मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहने के लिए दस सुझाव

मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य और भलाई का एक महत्वपूर्ण, अनिवार्य हिस्सा है। हममें से ज़्यादातर लोग शारीरिक रूप से स्वास्थ रहने के लिए किसी न किसी गतिविधि में हिस्सा लेते हैं- जैसे जिम जाना, पैदल चलना, तैराकी या मैदान में खेलना आदि। इसी तरह, हम सब मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए कुछ कार्यकलापों को भी शामिल कर सकते हैं।

आमतौर पर एक ग़लतफ़हमी होती है कि कोई मानसिक स्वास्थ्य विकार न होने का मतलब है कि व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अवसाद, व्यग्रता या अन्य विकार नहीं होने पर भी जरूरी नहीं है कि व्यक्ति मानसिक या भावनात्मक रूप से स्वस्थ है।

पढ़ें: मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण / मानसिक रूप से स्वस्थ होने के संकेत क्या हैं?

हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य में क्यों निवेश करें?

भावनाओं का प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण कौशल है। भावनाओं के विनियमन कौशल की कमी से खराब सेहत, रिश्तों में कठिनाई और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहना हमें चुनौतियों, तनाव और असफलताओं का सामना करने में मदद करता है। यह हमें दैनिक जीवन में अधिक कार्य करने के लिए तैयार करता है। एक व्यक्ति जो मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ है वह खुद से और अन्य लोगों के साथ संपर्क करने में सक्षम होता है, और ज़िन्दगी जो चुनौतियां सामने लाती है उनका सामना करने में सक्षम होता है।

बेंगलुरु स्थित काउंसलर मौल्लिका शर्मा कहती हैं कि "हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, और हमें उन लोगों और चीजों से निपटना होगा जो हमें पसंद नहीं है। हम अपनी स्थितियों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं जब कि हम केवल अपने आसपास की चीजों की अपनी व्याख्या को ही नियंत्रित कर सकते हैं। हम चुनौतियों को जितना अधिक स्वीकार करने में सक्षम होंगे, हम उतना अधिक मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ बन सकते हैं"।

अपनी मानसिक भलाई का ख्याल रखना

अपने मानसिक भलाई का ख्याल रखने का विचार, अस्पष्ट, जटिल या चुनौतीपूर्ण लग सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आप कुछ सरल दैनिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके, या अपनी जीवनशैली में कुछ मामूली परिवर्तन करके अपनी मानसिक भलाई की देखभाल कर सकते हैं। यहाँ कुछ तरीके हैं जिनसे आप शुरू कर सकते हैं:

1. अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें

आप मानसिक रूप से स्वस्थ हैं यह सुनिश्चित करने में शारीरिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अच्छी तरह से खाने, पर्याप्त आराम और व्यायाम करने, और सक्रिय रूप से शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने से आप स्वस्थ रह सकते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ताजा खाना दैनिक तनाव से निपटने में शरीर की मदद करता है। विटामिन बी -12 और ओमेगा 3 फैटी एसिड से समृद्ध भोजन मस्तिष्क में मनोदशा नियमित करने वाले रसायनों के स्तर को ऊपर रखता है। पर्याप्त आराम मिलना भी महत्वपूर्ण है; जब हम सो रहे होते हैं शरीर अपने दैनिक टूट–फूट को ठीक करता है। नींद की कमी आप को थकान, तनाव और रुग्ण महसूस करा सकती है। पर्याप्त व्यायाम भूख को भी बेहतर बनाता है, और आपको पर्याप्त नींद में मदद करता है जो आपकी मानसिक भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।

2. व्यायाम करें और कुछ ताजी हवा लें

सूरज की रोशनी से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ जाता है- यह वह रसायन है जो मनोदशा को नियंत्रित करता है। रोज़ सूर्य के प्रकाश में रहना अवसाद से बचने में मदद करता है। शारीरिक गतिविधियां मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। व्यायाम ऊर्जा को बढ़ाता, तनाव और मानसिक थकान कम कर देता है। आप ऐसी गतिविधि का पता लगाएं जो आप को आनंद देती हों, ताकि यह प्रक्रिया आप के लिए रोमांचक हो सके।

3. अपना ख्याल रखें

अपनी देखभाल करना, मानसिक और भावनात्मक भलाई का अनिवार्य हिस्सा है। अपनी भावनाओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने से तनाव और संघर्ष का सामना करने में आसानी हो जाती है। खुद के लिए अलग समय निर्धारित करें; अपनी भावनात्मक जरूरतों को देखें, किताब पढ़ें, खुद को संतुष्ट करें, या बस आराम करें और अपने दैनिक कार्यों के बारे में चिंता किए बिना स्वच्छंद हों।

अपने गैजेट अलग करो और अधिक सचेत होते हुए आपके आसपास जो हो रहा है उस पर ध्यान दो। "अधिक सचेत होने का मतलब है कि बिना अतीत या भविष्य के बारे में ज्यादा सोचे बस वर्तमान में रहें; चुने कि आप को किसका जवाब देना है, बजाय इसके कि जो भी प्रकट हो ज़हन में आए या अनुभव हो उस के साथ बहते चले जाएँ; एक समय पर एक जगह ध्यान केंद्रित करना, गैरआलोचनात्मक रहते हुए चीजों और स्थितियों की ओर नश्वरता का रवैया रखें। यह अनुभवों के लिए खुला रहने में और जरूरत से ज्यादा प्रभावित न होने में मदद करता है।" डॉ एम मंजुला, नैदानिक ​​मनोविज्ञान, निमहांस के अतिरिक्त प्रोफेसर कहते हैं।

4. जिन लोगों के साथ आनंद आए उनके साथ रहें

जिनको आप प्यार करते हैं और जिनके साथ आप की पटती हैं उन लोगों के साथ समय बिताने से आप में मूल्यवान होने और सराहना किए जाने की भावना आती है। अपने दोस्तों, परिवार, साथियों और पड़ोसियों के साथ स्वस्थ संबंधों का होना आप में भावनात्मक स्वास्थ्य और जुड़ने की भावना समृद्ध कर सकता है। एक सहयोगी के साथ दोपहर का भोजन करने या कुछ समय से न मिले दोस्त के साथ समय बिताने की योजना बनाएं। कोई प्रौद्योगिकी एक मुस्कान या प्रिय को गले लगाने की जगह नहीं ले सकती है।

5. एक शौक, या नयी गतिविधि करें

ऐसी गतिविधियां जो आपको आनंद देती हैं उनमें में भाग लेना आप को व्यस्त और खुश रहने में मदद करता है। यह आपके दिमाग को व्यस्त रखता है और आपकी भावनाएं व्यक्त करने में मदद कर सकता है, खासकर वह जो आप दूसरों के साथ साझा करने में दिक्कत महसूस करते हैं। शौक आपके तनाव दूर करने और आत्मसम्मान बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

नई गतिविधियों की कोशिश करना परिपेक्ष्य ताजा रखने में मदद करता है, और आपको अपनी सुविधा क्षेत्र के बाहर कदम उठाने में व्यस्त रखता है। जब आप नए कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो सीखने की प्रक्रिया सोच के पैटर्न को बदलने में मदद करती है। नया कौशल उठाना आप के लिए चुनौती होती है, आपकी एकाग्रता का स्तर बढ़ जाता है, और आपको कुछ नया सीखकर अच्छा लगता है। यह आप में नयी स्थितियों, नयी चुनौतियों और नये लोगों से सामना करने के लिए सक्षम होने में आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।


6. तनाव को संभालें

हम सभी के पास कुछ लोग या घटनाएं होती हैं जो तनाव का कारण होती हैं। इन कारणों को पहचाने, फिर से व्याख्या करने के लिए उन स्थितियों के मूल्यांकन का पुन: प्रयास करें। कुछ पस्थितियों में आप तनाव उत्पन्न करने वाली स्थितियों से दूर रहने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन यह हमेशा कारगर या संभव नहीं होता। कभी कभी, तनाव कुछ स्थितियों या जीवन की घटनाओं को संभालने के लिए रणनीतियों की कमी के कारण भी हो सकता है। यही कारण है कि यह अपने तनाव को संबोधित करने के लिए कौशल सीखने के लिए आवश्यकता है।

"यदि आप जानते हैं कि परीक्षा तनाव बढाती है, तो आपको सीखना चाहिए कि परीक्षा को किस परिपेक्ष्य में रखें ताकि यह आप के जीवन को परिभाषित करने वाली घटना न बने, क्योंकि परीक्षा एक ऐसी चीज़ है जिसका सामना करना पड़ेगा। कुछ मामलों में, तनाव पैदा करने वाली स्थितियों से बच सकते हैं, लेकिन आप को यह अंतर करने में सक्षम होना चाहिए कि किन पस्थितियों से बचा जा सकता है और किनसे नहीं। अपने तनाव का प्रबंधन करने के लिए रणनीति बनाएं ताकि आप अपनी बेहतर देखभाल कर सकें। एक दोस्त से बात करना, अपने आप में विश्वास करना, अपनी स्थिति की पुनर्व्याख्यायें, ध्यान, टहलने जाना, संगीत सुनना, व्यायाम करना आदि शामिल हैं, मौल्लिका शर्मा कहती हैं।

7. अपने आप को स्वीकार करें और विश्वास रखें

हम सब अलग हैं, और हम सब में अपनी खूबियाँ और कमजोरियाँ हैं। अपनी खूबियों की पहचान करना तथा मानना और अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने से आप को खुद में विश्वास करने का साहस और आगे बढ़ने का बल मिलता है। हर एक में कमजोरियाँ होती हैं, और आप में भी हैं; कोई पूर्ण नहीं है। आप खुद उन कमजोरियों को बदलने के लिए चुन सकते हैं जो कि आप को पसंद नहीं है या उन कमजोरियों को स्वीकार करने के लिए चुन सकते हैं जिनके साथ आप रह सकते हैं। लेकिन यह स्वीकार करना कि आपमें कुछ कमजोरियाँ हैं जैसे हर किसी में होती हैं और यह ठीक है कि आप उत्तम से कुछ कम हैं, यह अपकी मानसिक और भावनात्मक भलाई का एक महत्वपूर्ण घटक है। यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें। अपनी क्षमताओं को जानने का प्रयास करें और तदनुसार सीमाएं बनाएं। प्राथमिकताएं और अभिभूत होने पर 'नहीं' कहना जानें। जान लें कि आप ठीक है और आप लायक हैं।

8. आपके आशीर्वाद की गिनती

यह एक क्लिशे की तरह लग सकता है, यह सच है कि जब जो आप के पास है उसके लिए आभारी होते हैं, तो आपका ध्यान जो आप के पास नहीं है से हट जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो आप के पास है जब उसके लिए आभारी होते हैं तो यह आपको भविष्य के बारे में आशावादी रहने में मदद करता है और आपके मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ा देता है। एक आभार पत्रिका को बनाए रखें। हर रात सोने जाने से पहले, लिखें कि उस दिन आप किस चीज़ के लिए आभारी हैं। यदि आप खुद को आभारी होने और आशीर्वाद गिनने की अनुमति देते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि ऐसा कोई दिन नहीं है जब आप किसी के लिए आभारी न हुए हों, चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।

9. अपने आप को व्यक्त करें

बहुत बार, हम नकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करने में शर्माते हैं हम क्या महसूस कर रहे हैं, और हमारी पसंद या ना पसंद क्या है यह व्यक्त करना हमारे दिमाग की भीड़ को कम करता है। अपनी भावनाओं को दबाना हम में से बहुतों के लिए मुकाबला करने की रणनीति है, फिर भी यह हानिकारक हो सकती है। शोध बताते हैं कि दबा भावनाओं को दबाना वास्तव में भावनाओं को मजबूत बना सकते हैं। यह अधिक तनाव का कारण हो सकते है। भावना का विस्थापन किसी तुच्छ या असंबंधित पर हो सकता है। भावना का दमन अवसाद या व्यग्रता विकारों को उत्पन्न कर सकता है। यहाँ तक कि क्रोध और उदासी जैसी भावनाएं भीअभिव्यक्ति के योग्य हैं। हमें केवल यह जानने की जरूरत है कि कैसे व्यक्त करें जिससे हमारे ऊपर, हमारे रिश्तों पर और वातावरण पर कहर पैदा न हो कोई भावना स्वयं के द्वारा अच्छी या बुरी नहीं होती। हर भावना महत्वपूर्ण और आवश्यक है। अनुभव की तीव्रता है, और यह कैसे व्यक्त की गई थी (बहुत अधिक या बहुत कम), अभिव्यक्ति का औचित्य, और भावना की आवृत्ति, इसे स्वस्थ या अस्वस्थ बनाती है "डॉ मंजुला कहती हैं।

 

10 अभिभूत महसूस करने पर मदद की गुहार लगाएं

पूरी पृथ्वी पर ऐसा कोई नहीं है जिसका जीवन सर्वोत्तम है जो तनाव, व्यग्रता या खराब मनोदशा से स्वतंत्र हो। जब आप उदास, चुनौतीपूर्ण, निराश, भ्रमित, गुस्सा, या बस घबराहट महसूस करें और सामना करने में असमर्थ लग रहा हो, तो किसी ऐसे से बात करें जिस पर विश्वास कर सकते हों – जीवनसाथी, दोस्त, माता-पिता, भाई या रिश्तेदार हो सकता है। यदि आपको लगता है कि अधिक समर्थन की जरूरत है, एक चिकित्सक या परामर्शदाता के पास जाएँ। जितनी जल्दी आप पहुँचेंगे उतना बेहतर है। याद रखें कि मदद मांगने में कोई शर्म नहीं है - यह महान शक्ति का संकेत है, न कि कमजोरी का, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है। आप को अकेले जीवन की चुनौतियों का सामना करने की जरूरत नहीं है। लचीले लोग उपलब्ध समर्थन प्रणाली का उपयोग अपनी देखभाल करने के लिए करते हैं।