मैं बदलाव लाने के लिए क्या कर सकता हूँ

व्यवहारी शिक्षक या परिवर्तनकारी शिक्षक बनने का चुनाव शिक्षक करता है

शिक्षक के रूप में, एक व्यक्ति को कई रूप लेने पड़ते हैं।  वे कक्षाओं में पढ़ाने के अतिरिक्त, पाठ पढ़ाने की योजना बनाने, सौंपे गए काम का अंकन करने, बैठकों में भाग लेने और कार्यशालाओं आदि में शामिल होते हैं।  ऐसे व्यस्त कार्यक्रमों के होते हुए भी कोई विस्मय होकर सोचता होगा कि एक शिक्षक क्यों छात्र की मानसिक संपन्नता के लिए अपना समय दे।  इसके लिए दो मूल कारण हैं।  पहला, शिक्षक छात्रों के साथ पर्याप्त समय बिताते हैं और यह उन्हे मनोदशा के बदलाव पर या असामान्य व्यवहार जो औसत समय से अधिक रहता है उसका ध्यान रखने हेतु अनुकूल परिस्थिति प्रदान करता है।  कुछ मामलों में, यह बदलाव एक गहरे मुद्दे या मानसिक रोग का संकेत हो सकता है।  ऐसे अव्यक्त बदलाव के बारे में जानकारी रखकर, शिक्षक समय से पहले हस्तक्षेप कर सकते हैं।  दूसरा, भावनात्मक संपन्नता अध्ययन को प्रभावित करता है।  छात्र जो मानसिक रूप से स्वस्थ है वे अधिक प्रेरित होते हैं।  प्रेरित किए गए छात्र अधिक सक्रिय रूप से, सिखाए जा रहे पाठ के बारे में तल्लीन हो जाते हैं, और परिणाम के रूप में, बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन दिखाते हैं। 

जब एक व्यक्ति शिक्षण को पेशे के रूप में चयन करता हैं, तो उसको व्यवहारी शिक्षक या परिवर्तनकारी शिक्षक बनने का चुनाव करना होता है।

  • व्यवहारी शिक्षक, छात्रों को विषय पारेषित करते हैं।  वे पाठ पढ़ाने के लिए योजना बनाकर प्रभावी ढंग से पढ़ाते हैं, सौंपे गए कार्यों को पूर्ण कर अपनी सेवाओं के लिए वेतन पाते हैं।
  • दूसरी ओर परिवर्तनकारी शिक्षक परे जाकर सुनते हैं, मार्गदर्शन देते हैं, प्रेरित करते हैं और अपने छात्रों की मदद करते हैं।  वे अपना समय छात्रों को जानने में लगाते हैं और उन्हे चिंतनशील, स्वतंत्र विचार वाले होने के लिए प्रेरित करते हैं।  परिवर्तनकारी शिक्षकों को उनके प्रयासों के लिए भले ही पैसों से पुरस्कृत नहीं किया जाता हो पर वे अर्थरहित अमूल्य एक निधि प्राप्त करते हैं – गहरी संतोषजनक भावना।  यह कहना आवश्यक नहीं है कि यही वह परिवर्तनकारी शिक्षक हैं जिनके बारे में हमने कई वर्ष पहले कॉलेज के पुनर्मिलन के दिनों में सप्रेम से बात की थी।

परिवर्तनकारी शिक्षक, चिंता करने वाले शिक्षक होने का चुनाव करके आप बदलाव ला सकते हैं।