परीक्षा की चिंता - बात करें

परीक्षा के कई दिन पहले से हम में से कई लोग चिंतित रहने लगते हैं. हम में से कुछ कभी न खत्म होने वाली सिलेबस की चिंता करते हैं, कुछ लोग तनाव का सामना करते हैं जो माता-पिता, साथियों या खुद से भी होता है कि बेहतरीन प्रदर्शन देना है. कुछ छात्र तो परीक्षा देने के विचार से ही घबरा जाते हैं. परीक्षा चिंता अच्छे से अच्छे छात्र को भी चिंता से ग्रस्त करती है और हमें ये भी पता होता है कि हम इस चिंता में अकेले नहीं हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब भी छात्र चिंता महसूस करें उन्हें किसी विश्वासपात्र से बात कर लेनी चाहिए जैसे- माता-पिता, दोस्त, शिक्षक या काउंसेलर.

जब आप चिंतित हैं तो क्यों किसी से बात करनी चाहिए?

समझने में मदद करता है कि आप मुसीबत में हैं- परीक्षा के पहले हम इतने चिंतित रहते हैं कि उसे अनदेखा करने के लिए किताबों में अपने आपको दफ़न कर लेते हैं. अगर किसी से बात करेंगे तो हम ये समझेंगे कि हमें समस्या है और हमें तुरंत मदद की ज़रूरत है.

अपने विचारों को क्रमबद्ध करें: परीक्षा के एक दिन पहले आप अपने आपको बहुत उल्झन में और उत्सुक पाएँगे और आप समझ नहीं पाएँगे कि आपको ऐसा क्यों महसूस हो रहा है. अपनी भावनाओं को मौखिक रूप में अभिव्यक्त करेंगे तो आपको अपने विचारों को सुलझाने में मदद मिलेगी और कोई भी स्तिथि मन में स्पष्ट हो जाएगी.

आपका मन हल्का करता है: किसी से बात करने पर तनाव काफ़ी कम होता है और मन का बोझ हल्का होता है. टॉक थेरेपी तनाव कम करने का सबसे अच्छा तरीका है. अगर आप सहकर्मी से बात करते हैं तो आपको ये जानकर राहत मिलेगी कि उनके अनुभव भी आपके जैसे ही हैं.

आपको एक नया परिप्रेक्ष्य देता है: स्थितियाँ अक्सर वास्तव की तुलना में अधिक बोझदार लगती हैं. हमारी उदासीनता और चिंता हमारी योग्यता को परिभाषित करते हैं और हम अपने बल और क्षमताओं को नहीं देख पाते हैं. माता-पिता, शिक्षक, काउंसेलर या शैक्षणिक वरिष्ठ नए परिप्रेक्ष्य में आपकी क्षमताओं को याद दिलाने में मदद कर सकते हैं. एक तटस्थ श्रोता निष्पक्ष होकर आपकी सकारात्मक एवं नकारात्मक सक्षमता को बताएगा. उदाहरण के लिए, वे परीक्षा के अपने अनुभव और कैसे इन चिंताओं को पार लगाया, इस बारे में आपसे बात करेंगे.

आपको उपयोगी टिप्स मिल सकता है: चाहे आप एक सहकर्मी, वरिष्ठ, शिक्षक या माता-पिता से बात करें, सबसे आपको उपयोगी सुझाव ही मिलेंगे कि किस प्रकार आप समय का प्रबंधन कर समय का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. कोई भी भरोसेमंद सहकर्मी आपके साथ प्रबंधन युक्तियाँ साझा करेगा या कॉलेज का वरिष्ठ आपको अध्याय के कुछ महत्त्वपूर्ण भाग चुन कर पढ़ने की सलाह देगा.

मुझे किस से बात करनी चाहिए?

आप किस व्यक्ति से बात कर सकते हैं, ये निश्चय लेना एक महत्वपूर्ण कदम है. आप ऐसे व्यक्ति से ही बात करना चाहेंगे जिस पर आपको भरोसा है और जिनके राय का सम्मान करते हैं. आप एक सहकर्मी, माता पिता, वरिष्ठ, शिक्षक या परामर्शदाता से भी बात कर सकते हैं. अगर आप एक सहकर्मी से बात करने के लिए चुनते हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह बहुत उत्सुक न हो. जब दोनों एक प्रकार के अनुभव से गुज़र रहे हों तो बात करने में अच्छा महसूस होता है पर दोनों ही उत्सुक स्वभाव के हों तो स्तिथि और बदतर हो सकती है. कभी-कभी उस व्यक्ति में परिस्तिथियाँ सँभालने की क्षमता भीं नहीं होती. अगर चुने हुए व्यक्ति से आपको सांत्वना नहीं मिलती है तो आप तुरंत किसी और से बात करने की कोशिश करें या एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें.

मैं किसी से बात करने के बजाय किसी पत्रिका में लिख सकता हूँ?

निश्चित रूप से. एक पत्रिका में लिखने से किसी से बात करने जितने ही कई लाभ हैं. लेखन, बातचीत की तरह ही कई विचारों को सुलझाने में मदद करते हैं, आपकी समस्याओं को समझकर निष्पक्ष होकर समाधान देते हैं जिससे आप अपनी चिंताओं के बोझ से काफ़ी हद तक मुक्त हो जाएँगे और हल्का महसूस करेंगे.

कॉलेज के काउंसलर की मदद कब लेनी चाहिए?

आप अपने किसी भी तनाव या चिंता के बारे में बात करने के लिए अपने कॉलेज के काउंसलर से समयादेश ले सकते हैं. लेकिन अगर ये चिंताएँ आपकी दैनिक गतिविधियों में अड़चन बन रही हैं तो आप बेझिझक काउंसेलर के कार्यालय में जाकर उनसे मिल सकते हैं. अगर आपके कॉलेज में ये सहूलियत नहीं है तो आप हेल्पलाइन फ़ोन करके बात कर सकते हैं.

यह लेख डॉ मंजुला,एसोसिएट प्रोफेसर,निमहांस में नैदानिक मनोविज्ञान विभाग,से जानकारी के आधार पर लिखा गया है.