हमें क्यों किशोरों के मानसिक भलाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए

किशोरवय या कुमार अवस्था में उतार चढ़ाव के चरण होते हैं। इस अवधि में तेजी से वृद्धि, परिवर्तन और भ्रम की स्थिति रहती है जिसके कारण बचपन पर एक सुरक्षित पकड़ रखनेवाला व्यक्ति वयस्कता पर अच्छी पकड़ चाहता है।

सी चरण के दौरान किशोर में स्वयं की भावना पैदा होती है, नयी भावनाओं पर आधारित शरीर की नयी छवि, और माता पिता, साथियों और महत्वपूर्ण दूसरों के साथ उनकी बदलती भूमिका का निर्माण होता है।

इन बड़े बदलावों के साथ, शिक्षा के तनाव और सामाजिक दबाव सब मिलकर ये वर्ष किशोरों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यह माता-पिता के लिए भी एक महत्वपूर्ण समय है कि उन्हें नज़र रखनी है और किशोर की मानसिक भलाई भी सुनिश्चित करनी है।

इसके अलावा, व्यक्तित्व का बड़ा हिस्सा इस चरण के दौरान बनता है। किशोरवय में मस्तिष्क संकायों के विकास की प्रक्रिया चल रही होती है, जिसकी वजह से यह कोई असामान्य बात नहीं है कि उन्हें निर्णय लेने में, समय प्रबंधन में, लक्ष्य निर्धारित करने में और समस्या को सुलझाने में कठिनाइयां होती हैं।

बैंगलोर में बच्चों और किशोरों के साथ मनोचिकित्सा की प्रैक्टिस करने वाली क्लीनिकल ​​मनोवैज्ञानिक डॉ प्रिया कायस्थ आनंद कहती हैं कि "किशोरों में आमतौर पर कुछ मुद्दे देखे जाते हैं उनमें नशीले पदार्थ से संबंधित मुद्दे, लैंगिकता से सम्बंधित चिंताएं, नींद संबंधी चिंताएं, अस्वास्थ्यकर खाने की आदतें और प्रौद्योगिकी की लत है, हालांकि अगर ये चिंताएं समस्या का रूप ले लें तो यह उनकी सामाजिक और व्यावसायिक (स्कूल या कॉलेज की) कार्य प्रणाली को प्रभावित करता है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने की ज़रूरत है।

डॉ कायस्थ यह भी कहती हैं कि किशोरों की मानसिक भलाई के लिए दो महत्वपूर्ण आवश्यकताएं आत्म प्रेरणा और आत्म अनुशासन हैं, जबकि किशोरों को इस दिशा में ले जाने के लिए आंतरिक संतुष्टि और संतोष पूर्वापेक्षित है।

किशोर की जरूरतें:

  • एक बड़े हो रहे व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठा और सम्मान चाहते हैं

  • वे जो सोचते और महसूस करते हैं उसे स्वीकार किया जा रहा है

  • सामंजस्य के साथ समझे जाने का अहसास

  • मार्गदर्शन

  • मान्यकरण

किशोरों के इस महत्वपूर्ण चरण से निपटने में माता पिता कैसे मदद कर सकते हैं?

  • माता-पिता का व्यक्तित्व भी किशोरों को प्रभावित कर सकता हैं। इसलिए उनके सामने प्रस्तुत आदर्श की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसमें मुखर होकर और उचित रूप से संवाद करने के लिए भावनाओं को पहचानने और नियंत्रित करने की क्षमता शामिल है।

  • किशोरों के साथ बातचीत के दौरान खुला, संवादपूर्ण, मिलनसार, और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण वाला व्यवहार रखें।

  • नियंत्रण की भावना लाएं

  • उनके बारे में निर्णय लेने से पहले किशोर की सहमति लेना

  • ख़ाली समय में गतिविधियों के माध्यम से परिवार के लिए समय निकालना।

  • किशोर को अपनी समस्याएं हल करने के लिए प्रोत्साहित और मार्गदर्शन करके खुद के लिए सोचने के लिए प्रेरित करना।

  • तुलना से बचना

किशोर ऐसे सामना कर सकते हैं:

• अपनी आत्म-प्रेरणा और आत्म-अनुशासन पर कार्य करके

• किसी वयस्क को बता कर जिस पर वह विश्वास कर सकता हो

• उनकी नींद स्वच्छता का ख्याल रख कर

• जिस प्रकार का भोजन खा रहे हैं उस पर नियंत्रण रखते हुए

• एक उचित दिनचर्या का पालन करके

• आप पांच साल के बाद खुद को कैसा देखना चाहेंगे पूछकर जीवन के लक्ष्यों को निर्धारित करना

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हर किशोर अलग है और एक अलग तरीके से और गति से विकसित होता है। माता-पिता, शिक्षकों और किशोरों के लिए यह तेजी से जरूरत बनती जा रही है कि परिणाम के बजाय जीवन के महत्वपूर्ण चरणों की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें।