मानसिक बीमारी के लिए विशिष्ट योगासन

अलग अलग योगासन मानसिक बीमारी के लक्षणों को कम करने और स्वास्थ्य बढ़ाने का एक अनूठा तरीका है

डॉ शिवराम वरंबल्लि

मानसिक विकारों में योग का हस्तक्षेप नई अवधारणा नहीं है क्योंकि बहुत पहले से डॉक्टरों ने तनाव-संबंधी विकारों के लिए योग आधारित कार्यक्रमों की सिफ़ारिश की है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक अनुसंधान तरीकों द्वारा योग-आधारित व्यवधान के अध्ययन में पिछले दो दशकों में नव-जागरण हुआ है.

योग अभ्यास से व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक कामकाज में सुधार देखा गया है. मनोरोग में, योग-आधारित कार्यक्रमों को अवसाद, चिंता और अनिद्रा के उपचार में सफलतापूर्वक एकमात्र उपचार या एक सहायक उपचार, दोनों रूप में इस्तेमाल किया गया है। मानसिक विकार, बच्चों में ध्यान डेफिसिट सक्रियता विकार (एडीएचडी), और बुज़ुर्गों में संज्ञानात्मक कमी जैसे मनोरोगों के उपचार में भी योग एक पूरक उपचार के रूप में फ़ायदेमंद रहा है.

योग के नियमित अभ्यास से कोर्टिसोल नामक 'तनाव हार्मोन' कम होते हैं, ऑक्सीटोसिन हार्मोन में वृद्धि होती है, मस्तिष्क व्युत्पन्न न्यूट्रोट्रोफ़िक कारक (BDNF) जैसे मस्तिष्क नमनीयता के मार्कर में वृद्धि. योग मस्तिष्क की कोशिकाओं का अध:पतन को रोकता है, मस्तिष्क में स्मृति (हिप्पोकैंपस) से संबंधित क्षेत्रों में बढ़ोत्तरी करता है विशेषतर बुज़ुर्गों में. ‘ओम’ मंत्र का जाप भावनाओं को नियंत्रण में रख कर मन की अशांति को शांत करने की क्षमता रखता है.

योग आसन और शारीरिक स्थितियों पर उनके संभावित प्रभाव:

योगासन

स्वास्थ्य लाभ

 

 

विपरीतकरिणि मुद्रा

सूर्यबेधना प्राणायाम

पश्चिमोत्तासन

मत्स्येंद्रासन

 

उम्र का बढ़ना और संज्ञानात्मक पतन / रोकते हैं / धीमा कर देते हैं

 

मत्स्येंद्रासन

मत्स्यासन

भुजंगासन

कपालभाती प्राणायाम

 

 

सभी प्रकार के रोगों से लड़ने में मदद करते हैं

 

पश्चिमोत्तासन

 

स्वास्थ्य में सुधार लाता है.

 

मत्स्येंद्रासन

पश्चिमोत्तासन

विपरीतकरिणी मुद्रा

भुजंगासन

सूर्यबेधना प्राणायाम

भस्त्रिका

 

 

 

 

 

उपापचय [मेटाबॉलिसम] में सुधार लाता है

 

नाड़ीशुद्धि प्राणायाम

नाड़ी की शुद्धि करती है

 

शवासन

तनाव और थकान कम कर मन को शांति लाता है

ताड़ासन (वृक्ष मुद्रा)

स्मृति, सोच और एकाग्रता में सुधार

 

अधोमुख शवासन (डॉग मुद्रा)

उदास मन में स्फूर्ति लाना, थकान कम करना

 

वीरभद्रासन (योद्धा मुद्रा)

उदास मन के लिए

 

वज्रासन (वज्र मुद्रा)

उदास मन, स्मृति, सोच और एकाग्रता, भूख न लगना, वजन घटाने / बढ़ाने कब्ज, हाइपरसोमिया (अत्यधिक नींद) के लिए

 

सिंहासन (सिंह-मुद्रा)

उदास मन, कम स्मृति, सोच और एकाग्रता के लिए

अर्ध-मत्स्येंद्रासन

 

भूख न लगना, वजन घटाने / बढ़ाने और कब्ज के लिए

 

योग-मुद्रा

 

 

 

उदास मन लिए, यौन इच्छा / कामकाज में उदासीनता

मार्जालासन (कैट-मुद्रा)

थकान / ताकत की कमी, मनोप्रेरणा में कमी / खलबली

धनुरासन

भूख न लगना, वजन घटाने / बढ़ाने और कब्ज के लिए

नाड़ीशुद्धि

उदास मन, कम स्मृति, सोच और एकाग्रता, अवसादग्रस्तता विचार के लिए

 

 

भ्रमरी (भौरों जैसे सांस लेना)

 

मनोप्रेरणा के लिए, जल्दी थकान होना

 

 

ऊपर सूचित किए गए योगासन मानसिक विकारों के इलाज के लाभों पर प्रकाश डालते हैं. हालांकि, क्लिनिकी प्रथा में योगाभ्यास को अपने अनुकूल ढालने के लिए काफ़ी चुनौतियाँ हैं. एक चुनौती ये है कि योग के विभिन्न स्कूलों द्वारा पढ़ाए जाने वाली विभिन्न योग प्रथाएँ. इसके अलावा, आधुनिक चिकित्सा डायग्नोस्टिक ​सिस्टम द्वारा परिभाषित विशिष्ट विकारों के लिए, पारंपरिक योग साहित्य में योग प्रथाओं के लाभ का सह-संबंध जानने में कठिनाई होती है।

कट्टर योग चिकित्सकों और विशेषज्ञों के अनुसार योग एक समग्र और आध्यात्मिक जीवन शैली है और विशिष्ट मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशिष्ट योग मॉड्यूल बनाने के पक्ष में नहीं हैं. फिर भी चिकित्सकों और योग विशेषज्ञों ने साथ मिलकर अनुसंधान कर अधिकतम लोगों तक योग के लाभ को पहुँचाने की जिम्मेदारी ली है.

द निमहांस इंटीग्रेटेड सेंटर फ़ॉर योगा ने इस दिशा में कई प्रयास किए हैं जिसमें मनोचिकित्सकों और न्यूरोसाइनटिस्टों ने स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (SVYASA) और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली, के साथ मिलकर काम किया है. इस तरह के अवसाद, बुजुर्गों में संज्ञानात्मक की कमी, और मानसिक विकार के लिए कुछ विशेष योग मॉड्यूल का विकास करने के लिए प्रेरित किया है. ये कार्यक्रम इन न्यूरोसाइकियाट्रिक विकारों से पीड़ित रोगियों के लाभ के लिए चिकित्सा की विभिन्न धाराओं का एकीकरण करेगा जो सिर्फ़ शुरुआत है.

डॉ शिवराम वरंबल्ली निमहांस एकीकृत सेंटर फ़ॉर योगा में सलाहकार, और निमहांस, बेंगलूर में मनोरोग विज्ञान के अतिरिक्त प्रोफेसर हैं.

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