एक स्वस्थ कार्यस्थली का माहौल कैसा होता है?

जरा सोचिए ! एक कार्यस्थल पर स्वस्थ माहौल कैसा लगता है?  इस बारे में आपके दिमाग में कई विचार आ सकते हैं: क्या कार्यस्थली पर स्वस्थ माहौल भी हो सकता है, जहां आप खुश हो सकते हैं और सहज और आरामदायक महसूस कर सकते हैं? क्या कार्यस्थली पर वास्तव में आपका ध्यान रखा जाता है? क्या आप पर क्षमता से अधिक काम का बोझ डाले जाने पर उस जगह को पसंद करेंगे? वहां का वातावरण कैसा होगा?

जबकि हर एक कर्मचारी को अपनी कार्यस्थली के बारे में संदेह होता है, इसलिए एक स्वस्थ कार्यस्थल बनाना दोराहे पर खड़े रहने जैसी स्थिति है। इसे वास्तविकता में तैयार करने के लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को योगदान करने की आवश्यकता है।

स्वीकृति से बहुत फर्क पड़ता है

चेस्टनट ग्लोबल पार्टनर्स (सीजीपी), इंडिया के कार्यक्रम निदेशक लिनेट नाज़रेथ एक कर्मचारी सहायता कार्यक्रम (ईएपी) में पार्टनर हैं। वह कई कार्यस्थलों के लिए काम करती हैं। लिनेट ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं, जो कर्मचारियों के काम और जीवन के बीच संतुलन, विविधता और समावेश के लिए उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखती हैं। लिनेट कहती हैं कि, "किसी कार्यस्थल पर सबसे बड़ा योगदान वहां के कर्मचारियों के मतभेदों को स्वीकार करना है; फिर चाहे वे पेशेवर मतभेद, कर्तव्य मतभेद, या व्यक्तित्व मतभेद हों। इन अंतरों को स्वीकार करने से स्वीकृति का माहौल तैयार होता है। "

कार्यस्थल पर विविधता और समावेशन की नीति को भी लागू किया जा सकता है, जो लोगों के काम के तरीके में अंतर पैदा करेगा। उदाहरण के लिए:

- कर्मचारी जब शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक स्वास्थ्य समस्या के कारण कार्यस्थली पर आने में असमर्थ हों, तब स्थिति के मद्देनजर उन्हें घर से ही काम करने की अनुमति देकर।

- किसी लत को छोड़ने वाले लोगों को आवश्यक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार देना।

- अनजाने पूर्वाग्रह को कम करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर।

- विचारों और धारणाओं की भिन्नता को प्रोत्साहित करना।

- सभी तरह की संस्कृतियों और उनकी परंपराओं को स्वीकार करना।

कार्यस्थल जितना अधिक मिलाजुला होगा, वहां मतभेदों को स्वीकार करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित किया जाना

कार्यस्थलों के हर स्तर पर नेतृत्व को प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे कर्मचारी अपनी भूमिका को बेहतर तरीके निभाने में जिम्मेदारियां ले सकेंगे। प्रबंधक अपने टीम मेंबर्स की मदद के लिए आगे आ सकते हैं, खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए, जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें विशेष रूप से समझे जाने की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, जरूरत के मुताबिक उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाकर। उन्हें वे काम सौंपकर जो वह आसानी से कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलेगी।

कर्मचारियों के हित और सुरक्षा मानकों को पूरा किया जाना

जब कर्मचारियों के हित और सुरक्षा के मानदंडों को पूरा किया जाता है, तो वे अगले दिन खुशी-खुशी काम करने वापस आते हैं और कार्यस्थल छोड़ने की जल्दबाजी में नहीं रहते। काम की प्रकृति से उनकी खुशी प्रभावित होती है, उन्हें अपने कौशल के अनुसार व्यस्थाएं मेल खाने वाली नौकरी, जहां नैतिकता का ध्यान रखा जाता हो इसकी आवश्यकता होती है। इसके साथ ही भौतिक सुख यानी, बैठने का ठीक स्थान और वेंटिलेशन से उन्हें आरामदायक महसूस होता है।

एक ऐसी कार्यस्थली जहां बैठने में कर्मचारी सहज महसूस करे, इससे बहुत फर्क पड़ता है।  सबसे ज्यादा उन कर्मचारियों के लिए जो शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं, विकृतियों और भावनात्मक समस्याओं से ग्रस्त हैं। लिनेट कहती हैं, "इससे कर्मचारियों को यह महसूस करने में मदद मिलती है कि उनकी देखभाल की जा रही है और वे उन संगठनों के लिए 200% तक काम का योगदान देते हैं जो उनकी देखभाल करते हैं।"

कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों का होना, कर्मचारियों को सुरक्षित और सुलभ बनाता है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के लिए उदार एवं अनुकूल नीतियां तैयार करने से यह सभी प्रकार के लोगों में अच्छी भावना बढ़ाने में सक्षम बनाता है। उदाहरण के तौर पर, कार्य एवं निजी जिंदगी के बीच संतुलन नीति, घर पर बैठकर कार्य करने की नीति, संसाधनों तक पहुंच और कार्य उपकरण नीति, प्रताड़ना विरोधी नीति और यौन-उत्पीड़न विरोधी नीति प्रस्तुत करना।

वास्तविक रूप में सम्मेलन कावातावरण हो

कार्यस्थल वास्तव में तब सम्मेलन का क्षेत्र होता है, जब अलग-अलग तरह के लोगों को  समूह प्रताड़ना, बदनामी एवं धमकी के डर के बिना मिल जुलकर काम करने का अवसर मिलता है।  इस समूह में मानसिक बीमार, शारीरिक बीमार, शारीरिक विकृति वाले, एलजीबीटीक्यूआई + समुदाय, महिलाएं, विभिन्न धर्मों के लोग एवं नशे की लत से निकलने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।  इन सभी के लिए स्वीकृति, सहानुभूति, संवेदनशीलता दिखाना एवं आवश्यक सहारा देना जरूरी है।

लिनेट कहती हैं कि, "अगर आज हम क्वियर (विचित्रकामी) समुदाय के सदस्यों को स्वीकार करने के बारे में, और ​एलजीबीटी कानूनों में आए बदलावों के विषय में बात कर सकते हैं, तो हम यह भी जानते हैं कि ऐसे व्यक्ति बस भिन्न होते हैं, जो अलग-अलग रूप से उन्मुख हैं। वास्तव में मानसिक स्वास्थ्य इसी से जुड़ा है।"

संगठनों की ऐसे लोगों के लिए भी स्वीकृति होना जरूरी है जो काम तो कर सकते हैं, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं। इसके अलावा, मानसिक बीमारी वाले लोगों को एक ऐसा मौका देना, जिस कार्य को करने में वे सक्षम हैं। एक स्वस्थ कार्यस्थली तैयार करने में ऐसे लोगों को मनुष्य के रूप में पहचानने की जरूरत है।

संचार की कड़ियां स्पष्ट और खुली हों

एक अच्छी नौकरी की भूमिका और उम्मीदों में; केवल अपने काम के दायरे में आगे बढ़ने के लिए कर्मचारियों के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देना, उन्हें दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए संवेदनशील बनाने से उन्हें मानसिक रूप से खुश रखा जा सकता है। जब मैनेजरों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाता है कि वे उन लोगों, जो किसी संकट में हैं या परेशानी का सामना कर रहे हैं उनकी पहचान कर सहायता तलाशने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, तो यह दुर्घटनाओं की संभावना को कम करके, कार्यस्थल पर सहभागिता, खुशी, उत्पादकता और कर्मचारियों के हितों को बढ़ाकर सभी के लिए लाभदायक होता है।

इसके साथ ही, सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करना और अच्छा काम किए जाने पर लोगों की सराहना करना, एक स्वस्थ कार्यस्थल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

सीजीपी इंडिया की कार्यक्रम निदेशक,लिनेट नाज़रेथ के इनपुट के साथ। वह क्लाइंट-केंद्रित कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं,जो कर्मचारियों के शारीरिक,मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए कार्य एवं जीवन के बीच संतुलन,विविधता और समावेश,और कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखती हैं।