मानसिक आघात के अर्थ का अवलोकन

डॉ. दिव्या कन्नन

*चेतावनी - इस आलेख में ऐसी जानकारी है जो कुछ व्यक्तियों को संभावित रूप से परेशान कर सकती है*

"सदमा या मानसिक आघात" जब आप इस शब्द को पढ़ते हैं तो क्या सोचते हैं? सिर की चोट, कार दुर्घटनाएं, भूकंप, बाल शोषण? ये कुछ चीजें हो सकती हैं जिन्हें आप सदमे या दर्दनाक घटनाओं से जोड़ते हैं। हालांकि, अगर यह शब्द आपको भ्रमित करता है या इसे लेकर आप अनिश्चित हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। सदमा या मानसिक आघात का जटिल अर्थ होता है और यह लंबे समय तक किसी के लिए अनजान और अपरिचित भी रह सकता है।

सदमा या सदमे के कारण होने वाले तनाव (ट्रॉमा या ट्रॉमाटिक स्ट्रेस) को पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) के संदर्भ में समझा जा सकता है, लेकिन केवल इसके निदान से हमेशा सदमे के प्रभाव का पूरी तरह पता नहीं लगाया जा सकता है। यह जरूरी नहीं कि है कि जो व्यक्ति किसी प्रकार के सदमे से ग्रसित हैं वह पीटीएसडी के सभी मानदंडों को पूरा करे। हालांकि, ज्यादातर व्यक्तियों को लगता है कि किसी बिंदु पर सदमे या दर्दनाक घटना ने हालात से मुकाबला करने की उनकी क्षमता को कुछ समय के लिए प्रभावित किया है।

एक मनोवैज्ञानिक के रूप में, मैं अक्सर उन रोगियों को देखती हूं जो मुझे बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कुछ मुश्किल या कष्टप्रद अनुभव किया है। जब मैं उनसे पूछती हूं कि वे क्या अनुभव करते हैं, तो वे इस तरह की बातें बताते हैं जैसे "मेरे अंकल ने मेरे साथ अनुचित कार्य किया" या "मेरा पिछला रिश्ता बहुत खराब रहा था" या "कई वर्ष पहले मेरी बहन ने आत्महत्या कर ली थी।" इन मामलों में अधिक विस्तार से जानने पर, मैंने पाया कि इस तरह की घटना से उनके निजी रिश्तों, आत्म-मूल्यों, चिंता, और उनके समग्र स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ा, हालांकि इस तरह की घटनाओं की पहचान उन्होंने मानसिक आघात के रूप में नहीं की। उनके अनुभवों का असर कुल मिलाकर काफी कष्टदायी था – स्थिति से निपटने के सारे तरीकों को निचोड़कर उनका उपयोग करना पड़ा – और जब जीवन में तनाव का वह कारण मौजूद नही रहा तब भी असहायता, डर या घृणा के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त करते थे।    

जीवनकाल में सदमा पहुंचानेवाली या गंभीर रूप से परेशान करने वाली घटनाएं सार्वभौमिक हैं। ऐसा हर व्यक्ति के साथ होता है। व्यक्ति अपने पिछले अनुभवों, जैविक संरचना और अपने आसपास के वातावरण के कारण मानसिक आघात के संपर्क में आने के बाद कई प्रकार की प्रतिक्रियाएं प्रदर्शित कर सकते हैं। मेरे चिकित्सकीय अनुभव में, कुछ लोग दर्दनाक अनुभवों से जल्दी उबर पाते हैं और ऐसे अनुभव उनके व्यक्तिगत, शारीरिक और भावनात्मक कल्याण को बहुत कम प्रभावित करते हैं। अन्य लोगों पर इसका प्रभाव मध्यम दर्जे का होता है और वे घटना की बुरी यादों से बचना चाह सकते हैं। वे अक्सर डरते हैं या उदास महसूस करते हैं, उन्हें ध्यान केंद्रित करने में या ध्यान देने में मुश्किल हो सकती है और दूसरों को एवं दुनिया को थोड़े अलग तरीके से देखना शुरू कर सकते हैं। इन व्यक्तियों में आमतौर पर लचीलापन और विश्वास पैदा करने का कौशल सीखने के लिए कुछ समय के लिए पेशेवर सहायता या परामर्श से लाभ होता है। 

कुछ लोग ज्यादा गंभीर प्रतिक्रियाएं विकसित सकते हैं, जिनके लिए पीटीएसडी एक उचित निदान हो सकता है। वे यह महसूस कर सकते है : 

  • उदास, चिंतित, और मूड खराब होने का अनुभव करना
  • पुरानी दर्दनाक घटना को याद करते रहना
  • सुरक्षित महसूस करने में मुश्किल लगना
  • नींद में गड़बड़ी या बुरे सपनों से परेशान रहना
  • खुद को एकाकी महसूस करना
  • परेशानी का सामना करने अत्यधिक शराब पीना
  • खुद को और दूसरों से कुछ हद तक अलग-थलग महसूस करना
  • और अपने निजी पारस्परिक संबंधों में कठिनाइयां होना।

ऐसे मानसिक आघात जिनकी प्रकृति में पारस्परिक संबंध हो, जैसे बाल यौन शोषण और यौन हमले या दीर्घकालिक भावनात्मक दुर्व्यवहार, इनमें व्यक्ति के जटिल आघात या सी-पीटीएसडी विकार से ग्रसित होने की आशंका होती है, जहां दूसरों पर भरोसा करना और सार्थक संबंध बनाने में उन्हें मुश्किल हो सकती है, स्वयं को प्यार पाने योग्य मानने या अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने और दिन-प्रतिदिन के तनाव सहने में उन्हें कठिनाई होती है।

सदमे के प्रभाव के बारे में विचार करते समय इस बात पर गौर करना जरूरी है कि क्या यह दर्दनाक घटना एक ही बार घटा था, या यह बार-बार घट रहा है। आघात का प्रभाव संचयी हो सकता है, जिसका मतलब है कि व्यक्ति ने आघात की जितनी ज्यादा घटनाओं का सामना किया है, समय के साथ दूसरी, तीसरी और चौथी घटना का उस पर उतना ही ज्यादा प्रभाव पड़ता है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जब आप में पूरी तरह पीटीएसडी के सभी लक्षण नहीं दिख रहे हैं, तो हो सकता है कि जो भी हुआ है आप उसे समझने या उसका सामना करने की कोशिश कर रहे हों। मेरे पास हमेशा ऐसे मरीज़ आते हैं जो मुझे बताते हैं, "लेकिन जो मैंने अनुभव किया वह उतना बुरा नहीं है जितना दूसरों ने अनुभव किया है या आजकल की खबरों में जैसा आप देखते हैं।" मैं उन्हें बताती हूं कि मदद की गुंजाइश से पहले "चरम" का कोई निश्चित स्तर नहीं होता। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जिसका हाल ही में एक नया रोमांटिक रिश्ता शुरू हुआ है, उसे महसूस होता है कि उसका साथी रिश्ते को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि यह तुरंत पीटीएसडी जैसे विकार के लक्षणों की ओर नहीं ले जाता है, फिर भी यदि इस तरह की स्थिति चलती रहे तो व्यक्ति की पहचान पर और वह खुद के बारे में कैसा महसूस करते हैं, इस पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

अचानक हुई किसी घटना के बाद अपने भावनात्मक स्वास्थ्य के शुरुआती संकेतों की पहचान करना, विशेष रूप से यदि यह घटना एक महीने से अधिक पहले हुई है, और किसी ऐसे पेशेवर की खोज करना जो स्थिति की गंभीरता के विषय में आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं – अपने मानसिक स्वास्थ्य का प्रभार लेने का एक प्रभावी तरीका बन सकता है। अपनी ताकत और सहायता प्रणाली को याद रखना भी महत्वपूर्ण है और आघात से उबरने की प्रक्रिया के दौरान उनका उपयोग करना चाहिए। इसमें प्रियजनों, पालतू जानवरों, व्यायाम, स्वंय की देखभाल, ऐसे वातावरण में रहना, जहां आप सुरक्षित महसूस करते हैं, एवं अन्य ऐसे संसाधन शामिल है, जिनका उपयोग आप तनाव से निपटने के लिए कर सकते हैं।

हाल ही बैंगलोर में स्थानांतरित हुई डॉ. दिव्या  कन्नन एक नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक हैं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के नैशविले में वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय में पिछले कई साल हिंसा झेल चुके लोगों के साथ काम किया है। वर्तमान में वह बैंगलोर में बतौर चिकित्सक अभ्यास कर रहीं हैं।