मैं अपने छात्र को परामर्शदाता के पास कब भेजूं?

शिक्षक परामर्शदाता से पहले छात्र की समस्या को समझने वाले होते हैं

कॉलेज के छात्र को पढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासतौर पर ऐसे में जबकि कॉलेज के समय छात्र स्वयं को युवा-वयस्क में ढाल रहे होते हैं, और अक्सर अपनी नई भूमिका को अपनाने के लिए कौतुहल होते हैं।  यह अवस्था बहुत सारा भ्रम पैदा करती है जो कि कक्षा या कैंम्पस के परिवेश में समस्या भरे व्यवहार के रूप में दिखाई पड़ती है। 

जब छात्र शारीरिक चोट से पीड़ित होता है तो शिक्षक घाव को कीटाणुग्रस्त होने से बचाने हेतु जल्दी से प्राथमिक चिकित्सा का उपयोग करता है।  समान रूप से, भावनात्मक चोट जैसे कि विफलता, परीक्षा का भय, समकक्षों में अस्वीकार, लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थता के कारण दोषभावना, और आत्म-सम्मान की क्षति को छात्र की भावनात्मक संपन्नता को बनाए रखने हेतु संबद्ध भावनात्मक प्राथमिक चिकित्सा के उपयोग से हो सकता है। 

ऐसे मामलों में जहाँ छात्र की समस्या का महत्व कम हो जैसे कि परीक्षा की विफलता से जुड़ी समस्या, अध्ययन के विषय को समझने में समस्या, शैक्षणिक दबाव, पेशानुकूल उन्मुखीकरण, कक्षा में छेड़-छाड़ आदि, शिक्षक उनकी भावनात्मक चोट का इलाज ऐसे कर सकते हैं:

  • सहारा देने योग्य होना और जिस छात्र को मदद की जरूरत है, उसे सहायता का प्रस्ताव रखना जैसे कि समय का प्रबंधन या अध्ययन समय-सारणी तैयार करना
  • छात्र को उनके भविष्य की योजना बनाने में लगा देना
  • शैक्षणिक सुधार को स्वीकार कराना
  • पेशे हेतु लक्ष्य तय करने में उनका मार्गदर्शन करना
  • समकक्षों के साथ मेल-जोल को बढ़ाने के लिए गतिविधियों का निर्माण करके प्रोत्साहित करना जिसमें छात्रों का समूह शामिल होता हो, जहाँ वे सफलता हेतु एक-दूसरे पर विश्वास करते हों
  • समकक्षों के बीच आदरपूर्ण संचरण विकसित करने के लिए सुअवसर का निर्माण करना

तथापि, जब शिक्षक किसी ऐसे छात्र से मिलता है जिसकी समस्या पर प्रशिक्षित परामर्शदाता द्वारा ध्यान देने की जरूरत है, वे धीरे से कॉलेज के परामर्शदाता को बातचीत में शामिल करने के विचार के बारे में बता सकते हैं।  यह ऐसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण हो सकता है जिसमें तंग करना, पदार्थों पर अवलंबन होना, लैंगिक दुर्व्यवहार या आत्महत्या के विचार शामिल होते हैं।  ऐसे मामलों में, शिक्षक उन्हे किसी परामर्शदाता के पास भेजने से पहले भावनात्मक प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर सकते हैं जैसे कि:

  • साझा की जा रही समस्या को सक्रिय रूप से सुनना और छात्र के विचारों के प्रति संवेदनशील रहना।
  • सहानुभूति तथा समर्थन व्यक्त करने हेतु वाक्यों का उपयोग करना जैसे कि “मैं समझता हूँ”, “यह तुम्हारे लिए काफी मुश्किल रहा होगा”।
  • गोपनीयता बनाएँ रखना; सहकर्मी या छात्रों के समकक्षों के साथ छात्र के मामले को साझा करने से बचना।
  • छात्र के प्रति प्रतिक्रिया देने, आंकने या डांटने से बचना।

कुछ छात्र कॉलेज के परामर्शदाता से बातचीत करने के विचार के प्रति ग्राही नहीं हो सकते हैं।  ऐसी परिस्थितियों में, अपनी चिंताओं को परामर्शदाता के साथ यह देखने के लिए साझा करें कि यदि वे छात्र का विश्वास जीतने के लिए अनौपचारिक बीच-बचाव कर पाएंगे या नहीं। 

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