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शारीरिक कुरूपता विकार क्या है (बीडीडी)?

राजेश, एक 28 वर्षीय पेशेवर जानी-मानी कंपनी में काम करता है।  वह अविवाहित है और उसकी एक बड़ी बहन है।  उसके माता-पिता दोनों नौकरीपेशा हैं और अपने बच्चों से हमेशा अच्छे की प्रत्याशा की है।  राजेश हमेशा अपनी परिपूर्णता के लिए स्कूल, कॉलेज तथा कार्यस्थल में सराहा गया।  अनेक तरह के कार्यों को करने की क्षमता के लिए उसको प्रशंसा प्राप्त हुई और वह अपने आप पर गर्व महसूस करता है।  शैक्षिक में सफल रहने के बावजूद, वह खेल-कूद में कभी भी भाग नहीं लेता था और “बेवकूफ” तथा शिक्षक का प्रिय होने के कारण अक्सर चिढ़ाया जाता था।  वह कभी-कभी अपने शरीर को लेकर चिंतित रहता था क्योंकि वह बहुत लंबा और दुबला था।  उसके बाद, वह सोचने लगा कि उसके माथे और कानों के आकार में कुछ गलत है और शीशे के सामने खड़े होकर अपने को देखता रहता।  जब कार्यालय में होता तो वह यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसका हेयर-स्टाइल, उसके माथे और कानों को ढ़क रहे है बाथरुम का उपयोग बार-बार करता।  वह डॉक्टर से कई बार मिला, पर अपने विचार को अपने परिवार या डॉक्टर को समझा नहीं पाया।  वह उदास हैं क्योंकि कोई उसकी बातों से सहमत नहीं है।  उसकी इस ग्रस्तता के कारण कार्य भी प्रभावित हुए।  उसने जैसे-तैसे अपने परिवार को एक शल्य-चिकित्सक के पास साथ आने के लिए राज़ी कर लिया जिसने उन्हे एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर के पास परामर्श हेतु जाने की सलाह दी।

इस काल्पनिक कथा को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के स्थान पर रखकर इस विकार को समझने में सहायता करने हेतु रचा गया है।

हम में से कई लोगों को अपने शरीर को लेकर कोई न कोई समस्या होते हैं; कुछ लोग हैं जो अपने शरीर और शारीरिक आकार से पूरी तरह से खुश है।  कुछ लोग लंबे, कुछ नाटे रहना पसंद करते हैं, कुछ मांसल शरीर या मोटे बाल को रखना पसंद करते हैं।  परंतु कुछ लोगों को, ऐसा जुनून हो जाता है  कि वे अपनी शारीरिक छवि तथा आकार को लेकर मनोग्रंथित हो जाते हैं।  वे स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल में जाने से भी बचने की कोशिश करने लगते हैं।

शारीरिक कुरूपता विकार (बीडीडी) एक नैदानिक अवस्था है जिसमें एक व्यक्ति अपनी अपूर्णता या दिखावट के बारे में माने गए दोष या कोई विशिष्ट लक्षण जैसे कि नाक, रंग, कान, होठों पर लगातार विचार करने का अनुभव करता है।  आईने में अपूर्णता को लेकर बार-बार जांचना या परिवार तथा दोस्तों को आश्वासन हेतु पूछना, कथित विरूपण से वे इतने बेचैन हो जाते हैं कि वे सामाजिक मेल-जोल से बचना शुरु कर देते है।  कई व्यक्तियों में, यह इतना तनावपूर्ण होता है कि सर्जरी भी उनको अपने ऊपर की धारणा को बदलने नहीं देने के बावजूद वे सुधारात्मक सर्जरी पर जोर देना शुरु कर देते हैं।

हालांकि ऐसे लोग हैं जिनके शरीर में वास्तविक विरूपण होते हैं, कुछ लोग हैं जिनके शरीर में कोई स्पष्ट विरूपण नहीं है, परंतु किसी एक विशिष्ट लक्षण को लेकर वे असंतुष्ट होकर चिंता करते हैं।

बीडीडी के संकेत और लक्षण क्या हैं?

  • कथित रूप से विकृत शारीरिक लक्षण के बारे में दोहराया गया विचार
  • विरूपता को लेकर प्रबल रूप से बेचैन रहना
  • अपनी छवि को बार-बार आईने में जांचना
  • विरूपता के बारे में अपने प्रियजनों से बारंबार आश्वासनों की जरूरत कि वे ठीक ठाक हैं
  • स्वयं के बारे में अवसाद भरे विचार
  • असामान्य रूप से बारंबार संवरना
  • अक्सर गुस्सा और कुंठाग्रस्त होना
  • नकारात्मक शारीरिक छवि समस्याएँ
  • किसी भी चीज़ में ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता के कारण स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल में समस्या
  • कथित विरूपता के कारण सार्वजनिक स्थानों में जाने के लिए भय या शर्मिंदा महसूस करना
  • गंभीर मामलों में, कथित विरूपता को लेकर दुनिया से सामना करने में असमर्थता के कारण व्यक्ति में आत्महत्या के विचार आ सकते हैं

कुरूपता विकार के कारण क्या हैं?

कई मानसिक स्थितियों की तरह, बीडीडी के किसी एक कारण की तरफ संकेत करना कठिन है।  तथापि, व्यक्ति को बीडीडी के प्रति बढ़ने के कुछ कारक हैं जो प्रभाव डालते या अधिक संभावना पैदा करते हैं।

  • छेड़-छाड़ का अनुभव: परिवार तथा दोस्तों के बीच, विशेष रूप से दिखावट के बारे में, छेड़-छाड़ करना या नाम से पुकारना, हमारे समाज में काफी आम बात मानी गई है।  किसी को लंबू (हिन्दी में लंबा) या डुम्मा (कन्नड़ में मोटा कहना) कहकर पुकारना दुर्भाग्य से मज़ेदार बात मानी जाती है।  परंतु दोस्तों और परिवार के सदस्यों की तरफ से व्यक्ति की शारीरिक बनावट के बारे में आलोचना, नकारात्मक आत्म छवि और असंतुष्टि पैदा करने में योगदान दे सकती है।
  • नकारात्मक आत्म-छवि और आत्म-सम्मान की कमी: यह अत्यधिक संवरने, जिम में अत्यधिक व्यायाम करने, ज़्यादा खाने या कम खाने को जाहिर कर सकता है।
  • व्यक्तित्व कारकों जैसे कि उच्च स्तर का पूर्णतावाद, जो अन्य व्यग्रता विकार से जुड़ा है।

शोधकर्ताओं ने अब पहचान की हैं कि बीडीडी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के बड़े वर्णक्रम का भाग है जिसे मनोग्रंथित बाध्यकारी विकार (ओसीडी) और संबंधित विकार कहते है। अत:, आनुवंशिक या जैविक कारक, जो एक व्यक्ति को ओसीडी की चपेट मे ला सकता है बीडीडी को भी विकसित होने में योगदान दे सकता है।  संस्कृति और मीडिया भी शारीरिक छवि एवं अनुभूति को अनुचित महत्व देने में भूमिका निभाता है।

शारीरिक कुरूपता विकार के लिए चिकित्सा

बीडीडी के चिकित्सा के लिए कई प्रकार के अन्त:क्षेप उपलब्ध हैं।  यदि व्यक्ति ऐसे लक्षणों का अनुभव करता है जो स्वभाव में गंभीर होते हैं, जैसे कि अवसाद या आत्महत्या के विचार, चिकित्सा का पहला स्तर इलाज होगा।  एक और प्रभावशाली अन्त:क्षेप कॉग्निटिव बिहेवरल थेरिपी (सीबीटी) है।  यह बनावट और आत्म-छवि से संबंधित बेकार विश्वासों को संशोधित करने की रणनीतियाँ शामिल करता है और इसी वजह से भावनाएं तथा व्यवहार संशोधित करते या बदलते हैं।  दोनों अन्त:क्षेपों का उददेश्य व्यक्ति के संपूर्ण कार्य और समाज को सुधारना है।

बीडीडी से ग्रसित किसी व्यक्ति की देखभाल करना

बीडीडी से पीडित व्यक्तियों के पास विशेषकर ऊँचे लक्ष्य होते हैं, अपने आप के लिए उत्तम होने की आशा रखते हैं और स्वयं को लेकर अन्यों से अपनी खामियों के बारे में लगातार आश्वासन की आवश्यकता होती है।  यह सुनिश्चित करने में कि व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से मदद की जरूरत है, परिवार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  परिवार उसका सहायक एवं समझदार हो सकता है क्योंकि व्यक्ति औषधीय एवं मनोसामाजिक अन्त:क्षेप से गुज़रता है।

बीडीडी से सामना

शारीरिक कुरूपता विकार के लिए चिकित्सा दीर्घकालीन हो सकती है।  शारीरिक कुरूपता विकार का एक व्यक्ति आत्म-सम्मान की कमी और लगातार नकारात्मक आत्म-छवि की समस्या का अनुभव कर सकता है।  अपने मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर के साथ सहयोग करना महत्वपूर्ण है और आत्म सम्मान और नकारात्मक आत्म-छवि को सुलझाने की दिशा हेतु कार्य करें।