देखरेख एवं अपनी देखभाल - न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारियों वाले मरीजों के देखभालकर्ताओं के लिए

ललिताश्री गणेश

यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल करने वाले हैं जो अल्जाइमर्स, पार्किसंस या डिमेंशिया से पीड़ित है, तो यह लेख आपको अगले चरणों के लिए तैयार करने में मदद करेगा। आपको यह जानने की जरूरत है कि क्या अपेक्षा करना चाहिए, रोगी की देखभाल कैसे की जाए, और बीमारी बढ़ने के साथ ही किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही साथ, याद रखें कि आप भी महत्वपूर्ण हैं। यह जरूरी है कि आप स्वयं की देखभाल को भी प्राथमिकता दें।

किन संकेतों पर आपका ध्यान होना चाहिए?

रोगी और देखभालकर्ता दोनों सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं जैसे कि अवसाद, चिंता, और सामंजस्य विकार (दैनिक जीवन के तनाव के लिए असामान्य और बहुत अधिक प्रतिक्रिया)।

देखभालकर्ताओं को प्रारंभिक चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना चाहिए जैसे कि:

- नींद लेने में कठिनाई

- खाने में कठिनाई

- उन चीजों में रुचि की कमी, जिनसे पहले आनंद लिया करते थे

- सामाजिक समारोहों में जाने से बचना

इसके साथ ही, देखभालकर्ताओं को यह करना होगा:

- रोगी में एक साथ एक से ज्यादा बीमारियों से अवगत रहें

- रोगी के मानसिक स्वास्थ्य इतिहास पर नजर रखें, क्योंकि लक्षणों के पलटाव या उनमें प्रचंडता आने की संभावना हो सकती है

- यदि आवश्यक हो, तो रोगी को मनोचिकित्सक या परामर्शदाता के पास ले जाएं

अपनी और रोगी की देखभाल करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ बातें यहां दी गई हैं:

- अवगत रहें। यह आपके साथ-साथ रोगी की भी सहायता करता है: देखभालकर्ता के रूप में, यह रोगी की बीमारी के बारे में अवगत रहने में मदद करता है और एक परामर्शदाता से मिलाता है जो रोगी की बीमारी के विभिन्ना चरणों के दौरान आपकी सहायता कर सकता है। शुरुआत में बार-बार मुलाकात करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन समय के साथ, बीमारी से समझौता होने और जीवन परिवर्तन के साथ, इन मुलाकातों की बारंबारता में कमी आ सकती है।

- अपनी स्वयं की देखभाल करें, आप भी महत्वपूर्ण हैं: देखभालकर्ता होना एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है, और आपकी नई भूमिका आपके लिए नुकसानदेह हो सकती है। यह आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकता है क्योंकि आपको अतिरिक्त काम करने, अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल करने के साथ-साथ अपने प्रियजन की देखभाल करने की आवश्यकता होगी। तो, सुनिश्चित करें कि आप अपने लिए भी कुछ समय रखें। समय-समय पर, उन गतिविधियों में शामिल हों जिनसे आपको आनंद मिलता है, सामाजिक बने रहें और अपने मित्रों और परिवार से जुड़े रहें।

- बात करें, और आवश्यकता होने पर सहायता लें: देखभालकर्ताओं को याद रखना चाहिए कि निदान का मतलब यह नहीं है कि सामाजिक बातचीत और परिवार में उठना-बैठना बंद कर दिया जाए। इसमें डरने के लिए या बदनाम महसूस करने जैसी कोई बात नहीं है। इस बारे में उन लोगों से बात करना ठीक है, जिन पर आप भरोसा करते हैं, पड़ौसियों या विस्तारित परिवार और दोस्तों से मदद लें। सुनिश्चित करें कि आपके पास एक मजबूत, भरोसेमंद समर्थन प्रणाली है, ताकि आप ऐसा महसूस न करें कि सब कुछ करने का बोझ सिर्फ आप पर ही है। 

- रोगी को उनके वित्तीय प्रबंधन में सहायता करें: देखभालकर्ता के रूप में, आपके पास कई दैनिक काम और जिम्मेदारियां होंगी। यदि कोई संयुक्त  खाता नहीं है, तो इसे संवेदनशील तरीके से चर्चा में लाएं। आवश्यक होने पर आप रोगी को उसके एटीएम कार्ड का उपयोग करने में मदद की भी पेशकश कर सकते हैं। इससे पारिवारिक देखभालकर्ता को आवश्यकता पड़ने पर रोगी के वित्त का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। बीमारी का पता चलने के बाद किसी परामर्शदाता से बात करने से उन्हें इसकी आवश्यकता को समझने में मदद मिल सकती है।

- सामाजिक बातचीत: आपको परिवार और दोस्तों से क्या कहना चाहिए? आम तौर पर, जब आप अपने परिवार के सदस्य की बीमारी के बारे में उन्हें खुलकर बताते हैं तो लोग समझते हैं और सहयोग करते हैं। उन्हें बताएं कि:

- उनका रोगी से मिलना-जुलना बिल्कुल ठीक है

- अगर उन्हें नहीं पता कि रोगी से किस बारे में बात करनी है, तो उन्हें अपने साथ बिताए दिन, अपने बारे में, एक क्रिकेट मैच या किसी अन्य चीज़ के बारे में बात करने के लिए कहें जो वास्तव में उस व्यक्ति  के लिए रूचिकर है।

- अल्जाइमर्स या डिमेंशिया के मामले में, व्यक्ति  को ज्यादा कुछ याद नहीं दिलाया जा सकता है या आपस में साझा करने के लिए बहुत बातें नहीं हो सकती हैं। यदि वे अपनी कहानियों को साझा करते हैं, तो यह बहुत उपयोगी होगा। कई सवाल पूछने के बजाय, व्यक्ति  को वार्तालाप में ले जाएं।

- वे व्यक्ति  के लिए सरल चीजें कर सकते हैं, जैसे उन्हें किसी धार्मिक स्थान पर, बुकशॉप या किसी पार्क में ले जाना।

- अगर उन्हें नहीं पता कि रोगी से कैसे बातचीत करें या उसके लिए क्या करना है, तो वे परिवार के सदस्यों या उसके करीबी दोस्त से पूछ सकते हैं, क्योंकि वे व्यक्ति  को सबसे अच्छी तरह जानते हैं।

- अगर व्यक्ति  ओल्ड एज होम या इलाज के लिए किसी सेंटर में है, तो उन्हें बाहर लाने के लिए दोस्तों और परिवार को पूर्व अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।

क्या हम एक न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारी की शुरुआत को रोक या टाल सकते हैं?

जेरियाट्रिक मनोचिकित्सक डॉ. सौम्या हेगड़े कहती हैं कि, "स्वयं की बेहतर देखभाल करना, खासकर शुरुआती या मध्य -30 के दशक से करने पर, किसी के आनुवांशिक प्रकृति के बावजूद बीमारी की शुरुआत में देरी हो सकती है। मस्तिष्क के ज्ञान संबंधी आत्मसंयम को बनाया जा सकता है, ताकि बीमारी का प्रकटीकरण देरी से हो। यह उन गतिविधियों में शामिल होकर किया जा सकता है जो मस्तिष्क के कामकाज में सुधार लाते हैं, और संज्ञान पर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, कोई नई भाषा या संगीत वाद्ययंत्र सीखना।

इसके अलावा, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का ख्याल रखने से काफी हद तक मदद मिलती है। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन्हें शामिल करें:

- नियमित व्यायाम

- स्वस्थ भोजन करना

- नई चीज़ें सीखना

- मित्रों के मिलना-जुलना

- हंसना-खिलखिलाना

- स्वस्थ सामाजिक बातचीत में शामिल होना

डॉ. सौम्या हेगड़े, जेरियाट्रिक मनोचिकित्सक, बैंगलोर से इनपुट के साथ।