मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा थेरेपिस्ट मेरे लिए सही है या नहीं?

रिया गांधी

अपने लिए किसी अच्छे थेरेपिस्ट को ढूंढना, ऐसे जूते ढूंढने की तरह है, जो आरामदायक और लंबे समय तक चलने वाले हों। जीवन में जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, हमारे दिल और दिमाग में भी कुछ ऐसी ठोकरें लगती हैं, जैसे हमारे पैर में लगती है - कुछ बड़ी, कुछ छोटी। कहा जाता है कि पैर में लगे घावों को भरने में अन्य अंगों के मुकाबले सबसे ज्यादा समय लगता है क्योंकि पैरों का हम हर समय उपयोग करते रहते हैं। यही सब हमारे दिमाग पर भी लागू होता है - क्योंकि हम लगातार इसका उपयोग करते हैं।  यहां तक कि जब हम सोते हैं तब भी यह पूरी तरह से आराम नहीं करता है। हमारे दिमाग को ठीक होने में वक्त लगता है - यही कारण है कि थेरेपी से रोग कभी भी एकदम से ठीक नहीं होता है और इसमें सुधार लाने में अक्सर कई सेशन्स लग जाते हैं। इसलिए यह अनिवार्य है कि एक ऐसे थेरेपिस्ट को ढूँढा जाए, जो इस प्रक्रिया में हमें पूर्ण समर्थन प्रदान करे।

एक अच्छा थेरेपिस्ट हमें अपनी मानसिक समस्याओं के बारे में बात करने के लिए बिना कोई भेदभाव के एक सुरक्षित जगह देता है। ऐसा थेरपिस्ट अंतर्दृष्टि रखने वाला, परिस्थितियों का जानकार और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने की योग्यता रखता है। कोई जूता जो आपके लिए फिट नहीं है, वह कभी-कभी आपके घावों को और खराब कर सकता है, यही कारण है कि आपकी जरूरतों को सही तरह से पूरा करने के लिए सही चिकित्सक को तलाशना महत्वपूर्ण है। किसी थेरेपिस्ट को चुनते वक्त क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिएं, इसके बारे यहां कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

सुविधाजनक नहीं,बल्कि एक अच्छा चिकित्सक चुनें

अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक इलाज में होने वाले खर्च और मिलने वाली सुविधाओं पर विचार करना जरूरी है। मानसिक समस्याओं से घिरे व्यक्ति के लिए रोजमर्रा के काम में भी मुश्किलें पैदा होती हैं इसलिए जरूरी है कि अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।

अपने आस-पास के ही थेरेपिस्ट को ढूंढना या किसी ऐसे थेरेपिस्ट को ढूंढना जो आपके समय के मुताबिक उपलब्ध हो जाए, यह ठीक तो है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इससे आपको आपको सबसे बेहतर थेरेपिस्ट मिल सकेगा। हो सकता है कि नौकरी या कॉलेज की व्यस्तताएं, बाधाओं के रूप में आपके सामने आ रही हों, लेकिन याद रखें, कि जब आपके पास खाली समय हो तभी आपको थेरेपी मिल जाए यह जरूरी नहीं। आपको अपने शेड्यूल में से स्वयं की देखभाल के लिए समय निकालना है। थेरेपी लेना, क्लाइंट के हिस्से का सक्रिय काम है और इसलिए गूगल के जरिए नाम ढूंढ लेना, क्योंकि यह ' बहुत आसान' तरीका है या फिर बिना किसी रिसर्च के, किसी के बताते ही तुरंत उस थेरेपिस्ट को चुन लेने जैसा काम जल्दी तो हो सकता है, लेकिन फायदेमंद नहीं। समय निकालें, चिकित्सक को ढूंढने की प्रक्रिया के लिए बेहतर प्रयास करें तो यह आपके लिए बहुत अधिक संतुष्टिपूर्ण होगा। भारत में, योग्य थेरेपिस्ट्स की कमी है इसलिए ऑनलाइन काउंसलिंग का जरिया भी आपको बेहतर गुणवत्ता के साथ अच्छा विकल्प तलाशने में आपकी सहायता कर सकता है।

खर्च की बात की जाए, तो एक सही थेरेपिस्ट से इलाज लेना एक ऐसा इनवेस्टमेंट है जो लंबे समय तक आपके मानसिक स्वास्थ्य एवं साइकोसोमैटिक शारीरिक स्वास्थ्य के लिए रिवॉर्डिंग और मूल्यवान साबित हो सकता है। थेरेपिस्ट की फीस, अनुभव और योग्यता के आधार पर होती हैं। हालांकि जरूरी नहीं कि सबसे महंगा थेरेपिस्ट ही बेहतरीन हो, लेकिन एक ऐसा सस्ता थेरेपिस्ट जो अच्छी तरह से प्रशिक्षित नहीं है, वह आपके मामले को और बिगाड़ सकता है।

सार्वभौमिक अच्छा चिकित्सक कोई नहीं होता,ऐसा चिकित्सक ढूंढें जो,आपके लिए अच्छा है

कोई भी जूता किन्हीं दो लोगों के लिए समान रूप से फिट नहीं बैठता है - हमारी साइज, वरीयताएं और खरोंचें सभी अलग-अलग होती हैं। हम अक्सर अपने मुताबिक फिट होने वाली जोड़ी खरीदने की कोशिश करते हैं। अपने लिए सही थेरेपिस्ट चुन लिए जाने से पहले अलग-अलग कुछ थेरेपिस्ट से मुलाकात करने से आपको वह चीज़ मिल सकती है, जिसे आप खोज रहे हैं। अधिकांश थेरेपिस्ट की वेबसाइट देखकर या उनके लेख पढ़कर आपको उनके दृष्टिकोण के बारे में चल जाएगा, इसलिए अपनी जरूरतों के मुताबिक सही थेरेपिस्ट खोजने के लिए इनका अन्वेषण और तुलना करने में कुछ समय लगाना आपके लिए बेहतर रहेगा।

अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर भरोसा करें

यह जानने का प्रयास करें कि जब आप थेरेपिस्ट से अपॉइंटमेंट लेने के बारे में या अपनी पहली मुलाकात के दौरान उनसे बात करते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है। क्या उनसे बात करना आसान है? आपने उससे पहले, उस दौरान या उन्हें ईमेल करने के बाद कैसा महसूस किया? क्या आपको न्यायसंगत महसूस हुआ? यह ध्यान रखने योग्य बात है कि  इलाज लेना शुरू करते ही अचानक सुधार नहीं आता। इसलिए कुछ सेशन्स के बाद ही कायापलट की उम्मीद करना बेमानी है। हालांकि, अगर आप कुछ सेशन्स गुजर जाने के बाद भी अपने थेरेपिस्ट से बात करने में सहज महसूस नहीं करते हैं या किन्हीं कारणों से खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं-  तो शायद यह थेरेपिस्ट आपके लिए सही साबित नहीं हो सकता। इस बारे में आपका उस थेरेपिस्ट से यह चर्चा करना कि ऐसा क्यो हो रहा है, आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। ऐसी परेशानियों पर ईमानदारी से ध्यान देना मरीज और थेरेपिस्ट के बीच एक स्वस्थ संबंध का आधार है इसके साथ ही आपकी चिंताओं के प्रति थेरेपिस्ट से मिलने वाली प्रतिक्रिया से आपको पता चल सकेगा कि काउंसलिंग के दौरान उनके काम करने का तरीका क्या है?

उनकी सैद्धांतिक नीति को समझें

किसी क्लाइंट की मनोवैज्ञानिक संवेदनशीलता को समझने के लिए थेरेपिस्ट एक सैद्धांतिक नीति के आधार पर हस्तक्षेप करता है। काउंसलिंग और साइकोथेरेपी में विचारधारा के दो बहुत व्यापक वर्ग शामिल हैं। - समाधान केंद्रित और अंतर्दृष्टि उन्मुख। इसे सरल रूप में समझने के लिए, यदि मामला धूम्रपान छोड़ने से संबंधित है, तो एक थेरेपिस्ट इस पर कई तरीकों से काम कर सकता है। एक समाधान केंद्रित थेरेपिस्ट, या कहें तो एक सीबीटी प्रैक्टिशनर, मरीज के सोचने के पैटर्न को पहचानने और बदलने, किन परिस्थितियों में उसे तलब लगती है जैसे मुद्दों की पहचान कर उस पर काम कर सकता है।

एक अंतर्दृष्टि उन्मुख थेरेपिस्ट, समस्या की उस जड़ तक जाना चाहता है जो क्लाइंट को धूम्रपान के लिए प्रेरित करती है। इसमें अचेतन अवस्था, दबाई गई कोई उत्तेजना या इच्छाओं की खोज, जो क्लाइंट को धूम्रपान के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए किसी की भावनाओं का विस्तार से आंतरिक परीक्षण करना होता है। इंट्रासाइकिक डायनेमिक्स और जीवन की अन्य घटनाओं जैसे, रिश्तों की स्थिति, ऐसी इच्छाएं जो दबा दी गई हों या उनकी उपेक्षा की गई हो उन पर ध्यान दिया जाता है। थेरेपी का यह रूप हमारी आंतरिक दुनिया में एक आवर्धक लेंस की तरह है, जो अव्यवस्थाओं के बीच पैटर्न खोजने और व्यक्ति को विनाशकारी व्यवहार से मुक्त करता है।

योग्यता,योग्यता और सिर्फ योग्यता

दुर्भाग्यवश, भारत में किसी नियामक बॉडी की कमी के कारण, कई लोग ऐसे हैं जो औपचारिक शिक्षा के बिना भी खुद को 'काउंसलर' बताते हैं। किसी काउंसलर के पास जाने से पहले, एक बार उसकी योग्यता को देखना आवश्यक है। इसके लिए न्यूनतम आवश्यकता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से स्नातकोत्तर की डिग्री है। आम तौर पर, ज्यादा रेपुटेशन रखने वाली यूनिवर्सिटी से विश्वसनीय थेरेपिस्ट निकलते हैं। अगर आपको इसकी प्रामाणिकता के बारे में संदेह हैं तो स्नातकोत्तर कार्यक्रम की सूची की जानकारी हासिल करना एक अच्छा विचार है। ऑनलाइन डिग्रीधारी काउंसलर्स से सावधान रहें क्योंकि वे देखभालपूर्ण क्लीनिकल ​कार्य की पेशकश नहीं कर सकते हैं। इसके बिना अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक ऐसा व्यक्ति नैतिक रूप से क्लाइंट्स को नहीं देख सकता है। भारत में कई निजी संस्थान काउंसलिंग में 'प्रमाण पत्र' या 'डिप्लोमा' देते हैं। ध्यान रखें, कि ये डिग्री का मुकाबला नहीं करते हैं और ऐसे संस्थान अपने स्टूडेन्ट्स को क्लाइंट्स पर काम करने की अर्हता भी प्राप्त नहीं करते हैं। यहां तक कि मनोचिकित्सक भी औपचारिक प्रशिक्षण लिए बिना साइकोथेरेपिस्ट या काउंसलर बनने के लिए आवश्यक रूप से योग्य नहीं हैं।

नैतिकता

थेरिपिस्ट के काम में नैतिकता का होना सर्वोपरि हैं। इसमें गोपनीयता बनाए रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और इसे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में ही तोड़ा जाना चाहिए (उदाहरण के लिए। यदि व्यक्ति में आत्मघाती कदम उठाने की प्रबल संभावना है या उसके द्वारा किसी और को नुकसान पहुंचाने का खतरा है, या उसके मामले में अदालती दखल अनिवार्य हो) एक अच्छा थेरेपिस्ट अपने मरीज के साथ सेशन के दौरान हुई अंतरंग बातों को उसके परिवार, दोस्तों या अपने खुद के गैर पेशेवर परिचितों के सामने तब तक प्रकट नहीं करता है, जब तक कि उसे स्थिति गंभीर न लगे। अच्छे चिकित्सक गैर-न्यायिक रूप से क्लाइंट की आजादी को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें खुद को सशक्त बनाने में मदद करते हैं। एपीए [अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन] या बीएसीपी [ब्रिटिश एसोसिएशन फॉर काउंसिलिंग एंड साइकोथेरेपी] जैसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संगठन, नैतिकता संहिता के जरिए आपके अधिकारों एवं एथिकल थेरेपिस्ट से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं इसका विशेष ध्यान रखते हैं।

थेरेपी का मतलब मित्रता नहीं है

अच्छी थेरेपी दोस्ती की तरह नहीं होती है - यह किसी की परेशानी में कंधा देना या सिर्फ उसकी बातें सुनते रहना भी नहीं है। इसमें सलाह लेना और राय देना शामिल नहीं है और यह भी जरूरी नहीं कि इससे आपको हमेशा बेहतर महसूस हो, क्योंकि यह आपको सच का आईना दिखाती है - एक ऐसा आईना जो आपके दोस्त अपने पूर्वाग्रहों के कारण आपको नहीं दिखा सकते हैं। दोस्तों के विपरीत एक थेरेपिस्ट, साइकोलॉजिकल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और विचारों व भावनाओं के पैटर्न को पहचानते हुए सहानुभूतिपूर्वक सुनकर अपने माध्यम से काम करने में आपकी मदद करते हैं। वह आपके लिए एक ऐसा स्थान मुहैया कराते हैं, जहां आप अपनी संवेदनशील बातों और मनोवैज्ञानिक संघर्ष के बारे में खुलकर बता सकते हैं। अच्छी थेरेपी तब ही मिल पाती है, जब क्लाइंट खुद इस ओर काम करता है। थेरेपिस्ट आपको एक बैसाखी प्रदान करता है लेकिन चलना क्लाइंट को ही पड़ता है।

रिया गांधी एक मनोचिकित्सक और शोधकर्ता हैं,जो स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त हैं। वह मुंबई में निजी प्रैक्टिस चलाती हैं और साइकोडायनेमिक एवं व्यक्ति केंद्रित सैद्धांतिक उन्मुखताओं पर काम करती है।