अपने फोन या कंप्यूटर से चिपके रहते हैं? यह बात आप जितना सोचते हैं उससे अधिक गंभीर हो सकती है

हम प्रौद्योगिकी के युग में रहते हैं, और हमारा ज्यादातर जीवन स्क्रीन के आसपास घूमते हुए बीत जाता है। कार्य, अध्ययन, अपने प्रियजनों के साथ संपर्क में रहना, खरीदारी या बिलों का भुगतान- सब कुछ माउस या फोन के एक क्लिक से किया जा सकता है। प्रौद्योगिकी पर हमारी निर्भरता ने हमारे जीवन को बहुत सरल बना दिया है, इसका मतलब यह भी है कि कब हमारा प्रौद्योगिकी का उपयोग हितकारी, उपयोगी तरीके (जहां हम तकनीक के उपयोग पर नियंत्रण रख सकते हैं) से, अस्वास्थ्यकर या लती की तरफ चला जाता है(जहां हम अपने उपयोग पर नियंत्रण खो देते हैं) इसका पता लगाने में हम अक्षम हो जाते हैं। सवाल यह है कि: आप कैसे जानते हैं कि आपने अपनी आदत को नियंत्रित करना कब बंद कर दिया है, और कब आपकी आदत ने आपको नियंत्रित करना शुरू कर दिया है?

उन्नीस वर्षीय रोहित अपने स्मार्टफोन का बहुत शौक़ीन था और जागते हुए ज्यादातर समय में अपनी नजर से हटने नहीं देता था। अन्य किशोर की तरह, वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल ईमेल भेजने, टेक्स्ट और दोस्तों के साथ चैट करने, इंटरनेट को चलाने, और गेम खेलने के लिए करता था। अधिकतर किशोरों के विपरीत, रोहित अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन से दिन में कम से कम छह घंटे चिपका रहता था। उसे प्रतिदिन कम से कम 400 पाठ संदेश आते होंगे और 200 भेजता होगा। स्क्रीन पर अधिक समय रहने के कारण उसकी उंगलियों में दर्द और आंखों में तनाव रहने लगा, और नए संदेश आदि के लिए बार-बार फोन देखने में वह ठीक से सो भी नहीं पाता था वह कक्षा में पढाई के दौरान सोता क्योंकि जब वह जाग रहा होता था, तो वह ज्यादातर उचाट रहता था क्योंकि उसका दिमाग पाठ संदेश पर होता था। उसके ग्रेड गिर गए। जब उसके माता-पिता को उसके व्यवहार में बदलाव के बारे में पता चला तो वे चिंतित हो गए। उन्हें जल्दी ही पता चला कि रोहित में ये परिवर्तन पाठ संदेश की लत की वजह से हुआ था।

(यह कहानी वास्तविक जीवन की कहानी से बनाई गई है। पहचान को संरक्षित करने के लिए नाम बदल दिए गए हैं।)

तकनीक की लत:एक गंभीर समस्या नहीं है?

प्रौद्योगिकी के सर्वव्यापी होने के कारण, हितकारी और अहितकारी उपयोग के बीच की रेखा बहुत पतली है, और यह कहना आसान नहीं है कि कब व्यक्ति इसको पार कर गया। व्यवहार हमेशा मात्रात्मक नहीं होता और हो सकता है इसका प्रभाव काफी लंबे समय बाद ही दिखाई दे। शायद इसीलिए हम तकनीक और इंटरनेट की लत को अन्य व्यसनों की तरह गंभीर नहीं मानते हैं।

हम प्रौद्योगिकी की लत के बुरे पक्ष के बारे में पढ़ते हैं - ऐसे लोग जिन्होंनें आपने आप को ऑनलाइन शॉपिंग के कर्ज में दफन कर दिया या ऐसे माता-पिता जो वीडियो गेम्स में ऐसे चिपक गए कि उनके बच्चे भूखों मर गए। हम कभी-कभी यह नहीं समझते कि यह ऐसी लत है जो बहुत हानिकारक नहीं दिखती है – पर घंटों कंप्यूटर या फ़ोन से चिपके रहने पर इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

हालांकि, ज्यादातर मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर, प्रौद्योगिकी की लत का, अन्य व्यसनों की तरह मानते हैं। मादक पदार्थों की लत के समान, प्रौद्योगिकी की लत अपने साथ व्यवहारिक लक्षण, विड्राल के लक्षण और बेकार बर्ताव ले कर आती है। और अन्य सभी व्यसनों की तरह, तकनीक की लत भी शुरू एक आदत के रूप में होती है, और जब अनियंत्रित हो जाती है, जीवन के अन्य पहलुओं- सामान्य स्वास्थ्य और भलाई, रिश्ते और दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है।

बेंगलुरु के, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेन्टल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (निमहंस) द्वारा संचालित शट (सर्विसेज़ फॉर हेल्दी यूज़ ऑफ़ टेक्नोलाजी) क्लीनिक में हर महीने औसतन 15 मामले देखे जाते हैं।

प्रौद्योगिकी की लत क्या है?

चिकित्सकीय तौर पर, लत को ऐसे पैटर्न के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें व्यक्ति एक ऐसे पदार्थ पर निर्भर होता है जो उन्हें आनन्द देता है। जब व्यक्ति किसी पदार्थ पर निर्भर हो जाता है, तो वह अपने जीवन के अन्य क्षेत्रों, परिवार, मित्रों और कार्य जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ होता है। यह व्यक्ति के लिए और साथ ही आसपास के लोगों के लिए समस्याएं पैदा करता है।

प्रौद्योगिकी की लत एक ऐसा विकार है जिसमें व्यक्ति कुछ विशेष तकनीकी माध्यम का आदी हो जाता है। भारत में, अधिकांश मामले नवयुवा के रिपोर्ट हुए, जिनकी उम्र 14 से 19 वर्ष के बीच की है, जो अपने मोबाइल फोन /कंप्यूटर पर टेक्स्टिंग, वीडियो या सोशल नेटवर्किंग के लिए अधिक निर्भर हैं।

हमारे दैनिक जीवन के सभी पहलुओं में प्रौद्योगिकी के बढ़ते आप्लिकेशन के साथ, प्रौद्योगिकी की लत चुनौतीपूर्ण और जटिल हो सकती है क्योंकि यह कहना मुश्किल है कि प्रौद्योगिकी का उपयोग कब हमारी गतिविधियों में सहायता के लिए उपयोग से अस्वास्थ्यकर हो सकता है।

निमहंस के नैदानिक ​​मनोविज्ञान विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ मनोज शर्मा कहते हैं कि "जब तक आपका तकनीक का उपयोग किसी उद्देश्य से जुड़ा होता है- चाहे वह शिक्षा, व्यवसाय या उपयोगिता के लिए हो- और उद्देश्य पूरा होने के बाद आप अन्य गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, आप सामान्य उपयोग की श्रेणी में आते हैं,"

शट (सर्विसेज़ फॉर हेल्दी यूज़ ऑफ़ टेक्नोलाजी) क्लिनिक चलाने वाले डॉ शर्मा ने कहा कि यह देखने के लिए कि आपका उपयोग कहीं अस्वास्थ्यकर तो नहीं है कुछ संकेत होते हैं, तकनीक का उपयोग करने के लिए कोई परिभाषित उद्देश्य नहीं है, आप इसे बिना किसी खास कारण के बार बार इस्तेमाल कर सकते हैं, और प्रवेश करने के बाद आप लॉग आउट नहीं कर सकते। आपको अन्य गतिविधियों में व्यस्त होने पर भी अपने फोन या ईमेल की जांच के लिए मजबूर होना महसूस कर सकते हैं। आपके आस-पास के लोग- आपके मित्र, परिवार, सहकर्मी- आपका उनके साथ पर्याप्त समय नहीं देने या जब आप बातचीत कर रहे हों तो वे फोन पर रहने के लिए चिंता जता सकते हैं।

ऊपर वर्णित, रोहित की कहानी, कई लोगों में से एक है जो पिछले वर्ष के दौरान शट क्लिनिक में आए। डॉ शर्मा कहते है कि ज्यादातर किशोर जो अपने माता-पिता द्वारा क्लिनिक में लाए जाते हैं, वे टेक्स्ट, वीडियो गेम, सोशल नेटवर्किंग, या ऑनलाइन पोर्नोग्राफ़ी पर निर्भर होने के कारण अपने स्कूल के काम, दिनचर्या और सामान्य स्वास्थ्य की उपेक्षा करते हैं।

शट क्लिनिक में सबसे कम उम्र का क्लाइंट 14 वर्षीय वीडियो गेम उपयोगकर्ता था जो छह साल की उम्र से ऑनलाइन वीडियो गेम खेल रहा था। वह स्कूल के बाद का अपना पूरा समय और अपना पूरा सप्ताहांत, वीडियो गेम खेलने में बिताता था। शुरुआत में, माता-पिता ने इसके गंभीर समस्या होने पर विचार नहीं किया। किशोर भोजन या पानी तक के लिए भी अपना कमरा नहीं छोड़ता था। वह माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों से बातचीत नहीं करता था। माता-पिता- जिनका विचार था कि यह केवल एक बढ़ती उम्र का तक़ाज़ा है- जब स्कूल ने उन्हें बताया कि वह विचलित था, कक्षा में सो रहा था, और उनके द्वारा दिए गए कार्य में पीछे था तब वे समझ गये कि मामला गंभीर था। वे सहायता के लिए शट क्लिनिक पहुंच गए। माता-पिता अपने बेटे से परेशान और नाराज थे। जबकि उनके बेटे को अपने विकार को संभालने के लिए मदद मिली थी, उन्हें सहारा भी दिया गया। कुछ परामर्श प्राप्त करने और विकार के बारे में जानकारी मिलने के बाद, वे स्थिति को और अधिक निष्पक्षता के साथ देखने में सक्षम हुए। वे यह समझ सकते थे कि उनका बेटा किस दौर से गुज़र रहा था। उन्होंने इंटरनेट के उसके प्रयोग की निगरानी की और सुनिश्चित किया कि वह अपनी पढाई के साथ बाहरी गतिविधियों पर ध्यान देंगे। कुछ महीनों के भीतर, उनका बेटा स्कूल के काम पर पकड़ बनाने में सक्षम था; बेकार व्यवहार काफी कम हो गया था।

क्या मुझे प्रौद्योगिकी की लत के लिए स्क्रीनिंग की आवश्यकता है?

एक व्यक्ति को अपनी प्रौद्योगिकी की लत के लिए स्क्रीनिंग की आवश्यकता हो सकती है यदि उनमें इन तीन लक्षणों में से कम से कम दो प्रदर्शित होते हैं:

लालसा: इंटरनेट/ तकनीक में मग्न रहना और जब आप कंप्यूटर या फोन से दूर हो जाते हैं तो बेचैनी महसूस करना

नियंत्रण खोना: इंटरनेट पर कितना समय लगाया जा सकता है यह तय करने में अक्षमता (यानी योजना से अधिक समय इंटरनेट पर व्यतीत करना)

विवशता: अपने जागने का ज़्यादातर समय ऑनलाइन रहना

इसके अलावा, उनमे निम्न में से कम से कम चार लक्षण भी प्रदर्शित होने चाहिए:

• अन्य गतिविधियों में रुचि घटना

• ऑनलाइन बिताए गए समय की मात्रा के बारे में झूठ बोलना

• ऑनलाइन होने के लिए आधी रात में जागना, ईमेल या संदेशों को देखना

• काम या विद्यालय में उपस्थिति और उत्पादकता में कमी आना

• परिवार और दोस्तों की उपेक्षा

• व्यक्तिगत स्वच्छता और अपनी देखभाल की उपेक्षा (नियमित अंतराल पर खाना या सोना भूल जाना)

प्रौद्योगिकी की लत का प्रभाव

प्रौद्योगिकी की लत एक शौक के रूप में शुरू होती है और यदि उपयोग अनियंत्रित हो, तो एक ऐसी लत में परिवर्तित होती है जिसमें व्यक्ति के जागने का ज़्यादातर समय ले लेती है। व्यक्ति निम्न में से एक या अधिक क्षेत्रों में शिथिलता दिखाता है:

  • सोने का तरीका: ऑनलाइन लगने वाले समय की वजह से व्यक्ति के सोने में देर हो सकती हैं; या हो सकता है उखड़ी नींद हो

उत्पादकता: व्यक्ति सोने के लिए कक्षाओं या काम को छोड़ता है; वे अध्ययन या काम के समय सो जाते हैं; उनके ग्रेड गिरते हैं

  • सामान्य स्वास्थ्य: व्यक्ति कलाई के दर्द, उंगलियों के दर्द, आंखों के तनाव, पीठ दर्द, थकान, भूख में कमी या निर्जलीकरण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में शिकायत करता है

  • संचार: व्यक्ति अपनी वास्तविक गतिविधियों को अपनी ऑनलाइन गतिविधियों के आसपास केंद्रित करने की कोशिश करता है। वे बाहर जाने से बचते हैं (या किसी भी जगह पर जहां उनके ऑनलाइन गतिविधियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया जा सकता है), अपने कमरे में रहना पसंद करते हैं, या सामाजिक संपर्क में रहने के बावजूद व्यक्तिगत बातचीत से बचते हैं, अपने फोन स्क्रीन पर चिपके रहना पसंद करते हैं।

शट क्लिनिक में, क्लाइंट दो व्यापक श्रेणियों में रखे जाते हैं:

  • पहले, किशोर जिन्हें पहले से ही मनोवैज्ञानिक समस्याएं हैं - जो बहुत शर्मीले हैं, चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ हैं, या व्यग्रता की समस्याएं हैं। वे अपना समय ऑनलाइन बिताते हैं क्योंकि अस्वीकृति की संभावना कम रहती है।

  • किशोर जो प्रयोगात्मक प्रकृति के हैं, और रोमांच या कुछ नया करने का प्रयास करते है इन किशोरों में से कई सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल वीडियो गेम खेलने या तुरंत संतुष्टि के लिए करते हैं।

डा. शर्मा कहते हैं कि "आमतौर पर, माता-पिता अपने बच्चों को अत्यधिक शिथिलता या संकट दिखाने के बाद लाते हैं तब तक, प्रौद्योगिकी के उपयोग को रोकने के लिए अन्य रणनीतियों का उपयोग करने की असफल कोशिश कर लेते हैं। माता-पिता स्वयं प्रौद्योगिकी के खिलाफ नहीं हैं - वे केवल इसलिए चिंतित हैं क्योंकि उनका बच्चा अपने स्वास्थ्य या अन्य गतिविधियों की उपेक्षा कर रहा है। जब वे संपर्क में आते हैं तो परेशान या कठोर लगते हैं, लेकिन जब हम उनसे बात करते हैं, तो हमें लगता हैं कि उनमें से ज्यादातर प्रौद्योगिकी उपयोग और अन्य ज़रूरतों के बीच संतुलन चाहते हैं।"

शट क्लिनिक पर आने वाले अधिकतर ग्राहक मध्य और ऊपरी-मध्य सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से युवा लड़के हैं। उनमें से ज्यादातर एक बच्चे वाले परिवारों के हैं, और उनमें यह लत प्रौढ़ पर्यवेक्षण और बाहरी गतिविधियों की कमी के साथ तकनीक की आसान पहुंच की वजह से होती है।
प्रौद्योगिकी की लत और मादक पदार्थों का सेवन

मादक पदार्थों के सेवन के मुकाबले देखें तो लग सकता है कि प्रौद्योगिकी की लत हानिकारक नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञ तेजी से बढ़ रहे प्रौद्योगिकी की लत के मामलों को शराब, तम्बाकू या नशीली दवाओं की लत के समान होना मानते हैं। जिस तरीके से आदत विकसित होती है वह इन सभी व्यसनों के समान हो सकती है: व्यक्ति मादक पदार्थ (या तकनीक) की इच्छा करता है, उपयोग बढ़ाता है, और यदि वे चाहते हैं तो भी उन्हें छोड़ने में असमर्थ होते हैं। उपयोग को रोकने पर वापसी के(विड्रोल) लक्षण होते हैं - जो मादक पदार्थों के सेवन पर शारीरिक और भावनात्मक हैं, और प्रौद्योगिकी की लत पर व्यवहार के होते हैं। ये सभी लतें मनोवैज्ञानिक संकट और स्वास्थ्य, सामाजिक काम, व्यवहार और उत्पादकता में शिथिलता का कारण होते हैं।
प्रौद्योगिकी की लतकोसंभालना

मादक पदार्थों के सेवन के उपचार के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण आधार पर प्रौद्योगिकी की लत का इलाज किया जाता है। उपचार उनकी प्रेरणा और उनके पर्यावरण पर एक जीवन शैली बनाने के लिए व्यक्तिगत काम में मदद करता है जो कि इंटरनेट या उनके सेलफोन पर केंद्रित नहीं है।

उपचार चक्र आमतौर पर तीन चरणों का पालन करता है:

पूछें: पहला कदम, जिसमें व्यक्ति को परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक के पास सहायता के लिए ले जाया जाता है

विशेषज्ञ समझने के लिए मूल्यांकन करता है:

• यह व्यक्ति तकनीक पर कितना निर्भर है?

• उपयोग के साथ जुड़ी परिस्थितियां क्या हैं?

• उपयोग के साथ जुड़े मनोवैज्ञानिक कारक क्या हैं?

• क्या कोई परिवार के मुद्दे हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं?


इसके बाद, डॉक्टर व्यक्ति के इस्तेमाल की मात्रा को देखता है। इसके बाद मनोवैज्ञानिक शिक्षा दी जाती है। यह प्रक्रिया व्यक्ति और उनके परिवार को इंटरनेट उपयोग के खतरों, उससे व्यवहार को होने वाले नुकसान और इसके कारण अन्य जो समस्याओं पर शिक्षित करने पर केंद्रित है। व्यक्ति और देखभाल करने वालों को शिथिलता को कम करने और समस्याओं के समाधान जैसे वजन घटाना, नींद या भूख की कमी के बारे में परामर्श दिया जाता है।

इस अवस्था के दौरान, व्यक्ति या उनके देखभाल करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे प्रौद्योगिकी की लत के बारे में जानकारी मांगें और समझें कि वे कैसे मदद कर सकते हैं।

प्रेरणा वृद्धि भी मनो-शिक्षा प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है। व्यक्ति को उस तकनीक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसके वे आदी हैं। अन्य लतों के मामले से विपरीत प्रौद्योगिकी का लती हो सकता हैं छोड़ने में सक्षम न हो; ज्यादातर मामलों में, किसी और के द्वारा उनके उपयोग को नियंत्रित करने का विचार असुविधाजनक या निराशाजनक हो सकता है। इसलिए व्यक्ति को एक अनुबंध करने के लिए कहा जाता है जिसके तहत वह हर दिन निश्चित अवधि तक मोबाइल या इंटरनेट का उपयोग करने पर सहमत होते हैं। ये अनुबंध छोटी अवधि (एक दिन और एक सप्ताह) के लिए किए गए हैं, और समीक्षा की जाती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि इस अनुबंध में व्यक्ति की भी राय हो।
समस्या को स्वीकार करना:

तकनीकी की लत से ग्रस्त अधिकतर लोग इससे इनकार करते हैं - उन्हें नहीं लगता कि उनका उपयोग हानिकारक है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर उन्हें पूरी तरह से छोड़ने का दबाव डालने के बजाए, हानि में कमी पर केंद्रित रहते हैं: आदत की वजह से होने वाली शिथिलता को कैसे कम किया जा सकता है इस पर जोर देते हैं। कुछ मामलों में, मरीज को इंटरनेट उपवास पर जाने के लिए कहा जाता है - हालांकि, यह केवल तभी प्रभावी हो सकता है जब व्यक्ति ऑफ़लाइन रहने और उसके उपयोग के तरीके बदलने के लिए प्रेरित हो जाता है। कोई व्यक्ति प्रभावी रूप से सिर्फ तब अपनी लत से निपट सकता है जब यह स्वीकार कर ले कि उनका उपयोग अस्वास्थ्यकर है, और

सके कारण समस्याओं का सामना कर रहा है।

अन्य गतिविधियां विकसित करना:

मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर स्व-देखभाल और संवारने के लिए साथ ही साथ बाहरी गतिविधियों, अध्ययन/ कार्य और सामाजिक गतिविधियों के लिए व्यक्ति को एक नई जीवन शैली और दिनचर्या बनाने में मार्गदर्शन देते है। इस स्तर पर सबसे आम समस्याएं जिनका सामना करने की आवश्यकता है: उनमें नींद की कमी, सामाजिकता की कमी और अपनी देखभाल की कमी (व्यक्ति ने लत की वजह से अपने सामान्य स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण की अनदेखी की है) शामिल हैं।

अधिकतर माता-पिता, जो मानते हैं कि उनका बच्चा प्रौद्योगिकी का लती हो सकता है, वे चिंताग्रस्त या बेहद व्यग्र हो सकते हैं। परामर्शदाता माता-पिता को भी स्थिति से निपटने में मदद करने के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम है।