किशोरवय मस्तिष्क के अंदर

मैं इस तरह क्यों महसूस करता हूं? मैं अपनी भावनाओं को क्यों नहीं समझ पाता हूं? दूसरे लोग मेरे कामों को क्यों नहीं समझ पाते हैं? बड़े लोग अचानक मेरे साथ अलग व्यवहार क्यों कर रहे हैं? मैं खुद पर नियंत्रण क्यों नहीं कर पाता हूं? क्या यह मैं ही हूं?  या ये सब भी वही हैं? मैं किससे पूछूं? मैं क्या करूं? किसी पर भी भरोसा करना मुझे मुश्किल लगता है ...

किशोर के रूप में, क्या आपके पास ऐसे प्रश्न हैं? आइए इन सवालों में से कुछ का जवाब दें, ताकि आप खुद को बेहतर तरीके से समझ सकें।

मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या हो रहा है। मैं इतना भ्रमित क्यों हूं?

सिर्फ आप ही ऐसे नहीं हैं, किशोरावस्था के हर लड़के-लड़की को इसी तरह के भ्रम और निराशा का अनुभव होता है। आप अपने हार्मोन्स और इस चरण के दौरान आपके दिमाग के विकास के कारण के कारण इन भावनाओं का अनुभव कर सकते हैं। आपकी स्थिति को समझने में मदद की जा सकती है और यह बदलाव आपके लिए आसान बनाया जा सकता है।

विकास के इस चरण के दौरान,  सिर्फ आपका शरीर ही नहीं बल्कि आपका दिमाग भी बदल रहा है। हालांकि आमतौर पर माना जाता है कि मस्तिष्क का बड़ा विकास छः वर्ष की उम्र तक होता है, पर उम्र के शुरुआती बीसवें वर्ष तक मस्तिष्क विकसित होता रहता है। किशोरावस्था का चरण मस्तिष्क के उन हिस्सों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवधि है जो तार्किक सोच, बुद्धि का विवेक, निर्णय, योजना, कार्यों का निष्पादन और अन्य उच्च मानसिक प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

चलिए, किशोरावस्था के दौरान मस्तिष्क में होने वाले विभिन्न बदलावों को जानते हैं।

हार्मोनल बदलाव

आपने बड़े लोगों से किशोरों के व्यवहार के लिए हार्मोन्स के बारे में बात करते सुना होगा। आप  पहले से ही जानते होंगे कि एक बार जब आप युवावस्था प्राप्त करते हैं, तो यौन हार्मोन्स पहले की तुलना में बड़ी मात्रा में स्रावित होने लगते हैं, जिससे आप पल-पल के निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, इसके अतिरिक्त ये हार्मोन्स और भी कुछ करते हैं।

मस्तिष्क का अधिकांश विकास नींद के दौरान होता है जब नए कनेक्शन बनते हैं और यादें मजबूत होती हैं। पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा विकास के हार्मोन्स जारी किए जाते हैं और इस प्रकार नई समझ विकसित करने में नींद बहुत महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, इस चरण के दौरान नींद चक्र काफी हद तक गड़बड़ा जाता है।

हमारी नींद दो हार्मोन्स द्वारा नियंत्रित होती है: कोर्टिसोल और मेलाटोनिन। कोर्टिसोल हमें जागने में मदद करता है, जबकि मेलाटोनिन हमें सुलाता है। नींद पर किए गए अनुसंधान हमें बताते हैं कि वयस्कों में, मेलाटोनिन रात लगभग 10 बजे स्रावित किया जाता है। हालांकि, किशोरों के लिए, यदि वे ऐसा कुछ करने में व्यस्त हैं, जिसमें उनका बहुत ध्यान लगा हुआ होता है, तो मेलाटोनिन की रिहाई में देरी हो सकती है । यह आंशिक रूप से सांस्कृतिक कारण भी हो सकता है (यदि साथियों के साथ आपकी पार्टी देर चलती हो), लेकिन जैविक रूप से इसके लिए मेलाटोनिन का देरी से स्रावित होने को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अगर आपको सुबह जल्दी स्कूल या कॉलेज जाना है, तो आप चिड़चिड़ाहट महसूस कर सकते हैं और कम सचेत महसूस कर सकते हैं क्योंकि आपने पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं ली है।

आपके शरीर और मस्तिष्क दोनों के विकास के लिए कम से कम छह घंटे पूरी तरह आराम से नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है। अपने दिन को इस तरह से निर्धारित करें कि आप न केवल अपनी पढ़ाई और मनोरंजन के लिए समय निकालने में सक्षम हों, बल्कि अच्छी तरह से सो भी सकें। आप अपने समय को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद के लिए माता-पिता या किसी बुजुर्ग की मदद ले सकते हैं।

प्रीफ्रंटल लोब का विकास

प्रीफ्रंटल लोब मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो सभी प्रकार के तर्कसंगत निर्णयों के लिए ज़िम्मेदार है। यह किसी विशेष कार्रवाई, निर्णय, तर्क,  आवेग नियंत्रण या प्रतिबंधित व्यवहार आदि से जुड़े जोखिम के आकलन में शामिल है। वयस्कों में, मस्तिष्क का यह हिस्सा पूरी तरह से विकसित होता है और यह मस्तिष्क के अन्य सभी भागों से जुड़ा हुआ रहता है। इससे वयस्क मस्तिष्क पूरे रूप में काम करता है, सभी क्षेत्रों से जानकारी एकीकृत करता है और समझबूझ के फैसले लेता है। किशोरों में, यह हिस्सा अभी भी विकासशील स्थिति में रहता है और उम्र के शुरुआती बीसवें पड़ाव के दौरान भी जारी रहता है।

संरचनात्मक विकास के अलावा, यह पूरी तरह से क्रियाशील भी नहीं है - यह वयस्क मस्तिष्क की तरह से जितनी जल्दी हो सके जानकारी नहीं पहुंचा पाता है। यह न्यूरॉन्स की वजह से है। न्यूरॉन्स वे कोशिकाएं हैं जो मस्तिष्क के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जानकारी पहुंचाती और उन्हें व्यक्त करती हैं। वे मायेलिन शीथ नाम की एक इन्सुलेटिंग सामग्री से ढकी होती हैं जो बिना माइलिन शीथ के न्यूरॉन्स की तुलना में सौ गुना तेजी से जानकारी का संचरण करती हैं। जैसा कि आपको मालूम होगा कि  न्यूरॉन्स अभी भी आपके मस्तिष्क में इस भराई को विकसित कर रहे हैं। इसी कारण सूचना का संचरण धीमा है और आवेग की मात्रा बहुत अधिक है।

न्यूरॉन्स का मायेलिनेशन सबसे पहले मस्तिष्क के पिछले हिस्से से शुरू होता है, जो भावनाओं और आवेग के लिए जिम्मेदार होता है जिससे किशोर 'कम सोचना, ज्यादा महसूस करना' की स्थिति में होते हैं। यह आपको भावनात्मक रूप से अतिसंवेदनशील बनाता है और बार-बार मूड बदलने की आवृत्ति अधिक होती है। ये भावनाएं बच्चे के रूप में होने वाली भावनाओं के मुकाबले काफी तीव्र होती हैं। अक्सर आपको बहुत अभिभूत कर देती हैं। यह आपको तर्क के बजाय भावनाओं के आधार पर आवेगपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी अधिक प्रेरित करता है।

इस समस्या से निपटने का तरीका अचानक निर्णय लेने वाला नहीं होना चाहिए और कोई भी निर्णय लेने से पहले इसके अच्छे और बुरे पहलुओं पर विचार करना होगा। आप किसी ऐसे व्यक्ति से भी बात कर सकते हैं जो इस प्रक्रिया में आपकी मदद करेगा। यह सुनिश्चित कर लें कि जिस व्यक्ति पर आप विश्वास जता रहे हैं वह एक अन्य किशोर या किशोरी नहीं है जो स्वयं भी आप ही की तरह बदलावों से गुजर रहे हैं। मदद लेने के लिए आपके माता-पिता, बड़े भाई-बहन, शिक्षक या अन्य सलाहकार हो सकते हैं।

सिनैप्टिक छंटाई

आपके मस्तिष्क में सिर्फ कनेक्शन की गुणवत्ता ही नहीं बदल रही, बल्कि उन कनेक्शनों की संख्या में भी बदलाव हो रहा है। जैसे ही आप अपनी किशोरावस्था में आगे बढ़ते हैं, वास्तव में, कनेक्शनों की संख्या कम हो जाती है। यदि 5 वर्ष की आयु में आपके पास मस्तिष्क के एक हिस्से में 15 कनेक्शन थे, तो किशोर के रूप में आपके पास केवल 2 होंगे। ये दो सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले कनेक्शन हैं और जो काम नहीं आ रहे वे कनेक्शन कट जाते हैं। ये कनेक्शन पहले पंद्रह कनेक्शन से अधिक मजबूत हैं। इससे दिमाग में आसानी से जानकारी संचारित हो सकती है और विचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और संगठित हो जाती है।

प्रमस्तिष्क खंड और अंग प्रणाली

कभी सोचा कि शराब पीने के लिए कानूनी उम्र 21 क्यों है? यह पता लगाने के लिए पढ़ें।

प्रमस्तिष्क खंड और अंग प्रणाली ही भावनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। मस्तिष्क का यह हिस्सा प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स से पहले विकसित होता है। भावनाओं की पहचान करने में प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि आपको लगता है कि भावनात्मक परिस्थितियों को पहचानना या संभालना मुश्किल है। यह मस्तिष्क का आनंद और प्रतिफल का मजा दिलाने वाला क्षेत्र भी है। यह पूरी तरह से विकसित होता है, जबकि मस्तिष्क का जोखिम मूल्यांकन करने वाला हिस्सा अभी भी विकसित हो रहा होता है। इसी वजह से आप दवाओं, शराब और असुरक्षित रेसिंग जैसे खतरनाक व्यवहार के जरिए मनोवैज्ञानिक मजा लेने के लिए प्रवृत्त होते हैं।

शराब के सेवन के लिए कानूनी उम्र 21  है क्योंकि आपका मस्तिष्क अभी भी विकास की प्रक्रिया में है और ऐसा कोई भी पदार्थ इस प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इस उम्र में बहुत ज्यादा पीना आपको इसकी लत लगाने के लिए कमजोर बना सकता है।