क्या आप बेहतर महसूस करने के लिए खा रहे हैं?

क्या आपको याद है कि पिछली बार कब आप बेहद थका हुआ या भावनात्मक रूप से कमतर महसूस कर रहे थे और गर्मागर्म खिचड़ी के कटोरे के लिए लालायित हुए थे? या वह समय जब आप इतने ऊब चुके थे और पनीर पिज्जा या चीज़ी आलू के चिप्स खाना चाहते थे? क्या आपको कभी अच्छे ग्रेड या व्यवसायिक सौदे की ख़ुशी मनाने के लिए मिठाई खाने की इच्छा हुई? या बारिश के मौसम में पकौड़ों के साथ अदरक की चाय का मन किया?

खाना हमारी भावनात्मक स्थितियों से इतना गहराई से क्यों जुड़ा है?

खाना हमारे जीवन का एक प्रमुख हिस्सा है। अब जैसे नवजात शिशु के तौर पर, जब हमें हमारी माताओं द्वारा दूध पिलाया जाता है, तब वह भोजन, जीविका और पोषण के साथ साथ प्रेम, रिश्तों की गर्माहट और जुड़ाव भी प्रदर्शित करता है। धीरे-धीरे, जब हम बड़े होते हैं, भोजन अधिक जरूरतों को पूरा करता है: जब हम परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खाते हैं, तो हम उनके साथ मजबूत संबंध बना रहे होते हैं; जब हम एक व्यंजन में लिप्त होते हैं, यह हमें ऐन्द्रिय सुख देता है; जब हम विशेष अवसरों के दौरान दोस्तों और परिवार के साथ खाते हैं, तो भोजन उत्सव का एक साधन बन जाता है।

कभी-कभी, हलांकि, जब हम व्यग्र, ऊबाऊ, दुखी या कमतर महसूस करते हैं, तो हम अनुभव की जा रही उन भावनाओं से खुद को अलग करने के लिए खाते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ हमें तनाव या भावनाओं से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक यह मुकाबला करने का ज्यादा प्रभावी तरीका नहीं है। कभी-कभी, कुछ भावनाओं के कारण भी भोजन करने में कमी हो सकती है। यदि आपने साक्षात्कार या परीक्षा के बारे में व्यग्र होने के कारण खाना छोड़ दिया है, तो संभवतः आपने इसका अनुभव किया है।

नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक बोना कोलाको का कहना हैं कि "प्रत्येक व्यक्ति का मनोदशा और भावनाओं से सामना करने का तरीका अलग-अलग होता है"। "जब हम नाराज, उदास या व्यग्र होते हैं, हम बेहतर महसूस करने के लिए अलग-अलग चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं। भोजन उन चीजों में से एक है जो हमें तुरन्त अच्छा महसूस करवा सकता है। "कुछ खाद्य पदार्थ (उदाहरण के लिए चीनी) डोपामीन जारी करके हमारे मस्तिष्क की प्रतिफल प्रणाली को सक्रिय करते हैं। यह जब हम खाते हैं तो हमें अच्छा महसूस होता है - खासकर ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें बहुत अधिक चीनी होती हैं। तो कभी-कभी, जब हम दुखी, परेशान या ऊबाऊ महसूस करते हैं, तो हम बेहतर महसूस करने के लिए कुछ खा सकते हैं।

अनुसंधान यह बताते है कि तनाव, चिंता और व्यग्रता जैसी स्थितियों को ज़्यादातर भावनात्मक भोजन से जोड़ा जाता है।

स्रोत: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19391020

लेकिन क्या यह हानिकारक है?

कुछ विशेषज्ञ विशेष रूप से 'नकारात्मक' रूप में ली जाने वाली भावनाओं से निपटने के खाने के व्यवहार को बताने के लिए 'भावनात्मक भोजन' शब्द का प्रयोग करते हैं। चूंकि भोजन बेहतर महसूस करने के लिए हमारी प्रतिफल प्रणाली को सक्रिय करता है, इसलिए हम हर बार तनाव या व्यग्रता का अनुभव करने पर खाना खा सकते हैं। जबकि हम बेहतर महसूस करने पर ध्यान देते हैं, तब हम इस व्यवहार तक ले जाने वाले वास्तविक भावनात्मक स्थिति को ठीक करने के लिए कुछ कम प्रयास करते हैं। हम जब ऐसी स्थिति में खाते हैं, तब हम केवल मौजूदा समस्या (असुविधाजनक भावना) को ठीक करने की कोशिश कर रहे होते हैं, न कि वास्तविक कारण को ठीक करते हैं।

लम्बी अवधि तक भावनात्मक भोजन करना शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है, खासकर जब हम ऐसे खाद्य पदार्थ खाते हैं जो प्रकृति में मीठे या अस्वास्थ्यकर होते हैं। चीनी का स्तर ऊंचा होने पर शिथिलता और आलस्य तत्काल प्रभाव हो सकता है।

कुछ मामलों में, भावनात्मक भोजन व्यग्रता या अवसाद के साथ जुड़ा हो सकता है यदि आपको इनमें किसी लक्षण का अनुभव हो तो, कृपया तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता प्राप्त करें।

कुछ लोग जीवन में महत्वपूर्ण हानि जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु, या रिश्ते का अंत होने के बाद आराम पाने के लिए खाना खाते हैं। ऐसी स्थिति में, यह अनुशंसा की जाती है कि वे एक दुःख परामर्शदाता से सहायता मांगें जो उन्हें अपने नुकसान से निपटने में मदद करेंगे।

लेकिन मुझे कैसे पता चल सकता है कि मैं खा रहा हूँ क्योंकि मुझे भूख लगी है,या इसलिए कि मैं भावुक हो रहा हूँ?

कोलाको का कहना है कि शरीर में क्या हो रहा है इस पर ध्यान देना जरूरी है। "जब भूख लगी हो तब पैदा होने वाले संवेदन के बारे में हमें जागरूक होना है। मेटाबोलिकल प्रक्रियाएं और गैस्ट्रिक दबाव भूख के संकेतों को उभारती हैं। जब हम खाते हैं, तो ये संकेत दब जाते हैं और हम तृप्त या पूर्ण महसूस करते हैं। इन संवेदनाओं के बारे में जागरूक होने से हम यह महसूस कर सकते हैं कि कब हम अपनी भूख से निपटने के लिए खाते हैं, और कब हम 'अच्छा महसूस' करने की कोशिश कर रहे हैं।

मदद मांगें

यदि आपको लगता है कि जब आप तनावग्रस्त होते हैं तो भोजन करते हैं, और इस चक्र को तोड़ना चाहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से संपर्क करें। वे भावनाओं और संघर्षों का पता लगाने में सक्षम होंगे, और उनका मुकाबला करने के बेहतर तरीके की पहचान कराने में सहायता करेंगे।

आप मुकाबला करने के खुद के तरीके विकसित करना भी शुरू कर सकते हैं:

शारीरिक रूप से: सुनिश्चित करें कि आप नियमित समय पर पौष्टिक भोजन खाएं। पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि में शामिल हों। नियमित व्यायाम मस्तिष्क में एंडोर्फिन उत्पन्न करता है जिससे अच्छा महसूस करने के साथ और भोजन पर आपकी निर्भरता कम करने में मदद करता है।  

भावनात्मक रूप से: उन तनावों की पहचान करने की कोशिश करें, जो आपको खाने के लिए मजबूर करते हैं, और स्वयं की निगरानी करें ध्यान या सचेतन का अभ्यास करें, मित्रों और परिवार से सहयोग प्राप्त करें या जिन गतिविधियों में आनंद आता हो (पेंटिंग, जर्नलिंग, या संगीत में भाग लें)। 

यह लेख निमहैंस के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ.पॉलोमी सुधीर और लाइसेंस प्राप्त नैदानिक मनोवैज्ञानिक बोना कोलाको के आदान पर लिखा गया है।

 

 

 

 

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