सांस ले, सांस छोड़ें, आराम करें
शिक्षा

सांस ले, सांस छोड़ें, आराम करें

डॉ. गरिमा श्रीवास्तव

डॉ. गरिमा श्रीवास्तव

श्वसन व्यायाम क्यूँ?

हम हर समय श्वास लेते हैं, परंतु इस बात पर अधिक सचेत रहते हुए कि हम कैसे श्वास लेते हैं, हम अपनी सलामती की अधिक सकारात्मक स्थिति प्राप्त कर सकते हैं।  श्वास लेने के दो तरीके हैं ।  हम में से कुछ तो सीने से श्वास लेने वाले होते है इससे साँसें लेते समय हमारा सीना ऊपर-नीचे की ओर जाते हुए मालूम पड़ता है।  सीने का श्वशन छोटा व तेज़ होता है, और जब हम परेशान होते हैं, हमारा सीना श्वशन के दौरान और भी तीव्र और उथला होता है।  तथापि, यदि आपने कभी किसी बच्चे को सोते हुए देखा है, तो आपने गौर किया होगा कि बच्चे अलग तरीके से श्वास लेते हैं।  प्रत्येक श्वास के साथ, बच्चे का पेट अंदर-बाहर होता है।  इसे उदरीय या डायफ़्राम-विषयक या पेट से साँस लेना कहकर संबोधित करते हैं और इसमें, हम डायाफ़्राम का उपयोग करते हैं जो छाती तथा पेट को साँस लेने हेतु अलग करता है। उदरीय या डायफ़्राम-विषयक तरीके से श्वास लेना पूर्णतया और गहरी होती है।  यह न केवल हमें आराम पहुंचाता है, बल्कि यह हवा को हमारे फेफड़ों तक पहुँचने का एक सबसे कारगर तरीका है।

औदरिक श्वसन

निम्नलिखित व्यायाम जिसमें एक व्यक्ति अपने श्वास-प्रतिमान को सतर्कता से श्वास को ऊपरी छाती से पेट तक स्थानांतरण करने के तरीकों की रूपरेखा दिखाता है। इस व्यायाम को  नियमित रूप से किए जाने पर यह व्यायाम अधिक प्रभावी है।  तीन मिनट जितनी छोटी अवधि की गहरी श्वास लेने का व्यायाम आमतौर पर विश्रांति की अवस्था प्रेरित कर सकता है।  अनुसंधान बताता है कि प्रत्येक दिन 3-5 मिनट लगातार औदरिक श्वसन व्यायाम हमारे संपूर्ण श्वास-प्रतिमान में सुधार लाने हेतु बहुत अधिक सहायक बन सकता है।

औदरिक श्वसन प्रभावी है क्योंकि यह डायाफ्राम को प्रबल बनाकर, दिमाग में ऑक्सीजन आपूर्ति को बढ़ाता है और शरीर की प्राकृतिक विश्राम प्रतिक्रिया को बढ़ाती है।  यदि आप अपने ऊपरी छाती से श्वास लेते आ रहे हैं, औदरिक श्वसन के अभ्यस्त बनने में कुछ समय लग सकता है।  तथापि, यदि आप अपने प्रयत्न में स्थिरता रखते हैं, आप पाएंगे कि औदरिक श्वसन ऐसी परिस्थितियों में विश्राम लेने हेतु आपकी मदद करता है जब आपको तनाव महसूस होता है और यह आपको अपने तन-मन के साथ बेहतर तरीके से फिर से जुड़ने में मदद करता है। 

उपाय:

  1. एक शांत जगह चुनिए। अपने शरीर में तनाव की स्थिति का अवलोकन करें।  ऐसा करते समय अपना एक हाथ पेट पर रखें, अपनी पसली के ठीक नीचे।

  2. धीरे से अपने नाक के जरिए फेफड़ों के निचले स्तर तक श्वास लें और हवा को जितनी गहराई से ले सके लें। अपने हाथों को पेट पर ही रहने दें।  जैसे ही आप साँस अंदर लेंगे, आप गौर करेंगे कि आपकी छाती हल्के से गतिमान हो रही है, और आपका पेट श्वशन की गई सारी हवा को लेने हेतु विस्तारशील हो रहा है।

  3. जब आप एक बार पूरी तरह से साँस अंदर लेते हैं, थोड़ा रूकें और जो भी आपके लिए अधिक आरामदायक हो, अपनी नाक या मुँह के जरिए हवा को बाहर निकालें।  यह आवश्यक हैं कि आप पूरी तरह से साँस बाहर छोड़े।  जैसे ही आप यह करते हैं, आप गौर करेंगे कि आपका पेट समतल हो रहा है।

  4. कुछ औदरिक श्वसन जारी रखें।  इसे हवा को गटके बिना या एक ही बार में छोड़े बिना धीरे से करें।  अब अपनी श्वास को सामान्य होने दें।  श्वास लेते समय 4 तक गिनना और श्वास छोड़ते समय 4 तक गिनना एक लय को प्राप्त करने में आपकी मदद करता है।  हर बार श्वास छोड़ने के अंत में थोड़ा रुकना याद रखें।  हर एक संख्या की गिनती करते हुए ऐसे दस बार करिए। 

  5. आपके व्यायाम को आगे बढ़ाने के लिए, आप दो से तीन बार तक औदरिक श्वसन कर सकते हैं।  यह काफी सरल व्यायाम है और जब एक बार आप अभ्यस्त हो जाएं, तो आप चलते-चलते, परीक्षा हॉल में इंतज़ार करते-करते, आदि अवसरों पर सतर्कता से कर सकते हैं।  आमतौर पर यह सिफारिश की जाती है कि व्यायाम को एक मिनट से शुरु किया जाए और एक निर्धारित समय के लिए बढ़ाते हुए अवधि बढ़ाएँ।  पूरे पाँच मिनट का औदरिक श्वासन अर्थपूर्णता से तनाव की स्थिति को कम करता है और आपके शरीर को इष्‍टतम तरीके से कार्य करने हेतु मदद करता है ।

शांतिप्रदायक श्वसन व्यायाम

निम्नलिखित शांतिप्रदायक श्वसन व्यायाम, योग के प्राचीन अनुशासन से अपनाया गया है और यह औदरीय श्वसन तकनीकी को उपयोग में लाता है। शांतिप्रदायक श्वसन व्यायाम आपको विश्राम की गहरी स्थिति में तुरंत पहुँचने में मदद कर सकता है।

उपाय:

  1. एक शांत जगह का चयन करें जो शोर-गुल से दूर हो।  अपने हाथ को अपने पेट पर रखें और अपने कंधों तथा छाती को आराम ढीला छोड़ दें।  अपने नाक के द्वारा धीरे से श्वास लें और पाँच तक गिनते हुए अपने पेट को ऊपर चढ़ते महसूस करिए।
  2. पाँच गिनने तक अपनी श्वास को थामे रखिए और रुकिए।
  3. पाँच तक या अधिक गिनने तक अपने नाक या मुँह के द्वारा श्वास को बाहर छोड़िए।  यह आवश्यक है कि आप श्वास को पूरी तरह बाहर छोडें।
  4. जब आप पूरी तरह से श्वास को बाहर छोड़ेंगे और पेट सपाट हो जाए, अपने सामान्य लय में दो श्वास लें।  ऊपर दिए अनुसार, उपाय 1 से 3 तक के चक्र को दोहराएं।
  5. कम से कम तीन से पाँच मिनट तक व्यायाम करते रहें।  जब आप ऐसा करते हैं, आप कम से कम दस बार इस चक्र को दोहराएंगे, पाँच बार रोकेंगे और पाँच या अधिक तक छोड़ेंगे।  जैसे ही आप इसके अभ्यस्त हो जाते हैं, आप गौर करेंगे कि आपका श्वास छोड़ना- श्वास लेने से थोड़े लंबे समय तक रहेगा।  इस परिवर्तन को रहने दें और व्यायाम को पाँच मिनट तक करते रहें।

वैकल्पिक: हर बार श्वास छोड़ने पर, आप एक सकारात्मक शब्द कहना पसंद कर सकते हैं (उदाहरण के लिए ‘शांति’) या सकारात्मक छवि या विचार के बारे में सोचेंगे और अपने शरीर को इस साँचे में ढ़ालेंगे।  यदि आप हर बार व्यायाम करते समय ऐसा करते रहेंगे, तो आप पाएंगे कि केवल सकारात्मक शब्द कहने या सकारात्मक छवि के बारे में सोचने या विचार करने से विश्राम की स्थिति बनती है।

वाइट स्वान फाउंडेशन
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