प्रियजन के खोने के दुःख को समझने में अपने बच्चे की मदद करना

वयस्कों की तरह बच्चे मौत की अवधारणा को नहीं समझते हैं यदि वे किसी किसी प्रियजन की मौत को देखते हैं तो उनके लिए यह भ्रामक और भयावह समय हो सकता है छोटे बच्चों के माता-पिता मृत्यु के बारे में बात करने में संकोच करते हैं क्योंकि उनको कई चिंताएं हैं जो उन्हें इसके बारे में ईमानदार होने से रोकती हैं:

• क्या मेरा बच्चा इस जानकारी को ठीक से समझ सकता है?

• क्या यह उनमें मौत का या अपने प्रियजनों को खो देने का डर पैदा कर देगा?

• क्या वे यह जानने के लिए कि मृत्यु क्या है अभी बहुत छोटें हैं?

• मैं इसके बारे में उनको कैसे समझा सकता हूं?

• यह उन्हें कैसे प्रभावित करेगा?

• क्या यह मेरे बच्चे को अपनी मासूमियत से महरूम कर देगा?


यह विश्वास कि बच्चे कुछ अनुभवों, जैसे मौत को नहीं समझ सकते या याद कर सकते हैं हमेशा सच नहीं होता। जब वे किसी पालतू या प्रियजन को खो देते हैं, तो पांच साल की उम्र तक के बच्चे यह समझ सकते है कि कुछ अलग हो रहा है। यहां तक कि अगर उनके माता-पिता और अन्य वयस्क इस मुद्दे पर सीधे तौर पर बात नहीं कर रहे, तो भी वे दूसरों की बातें सुन कर, या टीवी पर, या फिल्मों में जो भी देखते हैं, उससे स्थिति के बारे में समझने की कोशिश कर सकते हैं।

शोक करना हानि को सहन करने का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह किसी व्यक्ति को उस नुकसान को सहन करने में, उस प्रिय व्यक्ति के महत्व को स्वीकार करने में और धीरे-धीरे अपने दर्द से उबरने में और यह स्वीकार करने में कि उनके लिए उस व्यक्ति का क्या महत्व था, सहायता कर सकता है। बच्चे चाहे कितना भी छोटे हो, अपने आस-पास से संकेत लेने में सक्षम होते है; वे देख सकते हैं कि क्या चल रहा है (अंतिम संस्कार, शरीर, या कुछ मौत के बाद की रस्म) या वार्तालाप के कुछ अंश को सुनते हैं जिससे उन्हें आभास होता है कि सामान्य से कुछ अलग हो रहा है।

यह नहीं जानना कि उनके सामने यह क्या हो रहा है, और अधिक भ्रामक हो सकता है और कभी-कभी बच्चों के लिए डरावना भी हो सकता है। परिवार में एक मौत होने पर, बच्चा भी गलत धारणाएँ पाल सकता है (अपने जीवन में अन्य वयस्कों को खोने का डर, अचानक मर जाने का डर या रात में सोएंगे, तब मर सकते हैं) जब तक कि कोई एक विश्वसनीय वयस्क उन्हें बैठकर ठीक से यह समझा नहीं देता। 

बच्चे को मृत्यु के बारे में समझाना

एक बच्चे को मौत के बारे में समझाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दुनिया से बाहर की बात बताई जाए लेकिन अगर बच्चा इस बारे में जो कुछ उसने देखा या सुना है, या किसी परिचित की मौत के कारण पूछता है, तो आपको चिंतित नहीं होना चाहिए। बच्चे मौत के बारे में सुनते हैं और इसे अपने तरीके से समझते हैं, इसलिए उनको एक अनदेखी अवधारणा होने की संभावना नहीं है। यहां व्याख्या करने के कुछ तरीके दिए गए हैं:

1. अपने विवेक का उपयोग करें जितना आपको लगता है कि बच्चा संभालने में सक्षम है उतनी जानकारी दें।

2. यदि सवाल आपको हैरत में डालता है, तो बच्चे के साथ ईमानदार रहते हुए बताएं कि आपको जवाब देने के लिए कुछ समय की ज़रूरत हो सकती है।

3. इसे इस तरह से समझाएं जिसमें आप सहूलियत आराम महसूस करते हों। छोटे बच्चों के मामले में, माता-पिता यह कह सकते हैं कि वह व्यक्ति एक तारा बन गया है या भगवान के साथ है, स्वर्ग में गया है, या एक स्वर्गदूत की तरह आकाश से देख रहा है। आप कह सकते हैं, "मैं इसे समझता हूं, और दूसरों के इसके बारे में अलग-अलग विश्वास भी हो सकते हैं।"

4. यदि किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो गई है, तो आप उन्हें बता सकते हैं कि मृत्यु कब हुई और बच्चे को बता दें कि वह व्यक्ति अब परिवार के साथ नहीं रहेगा अन्य विवरण जैसे व्यक्ति के स्वास्थ्य, उनके अंतिम दिनों की पीड़ा, या उनकी मृत्यु की अप्रत्याशितता, या उनके मृत्यु के विवरणों को साझा न करें। विवरण बच्चे को स्वयं या अपने प्रियजनों के उसी तरह मरने के बारे में भयभीत कर सकते हैं।

5. उन्हें सिर्फ जानकारी न दें; बच्चे को अपने भय के बारे में बात करने दें। उनसे पूछें कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है, उन्हें कैसा लगता है या क्या वे किसी के बारे में चिंतित हैं?

6. अस्पष्ट शब्दों या प्रेयोक्तियों से बचें, जैसे 'वे चले गए हैं' या 'वे सो गए हैं। उन्हें बताओ कि मृत्यु अपरिवर्तनीय है,' नहीं, हम उन्हें फिर से नहीं देख पाएंगे, लेकिन हमारी यादें हैं, एक साथ बिताए समय की तस्वीरें हैं। 

7. कुछ बच्चों को यह भी संदेह हो सकता है कि वे या उनके माता-पिता भी मर सकते हैं। इसलिए, उन्हें यह आश्वस्त करना महत्वपूर्ण है कि आप, माता-पिता के रूप में, अपने और उनके भी स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं।

8. जब बच्चा मृत्यु के बारे में पूछने के लिए आप के पास आता है, तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप उनकी अभिव्यक्ति को रोक करके नहीं कहें, "इसके बारे में बात मत करो", "चिंता न करें", या "आप इस बात को अभी समझने के लिए बहुत छोटे हैं। "बच्चे से झूठ बोलने से या उन्हें झूठी आशा देने से बचें कि वह प्रियजन कहीं है और कुछ समय बाद वापस आ जाएगा।

दु: ख से निपटने में बच्चों की मदद करना

दुःख प्रकट करना एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है, और हमारे पास अपनी क्षति को सहने के अलग अलग तरीके होते हैं। माता-पिता के रूप में, आप अपने बच्चे को क्षति को सहन करने में मदद कर सकते हैं जिससे वे अधिक सहज महसूस करें। यह निम्नलिखित हो सकते हैं:

• उनसे अपनी भावनाओं और डर आपके साथ साझा करने को कहें।

• उन्हें अपने पारिवारिक अनुष्ठानों, समारोहों या प्रार्थनाओं में शामिल करें।

• उन्हें इससे निपटने के लिए समय और स्थान दें: कुछ बच्चे स्कूल से एक या दो दिन का अवकाश ले सकते हैं, या कुछ गतिविधियों में कुछ दिन भाग न लेना चाहते हों (विशेषकर उन गतिविधियों में जो उन लोगों से सम्बंधित हो जिन्हें वे खो चुके हैं)। कुछ अन्य बच्चों को कुछ समय के लिए अधिक गतिविधि या विकर्षण की आवश्यकता हो सकती है। ये दोनों पूरी तरह ठीक हैं।

• उन्हें किसी प्रकार की नियमित गतिविधियों पर वापस लाने में मदद करना: यह महत्वपूर्ण हो सकता है यदि मृतक ने बच्चे के दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी हो। उन्हें बताएं कि वे क्या बदलाव कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, अगर बच्चा अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ एक कमरे में रह रहा था, तो आपको यह समझाना पड़ सकता है कि वे अब कमरे नहीं होंगे, या कुछ वक्त बच्चे को अपने कमरे को साझा करने दें। या, यदि ये बुज़ुर्ग हर दोपहर स्कूल के बाद घर में बच्चे का ध्यान रखते थे, तो उन्हें समझाएं कि अब से स्कूल के बाद घर पर कोई और उनका ध्यान रखेगा।

• अपने खुद के प्रतीक या अनुष्ठान बनाना: इसमें उस व्यक्ति के बारे में बात करना शामिल हो सकता है जिसे उन्होंने खो दिया है, या जब उनकी याद आती है तो उनकी तस्वीरों के माध्यम से सम्भाल सकते हैं। आप एक फोटो एलबम भी बना सकते हैं, पेंटिंग कर सकते हैं, एक छोटी कहानी लिख सकते हैं या प्यार और स्मरण के प्रतीक बन सकते हैं।

एक बच्चा जिसके माता-पिता, सहोदर या करीबी दोस्त की मृत्यु हो गई है, उन्हें इसके दर्द से उबरने के लिए अतिरिक्त सहायता की ज़रूरत हो सकती है। उन्हें कुछ अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है, जब वे खुद के लिए एक नयी दिनचर्या बनाते हैं और प्रियजन के गुज़र जाने से उत्पन्न अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

सहायता कब प्राप्त करें

अपने किसी प्रियजन को खो देने के तुरंत बाद कुछ बच्चे चिड़चिड़े, आक्रामक, विद्रोही या उदास हो सकते हैं। ये व्यवहार अत्यंत कठिन समय में भावनाओं से निपटने का बच्चे का तरीका हो सकता है, और नहीं जानते कि कठोर अनुभव से कैसा बना जा सकता है। लेकिन पहले तीन हफ्तों या उसके बाद, यदि बच्चा अच्छा महसूस करने के कोई संकेत नहीं दिखाता है, या इन व्यवहारों को इस तरह से प्रदर्शित करता है जो उसके दैनिक कार्य को प्रभावित करता है, तो आपको सहायता लेने की जरूरत हो सकती है:

1. स्कूल छोड़ना

2. खाना ठीक से नहीं खाना, वजन का अत्यधिक कम होना

3. अलग-थलग रहना; जानबूझकर सामाजिक संपर्क से बचना

4. सोने में समस्या होना

5. बिस्तर गीला करना (ख़ासकर यदि वह पहले ही बिस्तर गीला करना बन्द कर चुके थे)

6. बहुत ज्यादा रोना, बहुत कम बात करना  

7. माता पिता से सटना

8. कुछ लोगों या गतिविधियों से बचना, जो उसकी याद दिला सकती है जिनकी मृत्यु हो गई है

सहायता प्राप्त करने के लिए, आप एक हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं या अपने पास के बाल मनोवैज्ञानिक से परामर्श कर सकते हैं।

यह लेख निमहैंस की नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक डा.निथ्या पूर्णिमा और सोनाली गुप्ता की मदद से लिखा गया है।