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किशोर मस्तिष्क कैसे काम करता है?

"शराबी को शराब पीने से जितनी उत्तेजना होती है, नवयुवकों में उतनी उत्तेजना प्राकृतिक रूप से होती है- अरस्तू

किशोरावस्था की शुरूआत बहुत भावनात्मक और व्यावहारिक परिवर्तनों के साथ होती है। यह किशोरों के मन में और साथ ही उनके आस-पास के वयस्कों के बीच भ्रम का कारण बनती है। यहां तक कि वयस्क के रूप में यह समझने का प्रयास करते हैं कि उन्हें क्या चीज मनमौजी, उदासीन एवं अति उन्मुख बनाती है, वहीं यह याद रखना भी महत्वपूर्ण है कि किशोर भी अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को समझने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

स्कूल लेक्चर के दौरान जीव विज्ञान की पुस्तक द्वारा एक किशोरवय के शारीरिक परिवर्तन के बारे में बातें बताई जाती हैं - पर शायद ही कभी कोई उनके मस्तिष्क के विकास और किस तरह यह  किशोरों और युवा वयस्कों के व्यवहार को निर्धारित करता है, इस पर फोकस करता है ।

आइए कुछ ऐसी स्थितियों पर विचार करें जो कि उन किशोरों के लिए सामान्य हो सकती हैं, जिनके साथ हम बातचीत कर चुके हैं। एक किशोर एक फिल्म देखने के लिए एक मॉल में जाता है, लेकिन एक नए फोन के साथ वापस आता है,वह अपने सभी पैसे जो लंबे समय से बचा रहा था,खर्च कर देता है। दूसरा स्केटबोर्ड खरीदता है,छतों पर स्केटबोर्डिंग शुरू करता है और खुद को चोट पहुंचाता है। और फिर एक और बच्चा अपने दोस्तों के साथ कुछ नया करने के बहाने ड्रग्स और शराब पीता है। तो किशोरों के दिमाग में ऐसा क्या होता है,जो उनको संभावित खतरों को अनदेखा करने और जोखिम भरे व्यवहार में लिप्त हाने की ओर प्रेरित करता है?

ऐसा माना जाता है कि बचपन के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क के विकास का प्रमुख हिस्सा होते हैं। हालांकि छह वर्ष की उम्र तक मस्तिष्क अपने पूर्ण आकार का 90 प्रतिशत तक बन जाता है,हालांकि बीसवें वर्ष तक इसमें बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और परिवर्तन चलता रहता है। यह एक नेटवर्क के बनने और तारों के उन्नयन के जैसा होता है - यह नए कनेक्शन स्थापित कर रहा होता है और उन पुरानी चीजों से छुटकारा पा रहा है जो अब अनुपयोगी हैं। मस्तिष्क में सम्पर्क,संचार के विभिन्न नेटवर्कों को संदर्भित करता है जो इसके भीतर होते हैं।

किशोरों के व्यवहार को समझना

मस्तिष्क के दो हिस्से हैं, जो किशोरों के व्यवहार को समझने में बहुत महत्वपूर्ण हैं - प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और लिम्बिक सिस्टम। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स जो कि मस्तिष्क का भाग है- तर्क वितर्क,सोच,तार्किक,रचनात्मक कार्यों और निरोधात्मक नियंत्रण आदि के लिए जिम्मेदार होता है। लिम्बिक प्रणाली,  उन प्रसंस्करित भावनाओं जैसे क्रोध और खतरे के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिफल की इच्छा के लिए जिम्मेदार है।

प्रीफ्रन्टल कॉर्टैक्स,लिम्बिक सिस्टम के बाद विकसित होता है। यही कारण है कि किशोरावस्था में कारण,  तर्क  या आवेग से उनकी भावनाएं अधिक हावी होती हैं। प्रतिफल पाने की चाह का प्रक्रिया केंद्र भी इस उम्र में बचपन या वयस्कता के मुकाबले अधिक संवेदनशील होता है। इसलिए, वे खतरनाक व्यवहार में लिप्त होने में खुश होते हैं।

वास्तव में, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स - मस्तिष्क का एक हिस्सा, जो हमें अपने कार्यों के संभावित परिणामों के बारे में सोचने में मदद करता है- वह बीसवें दशक के बीच की उम्र तक पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। जो यह बताता है कि किशोरों को संभावित परिणामों की कम परवाह क्यों होती है। अगर कोई उन्हें अच्छा महसूस कराता है,तो वे क्षणिक आनंद के लिए इसे करते हैं।

हालांकि, मस्तिष्क के निरंतर विकास और ढलनशीलता का उपयोग किशोरावस्था को कई रचनात्मक कौशल विकसित करने के लिए भी किया जा सकता है। आप किशोरों को ऐसे तरीकों से जोड़ सकते हैं, जिससे उन्हें नए कौशल सीखने और जो पहले से हैं उन्हें सुधारने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। मस्तिष्क में अक्सर उपयोग किए जाने वाले संयोजन इस उम्र में मजबूत हो जाते हैं और जो संयोजन अक्सर इस्तेमाल नहीं किए जाते, उन्हें खारिज कर दिया जाता है, उसी प्रकार, जैसे माली एक झाड़ी की कमजोर शाखाएं काट देता है, ताकि मजबूत शाखाऐं और ज्यादा मजबूत हो सकें।

वयस्क क्या कर सकते हैं

वयस्क होने के नाते, किशोरों को ऐसे तरीके से परामर्श देना आवश्यक होता है जो उन्हें ऐसा महसूस न होने दे कि उन्हें आदेशित या नियंत्रित किया जा रहा है। इस उम्र के दौरान मस्तिष्क बहुत अनुकूलक और लचीला होता है और किशोर मस्तिष्क के विकास में अच्छी सलाह और संगत काफी लंबा सफर तय कर सकते हैं। इस उम्र में बच्चों के आवेग नियंत्रण,  जोखिम लेने या आत्म-चेतना को निंदित नहीं करने के लिए भी सावधानी बरतनी चाहिए। यह केवल उनको निराश होने और अधिक विद्रोही व्यवहार की ओर जाने का कारण होगा।