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अल्ज़ाइमर रोग की समझ

अल्ज़ाइमर रोग में दिमाग का क्या होता है?

हालांकि हम अभी ये नहीं जानते हैं कि अल्ज़ाइमर रोग शुरू कैसे होता है, फिर भी माना जाता है कि लक्षणों के प्रकट होने के दशकों या उससे भी पहले से दिमाग को नुकसान पहुँचना शुरू हो जाता है. शुरुआत के दौरान, अल्ज़ाइमर रोगी, व्यक्ति लक्षणों से मुक्त रहता है, लेकिन दिमाग में विषैले बदलाव होने लगते हैं. समय के साथ, तंत्रिकाएँ संदेश भेजने में असमर्थ हो जाती हैं और अंततः बरबाद हो जाती हैं.

ये नुकसान हिप्पोकैम्पस तक फैल जाता है. हिप्पोकैम्पस, मानव मस्तिष्क में एक संरचना है जो स्मृति के निर्माण के लिए अत्यंत ज़रूरी है. जितना ज़्यादा तंत्रिकाएँ नष्ट होती जाती हैं, दिमाग के प्रभावित हिस्से सिकुड़ने लगते हैं. अल्ज़ाइमर की आखिरी अवस्था में दिमाग के कई और हिस्से बरबाद हो जाते हैं और व्यक्ति पूरी तरह से याददाश्त खो बैठता है और पूरी तरह से देखरेख करने वालों पर निर्भर हो जाता है.

अल्ज़ाइमर रोग के साथ कोई व्यक्ति कितने लंबे समय तक रह सकता है?

अल्ज़ाइमर एक धीमा रोग है जो तीन अवस्थाओं में बढ़ता है- एक है शुरुआती अवस्था जिसमें कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं, एक मध्य अवस्था है जिसमें हल्की संज्ञानात्मक क्षति देखी जा सकती है और आखिरी अवस्था वो होती है जिसमें पूरी याददाश्त चली जाती है. बीमारी की पहचान से लेकर इससे होने वाली मृत्यु तक का समय बदलता रहता है- अगर व्यक्ति 80 साल या उससे ऊपर का है तो उसके लिए तीन या चार साल. अगर व्यक्ति जवान है तो उसके लिए दस साल. 

मनोभ्रंश यानि डिमेन्शिया क्या है?

डिमेन्शिया एक सिंड्रोम है जो संज्ञानात्मक क्रियाशीलता को नुकसान पहुँचाता है- जैसे सोचना, याद रखना, तर्क क्षमता आदि. इसका असर व्यवहार पर भी पड़ता है और इस तरह व्यक्ति की रोज़ाना की ज़िंदगी और गतिविधि प्रभावित होती है. व्यक्ति की दिनचर्या को बाधित करने की शुरुआत के समय डिमेन्शिया हल्का रह सकता है और ये गंभीर होता जाता है, उस समय व्यक्ति अपनी रोज़ाना की ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है.

कई स्थितियाँ और बीमारियाँ, डिमेन्शिया की वजह बन सकती हैं. बूढ़े लोगों में इसका सबसे सामान्य कारण तो अल्ज़ाइमर का रोग ही है. वैस्क्युलर (रक्त वाहिका संबंधी) डिमेन्शिया, दिल के दौरों की वजह से और दिमाग में ख़ून की सप्लाई में परिवर्तन से होता है.

डिमेन्शिया का कारण बनने वाली अन्य स्थितियाँ निम्न हैं-

  • दवाओं के साइड एफ़ेक्ट यानि ग़लत असर
  • लंबे समय से शराब की लत
  • दिमाग में ट्युमर या संक्रमण
  • दिमाग में गहरी चोट जिससे तंत्रिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं
  • दिमाग में ख़ून के धब्बे
  • विटामिन बी-12 की कमी
  • थायरॉइड, गुर्दे या लीवर की बीमारियाँ

डिमेन्शिया की ग़लत पहचान की जा सकती है

तनाव, घबराहट या अवसाद ऐसी समस्याएँ हैं जो व्यक्ति को भुलक्कड़ बना देती हैं और इन स्थितियों के लक्षणों को कभी कभी गलती से डिमेन्शिया के लक्षण मान लिया जाता है. मिसाल के लिए, हाल में रिटायर हुआ कोई व्यक्ति या पत्नी के निधन से दुखी और संभलने की कोशिश

करता कोई व्यक्ति उदास, अकेला, चिंतित और ऊब महसूस कर सकता है. जीवन के इन बदलावों से निपटने की कोशिश करते हुए कुछ लोग अक़्सर भ्रमित और भुलक्कड़ से हो जाते हैं. परिवार और दोस्तों की सहायता और समर्थन से बड़ी हद तक ऐसी समस्याओं से निपटा जा सकता है.

मैं नाम भूलता रहता हूँ, क्या मुझे अल्ज़ाइमर रोग है?

हर कोई कुछ न कुछ भूलता ही रहता है. आपको तभी चिंतित या सजग होना चाहिए जब आपकी याददाश्त में गिरावट बनी रहती है और धीरे धीरे आपकी याददाश्त कम होती जाती है और जब ये आपकी दिनचर्या को बाधित करने लगती है.

क्या सिर्फ़ बूढ़े लोगों को ही अल्ज़ाइमर रोग का ख़तरा रहता है?

ये देखा गया है कि अल्ज़ाइमर रोग से प्रभावित करीब 50 फीसदी लोग आमतौर पर 75 साल या उससे ऊपर की उम्र के होते हैं. कुछ मामलों में 40 से 50 की उम्र वाले लोगों को भी अल्ज़ाइमर रोग से प्रभावित पाया गया है.