अत्यधिक खाने का विकार यानी बिन्ज-ईटिंग डिसऑर्डर

अत्यधिक और ज़रूरत से ज़्यादा खाते रहने का विकार क्या है?

हम लोग समय समय पर अपना पेट भरते ही रहते हैं. कभी हम रिश्तेदारों के पास जाते हैं और वहां टेबिल पर अपना पसंदीदा व्यंजन देखते हैं, कभी हम बुफ़े में शानदार व्यंजनों की कतार देखते हैं और कभी हम सिर्फ़ इसलिए बहुत ज़्यादा खाते हैं क्योंकि हम सोचते हैं कि हम बहुत भूखे हैं. भोजन हमारी ज़िंदगियों के केंद्र में है और अच्छा भोजन हमें प्रसन्न रखता है इसलिए ये स्वाभाविक है कि कभी कभी कोई ज़रूरत से ज़्यादा खा सकता है. लेकिन कुछ लोगों में नियमित रूप से खाते रहने की एक बाध्यकारी तीव्र इच्छा होने लगती है. ऐसे मौकों पर वे नियंत्रण के अभाव का अनुभव करते हैं और रुकने में असमर्थ होते हैं. वे पेट भर जाने के बाद भी खाते ही चले जाते हैं जबतक कि ऐसे बिंदु पर न पहुंच जाए जहां उन्हें उल्लेखनीय परेशानी होने लगती है. ऐसे लोग अत्यधिक खाते रहने की बारी से पीड़ित होते हैं, इसे ही बिन्ज ईटिंग डिसऑर्डर भी कहा जाता है.

इस विकार से पीड़ित व्यक्ति तनाव, घबराहट या अन्य भावनात्मक मुद्दों से निपटने के एक तरीके के रूप में खाने का इस्तेमाल करने लगता है. लेकिन अत्यधिक खा लेने की अपनी अनियंत्रित दशा से उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है और उसके बाद वे और खराब महसूस करते हैं. समय पर इलाज के ज़रिए, इस विकार से छुटकारा पाया जा सकता है और स्वस्थ खानपान बहाल किया जा सकता है.

नोट:  ब्युलिमीआ से पीड़ित लोगों में भी बिन्ज ईटिंग की प्रवृत्ति होती है. लेकिन वे इसकी क्षतिपूर्ति के रूप में उल्टी कर देते हैं यानी जो खाया है उसे निकाल देते हैं या बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ आदि करने लगते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ब्युलिमीआ से पीड़ित लोगों में पतला होने की इच्छा रहती है और छवि और रूप को लेकर उनके मन में गलत धारणाएं आ जाती हैं. बिन्ज ईटिंग विकार वाले लोगों में अपनी छवि को लेकर कोई मसला नहीं होता है, वे सिर्फ़ इसलिए ज़्यादा खाते हैं क्योंकि इसमें वे अपने भावनात्मक तनाव से निपटने का ज़रिया खोजते हैं.

बिन्ज ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण क्या हैं?

इस विकार के सबसे आमफ़हम लक्षण इस तरह से हैं:

  • बहुत बड़ी मात्रा में तेज़ी से खा लेना और खाने से खुद को रोक न पाने में असमर्थता महसूस करना.

  • मरीज़ का दूसरों के साथ भोजन न करना क्योंकि अपनी आदत से शर्मिंदगी महसूस होती है और लगता है कि इस पर उसका बस नहीं. उसमें खाना छिपा लेने की आदत भी आ जाती है कि जब भी मौका मिले अकेले में खा ले.

  • वे पाते हैं कि तनाव और घबराहट के समय सिर्फ़ खाने से ही उन्हें राहत मिलती है. लेकिन बहुत ज़्यादा खा चुकने के बाद उनमें शर्मिंदगी की भावना घर कर जाती है.

  • पेट भर जाने के बाद भी वे खाते ही चले जाते हैं, जब तक कि उनकी हालत असहज न हो जाए.

  • वे बिना किसी उचित आहार समय के, दिन भर लगातार खाते रह सकते हैं.

बिन्ज ईटिंग डिसऑर्डर की वजह क्या है?

इस विकार की एकदम सटीक वजह का पता नहीं चल पाया है और ये आमतौर पर भावनात्मक, मनोवैज्ञिक और पर्यावरणयी मुद्दों के मिलेजुले प्रभाव से उत्पन्न स्थिति है. अवसाद और घबराहट जैसे अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति में ये विकार पैदा हो सकता है. ऐसे लोगों में ये विकार पैदा होने की आशंका ज़्यादा रहती है जो अपनी नकारात्मक भावनाओं या तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए खाने का सहारा लेते हैं. बचपन के विभिन्न अनुभवों से भी व्यक्ति में ये विकार आने की आशंका रहती हैः अगर आपके अभिभावक आपकी किसी उपलब्धि पर आपको दावत देते हैं या उदास होने पर आपको आपका पसंदीदा खाना या चॉकलेट आदि देते हैं तब ये आशंका है कि आगे चलकर आपमें जीवन की नकारात्मक स्थितियों के आने पर खाने का सहारा लेने की भावना आ जाए. बचपन की अन्य नकारात्मक घटनाएं जैसे शारीरिक शोषण या हिंसा का शिकार भी एक कारण हो सकता है. इसके अलावा, मनोवैज्ञानिक कारण भी होते हैं जैसे आत्म सम्मान में कमी से भी इस तरह का विकार पैदा हो सकता है.

विकार का इलाज

ज़रूरत से ज़्यादा खाने के इस विकार के उपचार में प्रमुख रूप से मनोवैज्ञानिक थेरेपी शामिल है जिसमें, तनाव से उबरने के लिए ज़्यादा खाने की आपकी प्रवृत्ति को ठीक किया जाता है. विशेषज्ञ इसके लिए संज्ञानात्मक व्यवहारजन्य थेरेपी (सीबीटी), अंतर्वैयक्तिक साइकोथेरेपी और द्वंद्वात्मक व्यवहारजन्य थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं. इन थेरेपियों का लक्ष्य होता है, भोजन पर आपकी निर्भरता को समझकर उसकी ज़रूरत संतुलित करना, खाने और वजन को लेकर आपमें स्वस्थ विचारों की बहाली करना और तनाव पैदा करने वाली स्थितियों से निपटने के लिए आप बेहतर विधियां विकसित कर सकें, इसमें आपकी मदद करना.

लगातार ज़रूरत से ज़्यादा खाते रहने की वजह से अगर आपका वजन ज़्यादा है यानी आप ओवरवेट हैं तो आपको वजन घटाने वाले कार्यक्रम के ज़रिए मदद दी जाएगी और सही वजन बनाए रखने के लिए खानपान के सही अभ्यास बताए जाएंगें. अगर आपमें अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिनसे आपके खाते रहने की तीव्र इच्छा भड़क उठती है तो आपको उन समस्याओं के लिए दवाएं भी दी जा सकती हैं.

विकार से पीड़ित व्यक्ति की देखरेख

अगर आपने ये नोटिस किया है कि आपका कोई दोस्त या प्रियजन ज़रूरत से ज़्यादा खाते रहने के लक्षण दिखा रहा है तो ये महत्त्वपूर्ण है कि आप उनसे इस बारे में बात करें. आपको लग सकता है कि आप उनके मामले में बेकार दखल दे रहे हैं और वे आपकी बात से नाराज़ हो जाएंगे या अपने विकार की बात से ही इंकार कर देगें. लेकिन इन सब बातों का आप पर कोई असर नहीं होना चाहिए. ज़बर्दस्ती मत कीजिए, अपनी राय मत थोपिए. मददगार बने रहिए और उन्हें ये भरोसा दिलाइये कि अगर वे बात करना चाहते हैं तो आप उनके लिए उपलब्ध हैं. उन्हें मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित कीजिए और अगर उन्हें कोई झिझक है तो डॉक्टर के पास उनके साथ आप भी चले जाइये. अगर वो आपसे खुल कर बात कर सकें तो ये ज़रूरी है कि आप सिर्फ़ उनकी बात सुनें, उन्हें सलाह देने की कोशिश मत कीजिए या उन्हें उनकी हालत के बारे में ग्लानि मत महसूस कराइये. ये भी अनिवार्य है कि उचित खानपान की आदतों, रूटीन, व्यायाम आदि के मामलों में आप उनके सामने एक सही उदाहरण पेश करें. उन्हें ये विश्वास दिलाने की कोशिश कीजिए कि अन्य लोग भी यही करते हैं और उनके सामने खाने, डाइट, वजन आदि की बातें करने से परहेज़ कीजिए.

बिन्ज ईटिंग विकार से निबाह

ज़्यादा खाने के विकार से जुड़ी असहायता और ग्लानि आपके लिए अत्यधिक तनावपूर्ण बन सकती है लेकिन ये जानना महत्त्वपूर्ण है कि इसका उपचार संभव है और सही मदद के ज़रिए आप इस तरह की तीव्र इच्छाओं से छुटकारा पा सकते हैं. एक बार आप अपनी समस्या के लिए मदद हासिल करते हैं तो ये भी सुनिश्चित कीजिए कि उपचार को न छोड़ें और अपनी स्थिति के बारे में लगातार डॉक्टर या थेरेपिस्ट को अपडेट करते रहे. तनाव के समय पर के लिए आपके पास दोस्त या परिजन होने चाहिए जिनपर आपको भरोसा हो. अगली बार आपको ज़्यादा खाने की इच्छा हो तो वे मदद कर सकते हैं. जब आप उदास हों तो अपना ध्यान बंटाएं, किसी गतिविधि को हाथ में लें, सैर करने निकल जाएं या किसी से बात कर लें. दिमाग को व्यस्त रखने और ध्यान आदि के अभ्यास से भी आपको अपने मूड को नियमित करने में मदद मिल सकती है.