अक्सर सामान्य व्याख्या या टिप्पणियों के माध्यम से - और तेज़ी से गति पकड़ सकता है। इस वजह से, पीड़ित इसे उस विशेष रिश्ते में 'सामान्य' के रूप में देख सकता है। वे यह समझने में असमर्थ होते हैं कि दुर्व्यवहार करने वाले का व्यवहार सामान्य नहीं है, या उनके आत्मसम्मान पर हमला किया जा रहा है। पीड़ित हो सकता है अपने ऊपर साथी के व्यवहार के प्रभाव को पहचान नहीं पाए।

धीरे-धीरे, इसकी तीव्रता बढ़ जाती है और पीड़ित यह मानने लगता है कि वे बेकार हैं और कोई भी उनकी मदद नहीं कर सकता है। वे यह भी विश्वास करने लगते हैं कि वे कुछ 'पागल' हैं और किसी प्रेम, स्नेह या देखभाल के लायक भी नहीं हैं, जो उन्हें मदद प्राप्त करने से दूर कर सकता है।
कभी-कभी, दुर्व्यवहार करने वाले भी इससे अनजान रहते हैं कि वे मनोवैज्ञानिक हेरफेर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने हो सकता है अपने बचपन में घर पर ऐसा दुर्व्यवहार देखा हो, और मानते हों कि अंतरंग संबंधों में यह 'सामान्य' व्यवहार है। 

भावनात्मक दुर्व्यवहार का प्रभाव

भावनात्मक दुर्व्यवहार शारीरिक दुर्व्यवहार के समान है, इसमें पीड़ित पर गहरा असर होता है, जिससे वे अलग-थलग, बेकार और शक्तिहीन महसूस करने लगते हैं। वह व्यक्ति:

• आत्म-सम्मान काफी कमहो जाता है क्योंकि पीड़ित मानने लगता ​​है कि उनके साथी द्वारा उन्हें दी गई आलोचना या अपमान उनके बारे में एक सटीक प्रतिक्रिया है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से सच हो सकता है जिनके पास कोई अन्य नेटवर्क नहीं है (दोस्त, परिवार या सहकर्मी) और इसलिए यह जानने का कोई दूसरा तरीका नहीं होता है कि दूसरे उनको अलग तरह से देख सकते हैं।   

• वे अपने आप को असमर्थ हैं और अयोग्य मानते हैं, कि वे किसी और के साथ नहीं रह सकते, या किसी अन्य व्यक्ति के साथ गुणवत्तायुक्त संबंध नहीं रख सकते हैं। वे मान सकते हैं कि वे उनके साथी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार के ही लायक हैं।  

• दुर्व्यवहार करने वाले के बढ़ने के लगातार भय में रहते हैं, और उनको हर समय देखते रहते हैं। वे हर समय इसके लिये व्यग्रता में हो सकते हैं कि उनका कौन सा व्यवहार आलोचना का कारण हो सकता है और इसके लिये अपने साथी के अनावश्यक कार्य करने लगते हैं।  

बार-बार भावनात्मक दुर्व्यवहार होने पर, असहाय होने और निराशा की भावना से अवसाद और व्यग्रता के लक्षण पैदा हो सकते हैं। लेकिन यदि दुर्व्यवहार समाप्त हो जाता है, तो ये लक्षण भी समाप्त हो सकते हैं। लम्बे समय तक तनाव, उच्च रक्तचाप, शरीर का दर्द, सिरदर्द या उपापचयी संबंधी विकार जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण हो सकता है। तनाव,'राज़' को अपने अन्दर रखने के पारम्परिक दबाव से मिलकर मनोदैहिक बीमारियों का कारण बन सकता है। जो व्यक्ति भावनात्मक दुर्व्यवहार से गुज़रता है, वह व्यग्रता या अवसाद के लिए अधिक संवेदनशील हो सकता है।    

भावनात्मक दुर्व्यवहार के लिए मदद मांगना   

भावनात्मक दुर्व्यवहार शारीरिक दुर्व्यवहार की तरह स्पष्ट नहीं हो सकता है, लेकिन यह उतना ही खतरनाक और हानिकारक है। भावनात्मक दुर्व्यवहार तनहा करने वाला हो सकता है, और यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह आपकी गलती नहीं है, और आप अन्य लोगों की मदद से अधिक सशक्त महसूस कर सकते हैं।

अगर आपको लगता है कि आप भावनात्मक दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं, तो तुरन्त मदद मांगें। आप हेल्पलाइन को कॉल कर सकते हैं या परामर्शदाता के संपर्क में रह सकते हैं जो आपको भावनात्मक रूप से सम्भाल पाएंगे। परामर्शदाता, दुर्व्यवहार करने वाले के द्वारा हेरफेर से सेट किए गए आपकी नकारात्मक सोच के चक्र को तोड़ने में और आपको अपना आत्मसम्मान हासिल करने में मदद करेगा।  

इसके अलावा, आप अपने मित्रों और परिवार से भी भावनात्मक सहारा ले सकते हैं। यदि आप कामकाजी नहीं हैं, तो आप नौकरी पाने या स्वयंसेवा करने पर विचार कर सकते हैं ताकि आप अपने सामाजिक दायरे का विस्तार कर सकें और सुकून ले सकें।

सहायता कहां से प्राप्त करें 
आपके पास एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के लिए परामर्श या रेफरल के लिए हेल्पलाइन:
परिवर्तन : (080) 65333323 सोमवार से शुक्रवार, शाम 4.00 बजे से 10.00 बजे तक 
आईकाल हेल्पलाइन: 022-25521111 (सोमवार से शनिवार, सुबह 8 बजे से 10 बजे तक)
SNEHA: http://www.snehamumbai.org/our-work/domestic-violence.aspx (कानूनी सलाह भी उपलब्ध है)
एकेएस फाउंडेशन संकट रेखा: (+91) 8793 0888 14/15/16 (http://aksfoundation.org/how-we-can-help/)
सामान्य और कानूनी सहायता:
महिलाओं के अधिकारों के लिए विमोचना फोरम: + 91-80-25492781 / 25494266 (संकट हेल्पलाइन)
राष्ट्रीय महिला आयोग: http://ncw.nic.in/frmhelpline.aspx
यह लेख परिवर्तन परामर्श, प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र की परामर्शदाता और प्रशिक्षिका शबरी भट्टाचार्य से ली गई निविष्टियाँ के साथ लिखा गया है।

 

 

 

 

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