देखभाल करना

देखभाल करने वालों को भी देखभाल की ज़रूरत है

डॉ. अनिल पाटिल

दूसरों की देखभाल करने वाले ज्यादातर लोग अनौपचारिक रूप से यह काम करते हैं, एक ऐसी भूमिका जो  परिस्थितियों के कारण उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करती है। इस काम की प्रकृति को देखते हुए उनके लिए सेवा करवाने वाले व्यक्ति की कुशलता ही सर्वोपरि है। उन्हें खुद की देखभाल के लिए सोचने का वक्त ही नहीं मिल पाता है। दरअसल, देखभालकर्ता को स्वयं की देखभाल के लिए समय निकालने में भी अपराध की भावना महसूस हो सकती है।

हमारे अनुसंधान ने पहले से ही देखभाल की भूमिका से जुड़े तनावों पर ध्यान दिया है, साथ ही देखभाल करने वालों को अतिरिक्त सहयोग की कमी के कारण दिनरात के काम से आराम नहीं मिल पाता है। हालांकि, यह ठीक उसी तरह से है कि समर्थन की कमी के कारण देखभालकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जो देखरेख कर रहे हैं, उसे बनाए रखने में सक्षम हैं, और इसके लिए स्वयं की सहानुभूति एवं खुद की देखरेख की आवश्यकता होती है।

स्वयं की अच्छी देखभाल के 10 गुण:

1. व्यक्ति की स्वयं की दैनिक स्वच्छता दिनचर्या - शरीर और दिमाग को यह संकेत देना कि कि उनकी भी परवाह की जाती है

2. भोजन से बिना चूके स्वस्थ आहार - यह चिरकालिक थकान और कुपोषण से बचने में मदद करता है

3. पर्याप्त पानी पीते रहना - इस पर ध्यान केंद्रित करने से यह शरीर को निर्जलीकरण से बचाने एक प्रकार का संदेश भेजता है।

4. व्यायाम - अगर देखभालकर्ता बीच में एक विराम ले सकता है या एक दिन में केवल 10 मिनट के लिए सहारा मांग सकता है, तो शांत होकर तेज चलना एक टॉनिक हो सकता है। समीप में एक योगाभ्यासी को ढूँढना फायदेमंद साबित हुआ है। अगर सेवा करवाने व्यक्ति को छोड़ना संभव नहीं है, तो घर पर किया जाने वाला प्राणायाम या ध्यान देखभाल के बोझ को दूर करने में सहायता कर सकता है।

5. रोज़मर्रा के सामाजिक दायरे से संपर्क में रहें – संपर्क कितना संक्षिप्त है कोई बात नहीं, इसे यथासंभव बनाए रखा जाना चाहिए। जो कुछ भी बाहर हो रहा है उसकी जानकारी घर और सामाजिक जीवन को संतुलित कर सकती है।

6. बातचीत - यदि लोग एक देखभालकर्ता को होने वाली परेशानियों को नहीं समझते हैं, तो वे मदद की पेशकश नहीं करेंगे, लेकिन अगर वे इसे समझते हैं, तो सहायता प्रदान कर सकते हैं।

7. अन्य देखभालकर्ताओं के साथ संपर्क करें - मन में दबी भावनाओं और चिंताओं को दूर करने में समर्थकों की मंडली बड़ा सहारा साबित हो सकती है।

8. भावनात्मक सहारा - देखभालकर्ता को यह जानना होगा कि अवसाद या हताशा कि स्थिति में किसी चिकित्सक या किसी अन्य पेशेवर से बात करना पूरी तरह से ठीक है। मदद के लिए पूछना कमजोरी का संकेत नहीं है

9. परिवेश में बदलाव - जहां तक संभव हो, देखभाल करने वाले और सेवा करवाने वाले दोनों के लिए छोटी यात्राएं फायदेमंद हैं। यहां तक कि यदि देखभालकर्ता के पास एक घंटे का भी फुर्सत का समय है, तो वह अपने किसी दोस्त से मिल सकता है, घूम-फिर सकता है  या फिर एक अलग परिवेश में बैठकर आराम कर सकता है

10. पर्याप्त मात्रा में नींद – दिनभर में छूटा हुआ काम शाम के समय करना एक अच्छा समय हो सकता है। लेकिन देर रात तक इसे निपटाने की परिणति स्थाई थकान पैदा कर सकती है।

विशेषकर उन देखभालकर्ताओं के लिए, जो अपराध भावना से पीड़ित हैं, उन्हें यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वयं की देखभाल एक व्यक्तिगत विलासिता नहीं है, बल्कि यह उनकी भूमिका के लिए महत्वपूर्ण है। खुद की मदद कर, वे दूसरों की ही मदद कर रहे हैं। अगर देखभालकर्ता को मध्यम से लंबी अवधि तक देखरेख करने वाले की भूमिका निभाने में सक्षम होना है और 'देखभाल के कार्य में अक्रियाशील होने' से बचना है तो उन्हें खुद का ख्याल रखना चाहिए।

डॉ. अनिल पाटिल केयरर्स वर्ल्डवाइड के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं। केयरर्स वर्ल्डवाइड संस्था अवैतनिक देखभालकर्ताओं द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालती है और उन्हें सुलझाने का प्रयास करती है। सन् 2012 में स्थापित और ब्रिटेन में पंजीकृत यह संस्था विशेष रूप से विकासशील देशों में देखभाल करने वालों के साथ काम करती है। इस स्तंभ में डॉ पाटील के साथ रूथ पाटिल सह लेखक हैं, जो केयरर्स वर्ल्डवाइड संस्था के स्वयंसेवक हैं। अधिक जानकारी के लिए आप केयरर्स वर्ल्डवाइड पर लॉग ऑन कर सकते हैं। आप लेखकों को columns@whiteswanfoundation.org पर लिख सकते हैं

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