काश लोग अवसाद के बारे में यह जानते

अपर्णा वेमूरी

अवसाद क्या है, इस बारे में कई गलतफहमियाँ या पूर्वकल्पनाएं हैं। इसे अत्यधिक सूनेपन और चरम उदासीनता की भावना के रूप में माना जाता है। लेकिन अवसाद सिर्फ एक अनुभूति, भावना या मन की स्थिति नहीं है। मैं अवसाद को एक घने काले बादल के रूप में वर्णित करती हूं जो आपसे चिपकता है और आपसे अलग होने से इंकार कर देता है। ऐसे दिन थे जब मैंने खुद को संभाले रखा लेकिन चरम उदासी के साथ मूल्यहीनता और असहायता की भावना ने मुझे घेरे रखा था। यह तब तक चलता रहा जब तक मैंने एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से मदद मांगी जिसने मुझे अवसाद से मुक़ाबला करने में सहायता की। जब मैं उस समय की ओर देखती हूँ जब मैं अपने मन को समझने के लिए संघर्ष कर रही थी, मैं अक्सर सोचती हूँ कि अगर मेरे आस-पास के लोग मेरी बीमारी को समझ पाते तो चीजें आसान हो सकती थी। क्या इससे आरोग्य प्रक्रिया में तेजी आ सकती थी? क्या इससे मैं अवसाद से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकती थी? अवसाद को समझने के परिणामस्वरूप मैं यह स्पष्ट रूप से बता सकती हूँ कि कैसे हमारे आस पास के लोग मदद कर सकते हैं:

1। अदृश्य भावनात्मक चोटें: शारीरिक चोटों की तरह, भावनात्मक चोटों को ठीक होने में समय लगता है। लेकिन शारीरिक चोटों के विपरीत, वे अदृश्य हैं। अवसाद के प्रति भेद्य लोग भावनात्मक चोटों के प्रति भी भेद्य होते हैं।

2। समानुभूति प्राथमिक चिकित्सा है: परामर्श सत्र के दौरान समझे जाने का क्या एहसास होता हैं, मुझे इसका बोध हुआ। जब कोई वास्तव में यह समझ पाता है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं, तो यह मदद के कई दरवाजे खोल देता है। मनोवैज्ञानिक से प्राप्त समानुभूति से मुझे अवरुद्ध भावनाओं को व्यक्त करने में मदद मिली। इसने मुझे भावनात्मक चोटों से उबरने की ताकत दी।

3। आप इससे बाहर नहीं निकल सकते: अवसाद एक ऐसी चीज नहीं है जिसे लेकर आप रात को सोते हैं और अगली सुबह भूल जाते हैं। न ही जब चाहे आप इससे बाहर निकल सकते हैं।

4। इससे उबरने में समय लगता है: अवसाद एक बीमारी है और इसे अनदेखा करने से यह दूर नहीं होगा। मदद मांगने के बाद मुझे समझ में आया कि मेरे अवसाद की कई परतें थी। ऐसी कई परतों को मुझे आरोग्य की प्रक्रिया के दौरान उधेड़ना पड़ा और इसमें समय लगा।

5। यह आलसी होने के समान नहीं है: अवसाद की स्थिति में होना उस अनुभूति के समान नहीं है जो भारी भोजन के बाद महसूस होता है। अवसाद के कारण प्रेरणा की कमी महसूस होती है जिससे नियमित गतिविधियों, काम पर जाने, हंसने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होने लगती है। अधिक सटीक रूप में, अवसाद मानसिक क्षमताओं को चोट पहुंचाता है। ऐसी स्थिति में होना दर्दनाक है और यह बिल्कुल सुखद नहीं होता है। यह संभवतः अपराध की भावनाओं के साथ लेपित हो सकता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति वह करने में सक्षम नहीं हो पाता जो वह करना चाहता है। आलसी होने का विचार अपराधबोध को मजबूत करता है और इसे और भी बुरा बनाता है।

6।इसे समझना और सकारात्मकप्रोत्साहन प्रदान करना: मेरी बीमारी के बावजूद मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे स्वीकार किया जिससे मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक से प्राप्त सहायता को सकारात्मक मजबूती मिली।

7। मूल्यहीनता,निराशावाद और विवशता का चक्र: अवसाद के अनुभव का मतलब है कि पीड़ित को विवशतापूर्ण उदासी महसूस होती है। जब किसी के भीतर अवसाद का यह काला बादल होता है, तो यह उसके स्वयं, दुनिया और भविष्य को देखने के नज़रिये को नियंत्रित करता है। ऐसी स्थिति में, पीड़ित किसी पर भी भरोसा करने और विश्वास करने में असमर्थ रहता है, जो अक्सर मूल्यहीनता, निराशावाद और विवशता के दुष्चक्र का कारण बनता है।

8। देखभाल और समर्थन प्रदान करना: परामर्श करने वाले मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक के देखभाल और सहायता से मुझे मेरी स्थिति में काफी अंतर महसूस हुआ। उन्होंने मुझे मेरी भावनाओं को खुल कर व्यक्त करने में सहज महसूस करवाया, बिना कोई धारणा बनाये। इससे मुझे आशा मिली और मुझे विश्वास करने का मौका दिया।

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