अपनी कहानी बताना - मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं तैयार हूं?

यौन शोषण के कारण होने वाले सदमे की प्रकृति काफी अनोखी होती है। यह अनुभव हर एक व्यक्ति के लिए अलग होता है और कई कारकों से प्रभावित होता है: अनुभव की परिभाषा, उसकी अवधि, अपराधी के साथ संबंध, जिस पर्यावरण में ये घटना हुई - और यह केवल सतह को खरोंचने के बराबर है।

यौन हिंसा किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरे में डाल देती है। इससे एक व्यक्ति शक्तिहीन महसूस कर सकता है। आंतरिक शर्मिंदगी, अपराध, क्रोध, भय और दोष के कारण उत्तरजीवी के स्वयं के प्रति भावना पर बुरा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यौन हिंसा का अनुभव करने वाले लोग अक्सर इस समय प्रतिक्रिया करने या लड़ने में, अपने अनुभवों के बारे में बात करने में या कानूनी कार्रवाई करने में असमर्थ होते हैं। उत्तरजीवी अपनी चुप्पी को विफलता मानते हैं और इसके साथ "लेकिन अब तक वह चुप क्यों थी" जैसी प्रतिक्रियाएं उन पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

अपनी कहानी बताना 

हालांकि हमारे बयान या कहानी को सुनाना महत्वपूर्ण है, हमें याद रखना होगा कि चुप्पी सुरक्षा की भावना प्रदान कर सकती है। जब हिंसा पहुंचाई जाती है, व्यक्ति सब से पहले सुरक्षा खोजता है; और हम अनुकूली प्रतीत होने वाले व्यवहार प्रदर्शित करने लगते हैं। यह प्रबलन का एक चक्र है। जब किसी दल के साथ रात के 8 बजे शराब पीना एक सकारात्मक अनुभव बन जाता है, तो हम ऐसा बार बार करने लगते हैं। ऐसा व्यवहार और मजबूत होता जाता है। जब एक संस्कृति शर्म, धमकी और दोषी पीड़ित की भावना से सशक्त होकर एक एजेंडा का प्रचार करती है, तो मौन अनुकूली लगता है। यह प्रबलन के चक्र का एक हिस्सा बन जाता है।

तो आप कैसे निर्णय ले सकते हैं कि उनके वक्तव्य को साझा करने का सही समय है? जिन उत्तरजीवियों के साथ मैंने काम किया है, उनमे से अधिकांश ने अपने समुदाय का पुनर्निर्माण किया है क्योंकि वे सुरक्षा की अपनी परिभाषा का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। वे इन लोगों को जानना और समझना चाहते हैं ताकि इससे वे अपने लिए एक ऐसी जगह बना सकें जिसमे वे भेद्य, समर्थित और वे जो सच में हैं, वैसा महसूस कर सकें। वे अपनी कहानी साझा करने से पहले सावधानी से आगे बढ़ते हैं और यह उत्कंठा बेहद मान्य है।

अपनी कहानी साझा करने से पहले विचार करने के लिए यहां कुछ उपयोगी सवाल दिए गए हैं:

• यह व्यक्ति / समुदाय मेरी कहानी साझा करने पर कैसी प्रतिक्रिया देगा?

• मैं उनकी प्रतिक्रिया स्वीकार करने के लिए कितना तैयार हूं?

• समर्थित महसूस करने के लिए मुझे किन चीजें की ज़रूरत है?

इन सवालों के जवाब से शुरुआत की जा सकती है। हम यह मानते है कि बहादुरी उन लोगों को अपने आघात के बारे में बताने में हैं जिनके साथ ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ, मानो जैसे कि किसी पदक के लिए कीमत की भुगतान करनी हो। नहीं। आप बहादुर हैं क्योंकि आप इससे गुजर कर निकल गए हैं। इस अनुकूलनशीलता को मान दिया जाना चाहिए। किसी के यौन आघात की कहानियों का खुलासा करना एक बड़ी व्यक्तिगत लागत पर आता है, और आप अकेले व्यक्ति हैं जो अपनी कहानी साझा करने के लिए अपनी तत्परता निर्धारित कर सकते हैं। यदि आप इसे साझा नहीं कर पा रहें या नहीं करना चाहते हैं तो इससे आपका आघात कम दर्दनाक या अमान्य नहीं बनता है।

जब यौन हिंसा पहुंचाई जाती है, क्षमता को क्रूरता से छीन लिया जाता है। जब आपबीती साझा करने का दबाव होता है तो क्षमता को बार-बार छीना जाता है। आघात के बाद आप अपने सफर के जिस दौर में हैं, उस पर निर्भर करते हुए यह तय कर लें कि आपको अपनी कहानी किस के साथ, कब, कहाँ, और कितनी साझा करनी है।

उगाही परिभाषित करना

आघात के बाद का तनाव और इससे उगाही एक रैखिक प्रक्रिया नहीं है। सचेत रहने से मदद मिल सकती है। इस तनाव के प्रबंधन के लिए इससे उभरने की नीतियाँ और कौशल से काफी हिम्मत मिल सकती है। अपने सुरक्षित समुदाय के किसी एक व्यक्ति या कुछ लोगों के साथ अपनी कहानी साझा करना आपको सीमाओं का अभ्यास करने में मदद कर सकता है। लोग आपसे कई सवाल कर सकते हैं; लेकिन उनकी जिज्ञासा आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है। अगर आप कुछ नहीं बताना चाहते, विवरण नहीं देना चाहते (या केवल वही विवरण बताएं जो आप चाहते हैं) या किसी बात को दृढ़ता से कहते हैं, तो ये बिलकुल उचित है।

अपनी कहानी को साझा करना उस दर्दनाक घटना को एक बार फिर से सक्रिय कर सकता है। ये ट्रिगर्स मनोवैज्ञानिक उत्तेजना हो सकते हैं जो फ्लैशबैक-जैसे की यादें, भावनाएं या शारीरिक प्रवृत्तियों, जैसे दर्द या धुंध जिसे आपने अनुभव किया हो, उकसा सकते हैं। तो अगर आप असहज महसूस करना शुरू करते हैं और बातचीत नहीं करना चाहते, तो आपको ऐसा करने का अधिकार है।

जब भी संभव हो, खुद को जांचें। श्रोता मजबूत भावनात्मक प्रतिक्रिया दे सकते है और सीमाएँ बांधना बिल्कुल ठीक है। उनकी प्रतिक्रिया उनके अनुभव के लिए मान्य हैं, और आपको उन्हें उस पल में शांत करने की आवश्यकता नहीं है। यदि कहानी को एक बड़े समुदाय के साथ साझा किया जाता है, जैसे की सोशल मीडिया पर, तो ऐसे में, आपके लिए एक मजबूत ऑफलाइन समुदाय होना सहायक होगा। आपकी कहानी बताने पर आपको सहायक समुदाय का सहारा और एकजुटता प्राप्त हो सकती है, पर साथ ही में आपको ट्रॉलिंग, साइबर बुलींग और अजनबियों द्वारा आपके अनुभव के बारे में पूछे गए सवालों से कमजोर कर सकता है। ये पहलू सक्रिय कर सकते हैं - और एक पुष्टि करने वाला, ऑफलाइन समुदाय लगातार समर्थन और स्वास्थ्यप्राद का स्रोत हो सकता है।

अपनी हादसे से उभरने की नीतियों को अनुकूलित करें

अनुकूलित उभरने की नीतियाँ आपकी ताकत बन सकती है - क्या यह एक कसरत है? क्या यह एक खेल है? योग? ध्यान अभ्यास? ऐसा क्या है जो आप अपने शरीर और मस्तिष्क को जोड़ने के लिए लगातार कर सकते हैं? आप सक्रिय रूप से दोनों को कैसे जोड़ रहे हैं?

सतर्कता का निरंतर एकीकरण हमें सामान्य से अधिक तेज़ी से, हमारे शरीर में प्रतिक्रियाओं को पहचानने और महसूस करने में मदद करता है। यह तकलीफ को शुरुआती दौर पर ही दूर करने और ट्रिगर्स के कारण उत्पन्न आघात संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद कर सकता है। यदि आप थेरेपी सत्र में जाते हैं - जिसे अत्यधिक मान्य किया गया है- तो अपनी कहानी साझा करने से पहले हादसे से उभरने की नीति और एक योजना बनाने से आपको मदद मिलेगी। यह आघात को संसाधित करने, आपकी कहानी को प्रचारित करने और भावनात्मक सुरक्षा के लिए नीतियों को बनाने के महत्व को समझने में उपयोगी हो सकता है।

यौन उत्पीड़न और यौन प्रताड़ना ऐसे दो शब्द हैं जो पिछले दो हफ्तों में हुए वार्तालापों में सबसे ज्यादा सुने गए हैं। हमने अतिक्रमण की योग्यता के बारे में बात की, कहानियों को संबोधित किया, अपराधियों को जिम्मेदार ठहराया, कट्टरपंथी सक्रियता में लगे रहे, एक समुदाय बनाया और एकजुटता बनाए रखने के लिए अत्यंत कठिन प्रयास किया। कई सफलताएँ, कुछ विफलताएं, कई सबक मिले। बर्फिले मौसम में बिना किसी सुरक्षात्मक कपड़े पहने घर के बहार रहने से ठंड और खांसी हो सकती है। वहां कोई सुरक्षात्मक कारक नहीं हैं। इसी प्रकार, भावनात्मक सुरक्षात्मक कारकों और सुरक्षा नीतियों के न होने पर आघात संबंधी ट्रिगर्स सक्रिय हो सकते हैं। हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही महत्वपूर्ण है - एक दूसरे की तुलना में कभी अधिक महत्वपूर्ण नहीं होता है। उपचार रैखिक नहीं है, यह एक यात्रा है; और मदद हमेशा एक अच्छा विचार होता है।

रुचिता चंद्रशेखर एक शिकागो स्थित आघात मनोवैज्ञानिक है जो एलजीबीटीक्यूआईऐ समुदाय समेत लिंग आधारित हिंसा से बचने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। उनकी विशेष रूचि आघात सूचित थेरेपी में हैं,दक्षिण एशियाई समुदायों में मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी शर्मिंदगी को दूर करना और स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों पर हाशिए और उत्पीड़न के प्रभाव की खोज करना है।