शोषण के शिकार बच्चों की देखभाल – क्या करें और क्या न करें

अगर आप किसी ऐसे बच्चे के अभिभावक या देखभाल करनेवाले हैं जिसका शारीरिक शोषण हुआ है, तो आपका इस घटना को लेकर स्तब्ध और सुन्न महसूस करना स्वाभाविक है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आप शांत रहें और स्वयं को याद दिलाते रहें कि आपके सहारे और आश्वासन के प्रभाव से बच्चा इस दर्दनाक हादसे से जल्दी उबर पायेगा। निमहान्स की बाल मनोचिकित्सक डॉ प्रीति जैकब से हमें यह सूची प्राप्त हुई हैं, जिनकी मदद से आप उस बच्चे के सहायक बन सकते हैं जिसके साथ दुराचार हुआ है।

क्या करें:

  • बच्चे की बातों पर यकीन करें और दोबारा सुरक्षित महसूस करने में उसकी मदद करें।
  • बच्चे को उसकी भावनाओं को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चे के लिए यह समझना आवश्यक है कि भावनाएं सही या गलत नहीं होतीं हैं, और अपनी भावनाओं को विश्वसनीय व्यक्तियों के साथ साझा करना मददगार होता है। समझें कि दुर्व्यवहारियों के प्रति बच्चों में विरोधाभासी और अस्पष्ट भावनाएं हो सकती हैं, खासकर परिवार के सदस्य द्वारा किये गये शोषण के मामलों में। शुरू से ही यह महत्वपूर्ण है कि बच्चों को उनकी भावनाओं को पहचानने और व्यक्त करने का उचित तरीका सिखाया जाए।   
  • अपने लिए सहायक ढूंढें। एक ऐसा भयानक अनुभव आत्मसात करना आसान नहीं है। इसमें कई वास्तविक समस्याएं हो सकती हैं जिन्हें हल करना भी आवश्यक है। अभिभूत होना स्वाभाविक है और अपने लिए एक सक्षम सहायक दल ढूंढना, और यदि आवश्यक हो तो पेशेवर सहायता प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है।

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क्या न करें:

  • शोषण और इसके प्रभाव को विनाशकारी न बनाएँ। उदाहरण के लिए, माताओं को लग सकता है कि यह अनुभव बच्चे को शादी करने से रोक सकता है। चूंकि बच्चों में अपमानजनक अनुभवों की धारणाओं का आधार अभिभावकों की अपनी धारणाएं होती हैं, इसलिए माता-पिता अपने नकारात्मक विचारों की पहचान करें। यह जरूरी है ताकि माता-पिता बच्चे की मदद “अभी” कर सकें और बच्चे के उबरने के लिए प्रभावी तरीके तैयार कर सकें।
  • इस मुद्दे पर बात करने से कतराएं नहीं, खासकर अगर बच्चा इस विषय पर बात करना या अपनी भावनाएं साझा करना चाह रहा हो। अधिकांश बच्चे शोषण के किसी एक पहलू या इसके परिणाम को लेकर बात करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चा स्कूल वापस जाने और अपने सहपाठियों का सामना करने को लेकर चिंतित हो सकता है। माता-पिता बच्चे को अपनी चिंताएं और आशंका व्यक्त करने का मौका देकर इस पहलू पर चर्चा कर सकते हैं, और इस तरीके से चर्चा कर सकते हैं कि वे एकजुट होकर कैसे समस्या से निपट सकते हैं। अपनी क्षति और दुःख से निपटने के दौरान, माता-पिता शायद क्रोधित महसूस करें या अपने अनुभवों के बारे में बात न करना चाहें; उन्हें लग सकता है कि इसके बारे में बात करने का मतलब बच्चें को उस भयावह अनुभव (अनुभवों) की याद दिलाना है; या उन्हें समझ नहीं आ रहा हो कि क्या कहें और बच्चे को कैसी प्रतिक्रिया दें और इन सबसे बचने के लिए वे इस विषय से बचना चाह रहें हों। ऐसी प्रतिक्रियाओं को देखकर बच्चा स्वयं इस विषय पर बात करने से कतरा सकता है क्योंकि उसके मन में यह डर बैठ जाता है कि ऐसा करने से उसके माता-पिता परेशान होंगे या गुस्सा करेंगे। यदि माता-पिता बच्चे की मदद करने में असमर्थ हैं, तो किसी पेशेवर की मदद लेना महत्वपूर्ण है।
  • शोषण के बारे में आपको और पहले न बताने को लेकर बच्चे पर क्रोधित न हों। अकसर बच्चे कई कारणों से ऐसी घटनाएं छुपाते हैं, जिसमें शामिल है उनको घटना के लिए जिम्मेदार ठहराये जाने का डर, या पारिवारिक या परिचित दुराचारी को उनसे दूर भेज दिये जाने का भय। कुछ बच्चों को इस तरह से "तैयार" किया जाता है ताकि उनके लिए सीमा उल्लंघनों को स्पष्ट रूप से समझ पाना मुश्किल हो जाता है। दूसरे बच्चों को चोट या नुकसान पहुँचाएं जाने का डर दिखाकर, या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ ऐसा करने की धमकी देकर घटना को गुप्त रखने के लिए मजबूर किया जाता है। शोषण की घटना चाहे कितनी भी समय पहले क्यों न घटी हो माता-पिता को बच्चे की बात पर अविश्वास नहीं करना चाहिए, या इस तरह के संवेदनशील और परेशान करने वाली जानकारी का खुलासा पहले न करने के लिए बच्चे से नाराज़ या उसपर गुस्सा नहीं होना चाहिए।
  • सामान्य उम्मीदों या सीमाओं को न बदलें। कई बार, ऐसे अनुभव के बाद, अपने मन में अपराध की भावना के चलते माता-पिता बच्चे के अनुशासन में ढील दे देते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चे को अत्यधिक टेलीविजन देखने की, या अधिक खरीदारी करने/ खाने की अनुमति दी जाती है। यह बच्चा या माता-पिता, किसी की भी मदद नहीं करता है, और इससे अन्य व्यवहारिक समस्याओं की शुरुआत हो सकती है।

संदर्भ:

इस आलेख का आधार Treating Sexually Abused Children and Their Nonoffending Parents: A Cognitive Behavioural Approach by Esther Deblinger and Anne Hope Heflin from the Interpersonal Violence: The Practice Series (Jon R Conte, Series Editor), Sage Publications, California, USA, 1996. (ISBN 0-8039-5929-X pbk).  

यह मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और माता-पिता दोनों के लिए एक उत्तम पुस्तक है यौन शोषण से पीड़ित बच्चों और उनको परिवारों की मदद हेतु।

डॉ प्रीति जैकब निमहान्स में बाल एवं किशोर मनोचिकित्सा की सहायक प्रोफेसर हैं।