बेटों के मर्दाना विचार को आकार देने में पिता बड़ी भूमिका निभाते हैं

आज की #MeToo दुनिया में, युवा लड़कों को भावनात्मक साक्षरता और लिंग एवं सहानुभूति के संतुलित विचारों से लैस करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए पिता-पुत्र के संबंध एवं जुड़ाव महत्वपूर्ण हैं, जो लड़कों में भावनात्मक अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ाने, कठिन परिस्थितियों में उनकी भावनाओं के प्रबंधन, तनाव से निपटने, और उनके नकारात्मक एवं मुश्किल हालात को सामान्य बनाने के तरीके को समझाने में सहायक साबित होते हैं।

मैंने अपने अभ्यास के दौरान देखा कि बहुत सी माताएं अपने बच्चों के साथ मुश्किल संबंधों, कभी-कभी बच्चे की बीमारी या आत्महत्या कर लेने पर उसे खो देने के बाद जीवन में सामंजस्य बैठाने के लिए सक्रिय रूप से मदद ढूंढती हैं। यह नैदानिक प्रवृत्ति पेरेंटिंग पर शोध के अनुरूप है, जो माताओं और मां-बच्चे के आपसी बंधन पर ध्यान केंद्रित करती है। लेकिन मेरे कार्यालय में पिता? बहुत ज्यादा नहीं पहुंचते। पितृत्व पर समान ध्यान महत्वपूर्ण है क्योंकि शोध बताता है कि युवा लड़कों में व्यवहार संबंधी समस्याओं की शुरुआत पिता की अनुपस्थिति, पिता के साथ हिंसा का इतिहास, नकारात्मक और कठोर सजा, और 'माचो' लिंग आदर्श या रूढ़िवादिता से संबंधित है। यह शोध का बड़ा हिस्सा है, यह दिखाने के लिए कि पोषण करने और देखभाल करने वाले पिता का बच्चों के भावनात्मक और सामाजिक विकास पर महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

अपने बेटों में स्वस्थ मर्दानगी को आकार देने में पिता की भूमिका को अनदेखा या छोड़ा नहीं जा सकता है। इसके अलावा, पिता अपने अनुभवों और पारिवारिक संरचनाओं और अपेक्षाओं के आकार के अनुसार आत्म-पहचान और स्वयं की मर्दानगी को कैसे संचालित करते हैं? लिंग भूमिकाएं, लिंग आदर्श, और लिंग पहचान बड़े पैमाने पर सिखाई जाती है और पारिवारिक संरचना के भीतर हमें देखभाल, बातचीत और अभिभावक एवं बच्चे के बीच बातचीत के माध्यम से सिखाई जाती हैं। आप इसे आज के सामान्य सास-बहू शो में देखते हैं, जो लिंग भूमिकाओं और लिंग आधारित विशेषाधिकार की स्पष्ट व्याख्या करते हैं।

युवा लड़कों को अक्सर बताया जा सकता है कि उन्हें किस तरह का आदमी बनना चाहिए, और वे अपने पिता के काम पर जाने, घर के कामों में भाग लेने (या भाग नहीं लेने), पारिवारिक निर्णय लेने आदि को देखकर अपनी लिंग अभिव्यक्ति  के बारे में बहुत कुछ सीख सकते हैं। बच्चों को व्यावहारिक और सांस्कृतिक आदर्श का शिक्षण देना जैसे "लड़की की तरह मत रोओ" या अपवाद के रूप में जैसे कि "वह एक लड़का है, वह शरारती बन जाएगा!" बोला जाता है। अक्सर मुश्किल हालात से निपटने (जैसे कि साइकिल से गिरने पर) पर कहा जा सकता है "उन्हें मजबूत बनाओ"। यौन और लिंग पहचान, या दोस्तों या किसी सहकर्मी समूह के साथ फिट करने की कोशिश में भी ऐसा उलाहना दिया जा सकता है। बच्चे के विकास के विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं में, ऐसे प्रदर्शन दर्शाते हैं कि क्रूरता और भावनात्मक नियंत्रण तो स्वीकार्य हैं, लेकिन 'स्त्री या लड़कियों वाले' व्यवहार अस्वीकार्य हैं। 

हालांकि, पिता अपने जीवन के पहले या बाद के वर्षों के दौरान सहानुभूति व्यक्त करना सिखाने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पिता अपनी पारिवारिक बातचीत में सहानुभूति और करुणा को सक्रिय रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं और जो मर्दाना आदर्शों में लचीलापन प्रदर्शित कर सकते हैं और उन भावनाओं से जुड़ सकते हैं और उन्हें व्यक्त कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, अपने बेटों को अपने दर्द को स्वीकार करने के लिए सिखाते हुए (शारीरिक या भावनात्मक) खुद किसी पालतू जानवर को खो देने पर स्वतंत्र रूप से दुःख व्यक्त करते हैं और इससे माता-पिता या भाई-बहनों और दोस्तों में भी ये भावनाएं हो सकती हैं, जो भावनात्मक ताकत और आलोचनीयता के आदर्शों के बीच अंतर की खाई पाटने का एक तरीका है।

भेद्यता आमतौर पर एक मूल्यवान मर्दाना आदर्श नहीं है। हालांकि युवा लड़कों को सिखाना कि कमजोर होना ठीक नहीं है, यह उनके उनके रिश्तों और आत्म-पहचानों में भावनात्मक आवेश को सीमित कर सकता है। स्नेह और गर्मजोशी के बाहरी भाव, माता-पिता के रूप में वास्तविक गर्व व्यक्त करना और साथ-साथ समय-समय पर व्यतीत करना, पिता-पुत्र गतिविधियों में शामिल होने को बेटों द्वारा सकारात्मक रूप से सम्मान और मूल्य दिया जाता है और यह पिता-पुत्र के बंधन को गहरा करते हैं। ये व्यवहार पिता और पुत्र के बीच संचार के सक्रिय और निर्लिप्तता का स्तर बढ़ाते हैं। भावनाओं के बारे में मौखिक और गैर-मौखिक संचार दोनों साझा करने में सक्षम होने के नाते बच्चों को सकारात्मक अनुभव हो सकता है। इन तरीकों से 'भावना प्रकट करना' लैंगिक समानता और सम्मान को संप्रेषित करने में भी प्रभावी है और यह गैर परंपरागत परिवारों या उन परिवारों पर जहां माता-पिता दोनों नौकरी में होते हैं, या ऐसे परिवार जहां विभिन्न लिंग और यौन पहचान वाले सदस्य शामिल हैं उनमें सकारात्मक प्रभाव डालता है।

पारंपरिक या कठोर मर्दाना आदर्शों के पुनर्निर्माण के लिए वकालत और मानवता बनाम पितृत्व के विचार को अलग करना पिता-पुत्र संबंधों और भूमिकाओं को अधिक तरलता प्रदान करने, संतुलित और लिंग जागरूकता की दिशा में पुनर्निर्देशषित करने का एक तरीका है।

दिव्या कन्नन,पीएचडी,यूएसए के नैशविले में वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय से नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक हैं,जहां उन्होंने पिछले कई सालों में हिंसा के बीच बड़े हुए वयस्क लोगों के साथ काम किया है। वह वर्तमान में बैंगलोर में एक अभ्यास चिकित्सक है।

संदर्भ:

1. (रेमो, 2009; योगमैन एंड गारफील्ड, 2016)

2. (लिंडसे, काल्डेरा, और रिवेरा, 2013, कास्त्रो एट अल, 2015)