मेरे काउंसलर के लिए नैतिक संहिता के किन विधियों का पालन करना अनिवार्य है?

दुनिया भर के कई देशों में नैतिकता या दिशा निर्देशों की एक संहिता होती है, जिसका पालन करना थेरेपिस्ट एवं काउंसलर्स के लिए अनिवार्य है। नैतिक संहिता क्लाइंट और प्रैक्टिशनर दोनों ही के लिए सहायक होता है: - आपसी अनुबंध के लिए स्पष्ट रूप से दिशा-निर्देश होते हैं।  - दोनों के संबंधों की सीमाएं परिभाषित करने में मदद मिलती है, और - दोनों ही पक्षों के बीच सुरक्षा स्थापना (शारीरिक और भावनात्मक) को मजबूती मिलती है। चूंकि भारत में इसके लिए कोई शासी निकाय या गवर्निंग बॉडी मौजूद नहीं है यहां ज्यादातर लोग, जो किसी थेरेपिस्ट से परामर्श लेते हैं, उन्हें पता भी नहीं होता कि प्रक्रियाओं के पालन की नीतियाँ क्या हैं एवं नहीं होना चाहिए।  व्हाइट स्वान फाउंडेशन ने कुछ चिकित्सकों से बात की यह समझने के लिए कि वे थेरेपी के दौरान किस नैतिक संहिता या दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं: क्या होना चाहिए: - पहले सेशन में, आपका थेरेपिस्ट आपको बताएगा कि आप उससे क्या उम्मीद कर सकते हैं। वे आपके मेडिकल या मानसिक स्वास्थ्य इतिहास को समझने के लिए कुछ पेपरवर्क भरने के लिए कह सकता है, और अपने नजरिए के बारे में भी बता सकता है। - शुरुआती सत्रों में थेरेपिस्ट आपकी स्थिति को समझने और थेरेपी के जरिए आपके लक्ष्यों को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है जिससे आप दोनों जान सकें कि किस दिशा में काम किया जा रहा है। - आपका थेरेपिस्ट अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों के बारे में आपको स्पष्ट रूप से बता देगा। यदि उसके पास आपकी समस्या से निपटने के लिए पूरे साधन या कौशल व क्षमता नहीं है तो वह आपको यह भी बता देगा। ऐसे में वह आपको किसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर के पास भेज सकता है। - थेरेपी अक्सर गैर आदेशात्मक होती है। क्लाइंट होने के नाते आपके पास थेरेपिस्ट के फैसलों पर पूर्ण स्वायत्तता का अधिकार है। एक थेरेपिस्ट आपको आईना दिखाने या स्पष्टता प्राप्त करने में आपकी सहायता करने वाले व्यक्ति के रूप में कार्य करता है। - आपका थेरेपिस्ट आपको भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखते हुए आपके लिए एक समानुभूतिपूर्ण और गैर-न्यायिक स्थान उपलब्ध करवाता है जहां आप खुलकर बात कर सकें। - आपके थेरेपिस्ट और आपके बीच होने वाली सभी बातचीत गोपनीय रहती हैं। चिकित्सक उन्हें आपके किसी मित्र और परिवार या अन्य किसी के साथ साझा नहीं करता है। हालांकि, यदि आपके थेरेपिस्ट को लगता है कि आप ऐसी स्थिति में हैं कि आप खुद को या दूसरों को किसी तरह का नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो वह आपकी सुरक्षा के लिए इस बात को आपके परिवार या अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ साझा कर सकता है।  ऐसी स्थिति में यह बात आपका थेरेपिस्ट आपको पहले सत्र में ही में बता देगा।  एक हेल्पलाइन के रूप में हम जानते हैं कि क्लाइंट के साथ हमारी बातचीत केवल तकनीकी माध्यम के सहयोग से ही होती है। हम फोन पर निदान, स्क्रीनिंग या इलाज नहीं करते हैं। हम जो कुछ कर सकते हैं वह यह है कि व्यक्ति को किसी ऐसे परामर्शदाता के बारे में बता देते हैं, जो परामर्श में उसकी मदद कर सकता है। इसके बाद हम उन्हें आवश्यकतानुसार उपलब्ध सेवाओं से जोड़ते हैं - जैसे कोई थेरपिस्ट, विशेष सेल, कानूनी सहायता, एनजीओ या कोई अस्पताल। तनुजा बाबरे, प्रोग्राम एसोसिएट, आईकॉल साइकोसोशल हेल्पलाइन, मुंबई किस बारे में सावधान रहें? -  शुरुआती सत्रों में थेरेपिस्ट द्वारा एकदम से सुझा दिए गए सुधार। एक थेरेपिस्ट को अपने क्लाइंट का पूरा हाल जानने में समय लगता है। इसके बाद ही उसे समझ आता है कि इलाज और उससे मिलने वाले परिणामों की संभावित विधि क्या हो सकती है। -  किसी तैयार समाधान या सलाह की पेशकश किया जाना या यह बताया जाना कि निर्णय क्या लेना है। - आपकी भावनाओं, पहचान, अनुभवों या विकल्पों के लिए आपको दोषी ठहराना, आलोचना करना या शर्मिंदा करना। - बिना आपकी सहमति के आपके थेरेपिस्ट द्वारा गोपनीय बातचीत का विवरण आपके मित्रों और परिवार के साथ साझा किया जाना। इस काम के लिए मैं सख्ती से मना कर देती हूं: जिस क्लाइंट का मैंने इलाज नहीं किया उसे मैं किसी तरह का दस्तावेज नहीं देती हूं (कई बार पहले सेशन के दौरान ही मुझसे कहा जाता है कि इस तरह का दस्तावेज बना दें कि मैंने क्लाइंट के साथ कई सेशन्स काम किया है, जबकि  मैंने वैसा किया नहीं होता है)। ऐसा वे लोग करते हैं जो लंबी मेडिकल लीव के बाद काम पर लौटना चाहते हैं। थेरेपिस्ट की नैतिक जिम्मेदारियों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में सख्ती से इन्कार कर देना चाहिए। जो आपने वास्तव में किया है केवल उसी का विवरण दें। - डॉ. दिव्या कन्नन, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, बैंगलोर

एक थेरेपिस्ट एवं ऑनलाइन परामर्शदाता के रूप में मैं इस बारे पूरी तरह स्पष्ट रहती हूं कि मैं तुरंत देखभाल के लिए क्या कर सकती हूं और क्या नहीं। स्कित्ज़ोफ्रेनिया जैसी कुछ स्थितियों में मानसिक के साथ ही शारीरिक अभिव्यक्तियां भी होती हैं जिन्हें दवा और कभी-कभी अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता होती है। तब मुझे स्पष्ट रूप से यह बताना पड़ता है कि इस परिस्थिति में अकेला ऑनलाइन हस्तक्षेप काम नहीं कर सकेगा। मैं अपनी सीमाओं को पहचानती हूं और यदि आवश्यक हुआ तो अन्य किसी पेशेवर के पास भिजवा देती हूं।  -शहरजादी सियोभान, मनोवैज्ञानिक, द टॉकिंग कम्पास यदि आप इलाज लेने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए और आप अपने थेरेपिस्ट से बात करनी चाहिए अगर वे क्या कुछ अलग करने जा रहे हैं। 

इसके साथ ही इस बात का आकलन करना जरूरी है कि आपके द्वारा चुना गया थेरेपिस्ट आपके लिए सही है या नहीं। क्या आप कुछ सत्रों के बाद सुरक्षित रूप से उनसे हर बात साझा कर पा रहे हैं? (अक्सर घनिष्ठता शुरुआती कुछ सत्रों के बाद ही बनती है।) क्या आपको महसूस हो रहा है कि वे आपकी बातें बिना भेदभाव के सुन पा रहे हैं?

किसी भी समय, यदि आप असहज महसूस करते हैं, तो आपको इस बात का उल्लेख करना चाहिए और अपने थेरेपिस्ट से यह पूछने का अधिकार है कि वे क्या और क्यों कर रहे हैं। अगर परेशानी बनी रहती है तो इस बात पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए कि थेरेपिस्ट और आपके बीच का रिश्ता आपकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में आपकी सहायता कर पा रहा है या नहीं।