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ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर क्या है?

एक हादसे में पति की मृत्यु के बाद, नीना टूट गई थी और ये मानने के लिए कतई तैयार नहीं थी कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं है. वो मूक सी बन गईं, न रोती थी न हंसती थी और भावशून्य आंखों के साथ देखती रहती थीं. कई कई घंटों तक वो एक ही स्थिति में बैठी रहतीं और न हिलती थीं न कुछ बोलती थीं. उनकी ये हालत करीब दो सप्ताह तक वैसी ही बनी रही लेकिन धीरे धीरे उनकी हालत में सुधार होता गया और सामान्य ज़िंदगी बिताने की स्थिति में आ गईं.

वास्तविक जीवन स्थितियों में रखते हुए ये काल्पनिक घटनाक्रम निर्मित किया गया जिससे इस मनोरोग को समझने में मदद मिल सके.

संक्षिप्त मनोरोग एक छोटी अवधि की बीमारी है. इसमें मनोरोग के लक्षण अचानक प्रकट हो जाते हैं. जैसे भ्रांति होना, मतिभ्रम, अव्यवस्थित ढंग से बोलना, अटपटा व्यवहार, जड़वत् बैठ जाना या कई घंटों तक स्थिर बैठे रहना(कैटाटोनिक बिहेवियर).

कोई हादसा, परिजन की मृत्यु, या कोई बड़ा आर्थिक नुकसान आदि ऐसी कुछ त्रासद और तनावपूर्ण घटनाएं हैं जिससे किसी व्यक्ति को सदमा पहुंच सकता है और उसका मतिभ्रम हो सकता है. ऐसे व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क टूट जाता है और वो संक्षिप्त मनोरोग का शिकार हो सकता है. ये स्थिति कुछ दिन तक बनी रहती है और उसके बाद वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है.

सूचना: कोई स्वस्थ व्यक्ति भी और ऐसा व्यक्ति भी जिसका मानसिक बीमारी का कोई इतिहास नहीं भी हो, ऐसा व्यक्ति भी कुछ थोड़े समय के लिए इस विकार का शिकार हो सकता है. 

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के क्या लक्षण होते हैं?

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के लक्षण निम्न प्रकार से हैं:

  • बोलने में अटपटापन या किसी से बात न करने की इच्छा
  • भ्रांति (जो हुआ है उसके बारे में ग़लत धारणाएं)
  • मतिभ्रम (ऐसी चीज़ें देखना या सुनना जिनका कोई अस्तित्व नहीं है जो वास्तविक नहीं हैं)
  • अतार्किक और भ्रमित विचार और काम
  • सामान्य व्यवहार में प्रमुख बदलाव
  • स्थिर बैठे रहना या किसी एक स्थिति में घंटों बैठे रहना
  • भावनात्मक बेचैनी और भ्रम

अगर आपको अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य में उपरोक्त में से कोई भी लक्षण नज़र आता है तो आप देखरेख करने वाले के रूप में मदद कर सकते हैं.

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर का कारण क्या है?

किसी प्रमुख तनावपूर्ण स्थिति या सदमा पहुंचाने वाली घटना से ये विकार पैदा हो सकता है. डॉक्टरों ने पाया है कि ये विकार उन लोगों में पनपने की संभावना ज़्यादा रहती है जिनमें स्थितियों से जूझने की कम क्षमता होती है या उनमें व्यक्तित्व की कुछ समस्याएं रहती हैं. कभीकभार, वे महिलाएं भी संक्षिप्त मनोरोग का शिकार हो सकती हैं जो प्रसवोत्तर अवसाद के बाद यानी मां बनने के बाद होने वाले अवसाद से जूझ रही होती हैं.

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर का इलाज

कई मौकों पर, मनोरोग के लक्षण एक या दो सप्ताह में ग़ायब हो जाते हैं.

अगर ये लक्षण लंबी अवधि तक बने रहते हैं या गंभीर होते जाते हैं, तो फिर किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलने की सलाह दी जाती है. विकार की गंभीरता के आकलन के लिए विशिष्ट परीक्षण और साक्षात्कार किए जाते हैं.

थेरेपी, काउंसलिंग, चिकित्सा या इन सब इलाजों को मिलाजुलाकर संक्षिप्त मनोरोग का इलाज किया जाता है. फिर भी, यदि ख़ुद को नुकसान पहुंचाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो व्यक्ति को हालात में सुधार तक अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ती है. स्थिति में सुधार के बावजूद परामर्श की सलाह दी जाती है ताकि बीमारी के फिर से लौट आने का यानी रिलैप्स का ख़तरा न हो.

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के पीड़ित व्यक्ति की देखरेख

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के पीड़ित व्यक्ति की देखरेख में परिवार और मित्र, प्रमुख भूमिका निभाते हैं. उचित सहायता और देखभाल से मरीज़ की हालत में जल्दी सुधार होता है.

अगर आप ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हैं जिसे किसी त्रासद घटना का अनुभव हुआ हो और वो संक्षिप्त मनोरोग का शिकार है तो आप देखरेख के ज़रिए उसकी मदद कर सकते हैं.

दोस्त या रिश्तेदार की मदद के लिए आपः

  • ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के बारे में जानें क्योंकि कठिन हालात से निपटने के लिए और उसे समझने के लिए सूचना और जानकारी होने से मदद मिलती है.
  • भावनात्मक सहायता दें, पीड़ित व्यक्ति से बात करें और सहानुभूति के साथ उसकी बात सुनें. इससे आपको उन लक्षणों को समझने में मदद मिलेगी जिनसे गंभीर साइकोसिस पनप सकता है.
  • अपने दोस्त या रिश्तेदार को, अगर संभव हो तो सैर पर ले जाएं.
  • उन्हें अपने हाल पर न छोड़ें (लेकिन ख़ुद को थोपने की कोशिश न करें)
  • ऐसी टिप्पणियों के प्रति सतर्क रहें जिनसे ख़ुद को नुकसान पहुंचाने के संकेत मिलते हों. ऐसी स्थिति में थेरेपिस्ट या डॉक्टर को फ़ौरन सूचित करें.

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर के प्रकार

ब्रीफ़ साइकोटिक डिसआर्डर का संबंध व्यक्तित्व से जुड़े विकारों और शिज़ोफ्रेनिया से जुड़े विकारों से भी जोड़ा गया है.

  • प्रत्यक्ष या स्पष्ट तनाव से होने वाला संक्षिप्त मनोरोग: इस प्रकार का मनोरोग तब होता है जब व्यक्ति को अपने किसी निकटस्थ रिश्तेदार या सगे संबंधी की मौत की सूचना से सदमा लग जाता है. ऐसी स्थिति लूटमार, हमले, दुर्घटना या प्राकृतिक विपदा के समय भी आ सकती है जब व्यक्ति को गहरा मानसिक आघात पहुंचता है.
  • प्रत्यक्ष या स्पष्ट तनाव के अभाव में संक्षिप्त मनोरोगः बिना किसी प्रकट या प्रत्यक्ष वजह के व्यक्ति मनोरोग का अनुभव करता है. ये अवधि थोड़े समय के लिए होती है और महीने भर में आमतौर पर गायब भी हो जाती है.
  • प्रसवोत्तर अवसाद के साथ संक्षिप्त मनोरोगः जो मांएं प्रसव या जन्म के बाद अवसाद का शिकार हो जाती हैं उन्हें भी संक्षिप्त मनोरोग कुछ महीने के लिए रह सकता है.