कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य: क्या अपने तनाव के बारे में मैनेजर से बात करना मेरे लिए ठीक है?

समय सीमा में काम निपटाने का दबाव, कार्यस्थल पर पहुंचने का तनाव, काम की अधिकता एवं कार्यालय का वातावरण, ये कुछ ऐसे तनाव बढ़ाने वाले कारक हैं, जिनका सामना कई कर्मचारियों को रोजमर्रा की जिंदगी में करना पड़ता है। ये कारक किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

बहुत से लोग अपनी मनःस्थिति के बारे में कार्यस्थल पर अपने सहकर्मियों से बात नहीं करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि उनके साथ भेदभाव किया जाएगा, मजाक बनाया जाएगा या उन्हें एक कमजोर व्यक्ति के रूप में देखा जाएगा। उन्हें इस बात की भी चिंता रहती है कि उनकी यह जानकारी अन्य दूसरों को बता दी जाएगी। दूसरी ओर, अपनी भावनात्मक समस्या  पर ध्यान नहीं देने का असर आपकी पेशेवर जिंदगी पर पड़ सकता है और इसके फलस्वरूप आपकी कार्य उत्पादकता में कमी आ सकती है, समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और ऐसे में आप गलत निर्णय ले सकते हैं।

यदि आप खुद को बहुत अभिभूत महसूस कर रहे हैं और यह सोचते हैं कि अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में आप समर्थ नहीं हैं, तो आपको इस बारे में किसी से बात करने की जरूरत हो सकती है। नीचे कुछ सामान्य प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।

मुझे किसी भी मदद की ज़रूरत नहीं है। मैं खुद अपने दम पर समस्या का समाधान कर सकता हूं,क्या मैं नहीं कर सकता हूं?

हर किसी व्यक्ति को अपने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर सहायता की आवश्यकता होती है। यदि किसी को शारीरिक पीड़ा है या हल्का बुखार है, तो वह आराम करके या खानपान पर ध्यान देकर स्थिति को संभाल सकते हैं। यदि परेशानी बनी रहती है या बिगड़ जाती है, तो उन्हें इलाज लेने और दवाईयों की जरूरत होगी। मानसिक स्वास्थ्य के साथ भी ठीक ऐसा ही होता है। आप खुद की देखभाल के लिए अपनी जीवन शैली में बदलाव कर स्थिति को बेहतर ढंग से संभाल  सकते हैं, लेकिन अगर समस्या बनी रहती है, तो आपको अपनी परेशानी से निपटने में किसी की सहायता लेना मददगार हो सकता है।

कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने से मुझे किस तरह मदद मिल सकती है?मैं बाहर से मदद ले सकता हूं...

हमारा ज्यादातर समय कार्यस्थल पर गुजरता है और कार्यस्थली का माहौल हमारी मनःस्थिति  पर प्रभाव डालता है। यदि आपका मैनेजर सहयोग करने वाला है तो आपको कार्यस्थल पर व्यावहारिक के साथ ही भावनात्मक सहारा मिल सकता है। यदि आपको विशेष प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होती है (उदाहरण के लिए काम से कुछ घंटों या दिनों की मोहलत, या आपके काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने के लिए आपके काम का पुनर्मूल्यांकन), इस संदर्भ में आपके मैनेजर के लिए आपका निवेदन समझना आसान हो सकता है। कहा जाता है कि, आपको इस बात की समझ होनी जरूरी है कि क्या आपके कार्यस्थल पर बातचीत का माहौल कैसा है।

मदद पाने के लिए मेरे पास कौनसे विकल्प हैं?

कार्यस्थल पर, आप अपने सहकर्मियों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। यदि वहां कोई ऐसा सहकर्मी है, जिसके साथ आपका अच्छा तालमेल है, तो उससे बात करने का प्रयास करें। विकल्प के तौर पर, आप अपने मैनेजर से बात कर सकते हैं। यदि आपको लगता है कि सहकर्मी या मैनेजर आपकी सहायता करने में समर्थ नहीं है, तो अपने एचआर विभाग के कर्मचारियों से बात करें। कुछ संगठनों में ईएपी या कर्मचारी सहायता कार्यक्रम होते हैं, जिनमें  प्रशिक्षित काउंसलर्स के साथ ही आपकी मदद के लिए कुछ तनाव प्रबंधन संसाधन शामिल होते हैं।

लेकिन क्या अपनी समस्या के बारे में मैनेजर से बात करना वास्तव में ठीक होगा?

यह आपके मैनेजर और उसके साथ आपके ताल्लुकात पर निर्भर करता है - क्या वे आप से सहानुभूति रखने वाले हैं, क्या आपको विश्वास है कि वे आपकी मानसिक परेशानी को समझने का माद्दा रखते हैं, क्या मैनेजर आपकी परेशानी को सुनने और सहानुभूति प्रकट करने वाला है, वह ऐसी स्थितियों पर किस तरह की प्रतिक्रिया दे सकता है ( या पूर्व में उन्होंने ऐसे हालात में सही तरीके से जवाब दिया है), और क्या आप उन पर भरोसा करते हैं कि वह इस जानकारी को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। अक्सर, संगठन की नीतियों और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मैनेजर प्रतिक्रिया देता है। इसलिए यदि संगठन की संस्कृति मानसिक स्वास्थ्य के मामलों पर ध्यान देने वाली होती है और ऐसे मामलों की स्वीकृति को बढ़ावा देती है, तो उन संगठनों में प्रबंधकों को भी इन बातों का विशेष ध्यान रखना होता है।, तब मैनेजर को ऐसे मामलों के प्रति जवाबदेह और सहायता प्रदान करने वाला बनने की जरूरत होगी।

क्या होगा यदि मेरे कार्यस्थल पर मदद के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं है?

अक्सर कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के लिए अपने मानसिक तनाव के बारे में बातचीत करने की कोई जगह नहीं होती है; और कर्मचारियों को लगता है कि इस बारे में बातचीत करने से उन्हें कमजोर और अक्षम के रूप में देखा जाएगा। आदर्श रूप से, कर्मचारियों को उनकी मानसिक परेशानी के बारे में बात करने के लिए कई रास्ते मिलने चाहिए और यह संगठन की जिम्मेदारी है कि वह इस तरह की बातचीत के लिए सुविधा प्रदान करे। यदि आप मानते हैं कि इन सबसे भी आपकी मानसिक समस्या दूर नहीं हो पा रही है, तो कार्यस्थल के बाहर किसी पेशेवर की मदद लें। इन सबके बीच, कुछ ऐसे तरीके हैं जो संगठन अपने कर्मचारियों के लिए अपना सकते हैं:

- मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मुद्दों पर कर्मचारियों के साथ लगातार चर्चा करते रहने के साथ-साथ सहयोगियों के स्तर पर पहल करना

- संगठन के स्तर पर विभिन्न पहल कर, कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य और भलाई के महत्व के बारे में समझाना

- कर्मचारियों के लिए मदद तलाशने के लिए कई रास्तों को खोलना

यह लेखवर्कप्लेस ऑप्शंस,बैंगलोर की क्लीनिकल हेड मौलिका शर्मा और आईकॉल साइकोसोशल हेल्पलाइन,मुंबई की प्रोग्राम एसोसिएट तनुजा बाबरे के इनपुट्स के साथ तैयार किया गया है।