शिक्षा

परीक्षा दौरान आपके उम्मीद

मौलिका शर्मा

परीक्षा का मौसम आ चुका है. ये कोई नयी बात नहीं है क्योंकि ये पड़ने के समय में हर साल आता है. लेकिन फिर भी परीक्षा चिंता बन कर हर साल अशांति पैदा करता है, न सिर्फ़ परीक्षा लेने वालों के लिए बल्कि उनके माता-पिता, शिक्षक, दादा-दादी, नाना-नानी एवं उनसे संबंधित हर व्यक्ति के लिए.

तो परीक्षा में ऐसी क्या शक्ति है जो सबको अपनी पकड़ में रखती है?

ऐसा इसलिए है क्योंकि परीक्षा द्वारा किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन किया जाता है- चाहे समाज का या विशेष रूप से परिवार या छात्रों का.

इन्हीं परीक्षाओं के द्वारा छात्र अपने आप का आकलन करते हैं जैसे कि वे अच्छे हैं या नहीं, उनका भविष्य कैसा होगा, भविष्य में उनका जीवन सफल होगा या नहीं. अगर वे अच्छे अंकों से पास होते हैं तो उन्हें ये पता चलता है कि वे जीवन में सफल होंगे या सफल होने का मौका तो मिलेगा. और अगर अच्छे अंक नहीं आते हैं तो वे ये मान लेते हैं कि उनका जीवन विफल हो गया.

हालांकि वस्तविकता ये नहीं है कि जीवन की सफलता या असफलता केवल अंक पर ही निर्भर करती है या वही गारंटर है. सबसे पहले ये जानना ज़रूरी है कि केवल सफलता ही जीवन की परिभाषा नहीं है. सफलता और विफलता सार्वभौमिक बाहरी उद्देश्य परिभाषाएँ हैं जो हर किसी पर लागू होती हैं. हर व्यक्ति की जीवन की सफलता या विफलता की अपनी परिभाषा होती है- जैसे बहुत पैसे कमाना ही किसी के लिए सफलता है, दूसरे के लिए जितनी हो सके उतने दिलों को छू जाना ही सफलता हो सकती है, तीसरे के लिए अपने परिवार की अच्छी देख-भाल करना ही सफलता की परिभाषा है. सफलता की कोई एक परिभाषा नहीं है और हमें किसी और की परिभाषा लेनी भी नहीं चाहिए.

दूसरा सफलता और विफलता जीवन की घटनाओं को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं न कि लोगों को लेबल करने के लिए. ऐसा नहीं है कि एक व्यक्ति सफल या विफल होता है बल्कि वह अपने जीवन में एक निश्चित कार्य में सफल या विफल होता है. इसलिए ये समग्र जीवन को नहीं, बल्कि जीवन के किसी खास पहलू को परिभाषित करता है.

अगर आप परीक्षा में उत्तीर्ण हो गए तो इसका मतलब ये नहीं कि आप जीवन में सफल हो गए. उसी प्रकार अगर आप परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए तो ये मतलब नहीं कि आप जीवन में विफल हो गए हैं. आपके जीवन के कई दूसरे पहलू भी हैं जो आपको परिभाषित करते हैं. ये ज़रूर याद रखें कि आपको जीवन में सफलता पाने के लिए परिभाषा की या लेबलिंग की आवश्यकता नहीं है.

तीसरा, प्रत्येक सफलता और विफलता को अपने पूरे जीवन के परिप्रेक्ष्य में डाल दें. कोई भी परीक्षा लेते समय आपको ये महसूस होगा कि यही आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना है. हालांकि ये याद रखना ज़रूरी है कि छ: महीने या एक साल के बाद उस घटना का महत्त्व वैसा ही नहीं रहेगा या हो सकता है कि कोई महत्त्व रहे ही नहीं.

आप अगर अगले साल इसी समय बोर्ड की परीक्षा ले रहे हों तो इस साल के अंक का तो उसके साथ कोई संबंध ही नहीं है. मार्क्स आपके लिए दर्वाज़े खोल सकते हैं पर दर्वाज़े के अंदर जाने के बाद ‘सफलता’ की गारंटी नहीं दे सकते. मार्क्स के कारण कुछ अच्छे कॉलेजों, या अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी मिल सकता है, लेकिन ये गारंटी नहीं है कि आप वहाँ सफलता पाएँगे.

आखिरकार जीवन की सफलता सिर्फ़ मार्क्स पर ही निर्भर नहीं करती. आपको १००% अंक मिले होंगे पर फिर भी आप अपने काम में या जीवन में सफल महसूस नहीं कर रहे होंगे. कार्यस्थल में सफलता निर्भर करती है आपके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पर, आपके संवाद करने की क्षमता, सीखने की क्षमता, टीम के एक खिलाड़ी या रचनात्मक ढंग से समस्याओं को सुलझाने की क्षमता आदि. रिश्तों की सफलता इस पर निर्भर करती है कि आप लोगों के साथ कैसे कनेक्ट करते हैं, कैसे संबंध निभाते हैं और कैसे दूसरों की ज़रूरतों को खुद की ज़रूरतों से आगे रखते हैं. ये सब कुछ हद तक आपके आत्मविश्वास और खुद की लायकता पर निर्भर करता है.

ऐसे कहने का मतलब ये नहीं है कि आप अपनी परीक्षाओं के बारे में चिंता ही न करें और बेहतरीन कोशिश न करें. अगर आप अपनी क्षमता के अनुसार प्रयास नहीं करेंगे तो आप असंतुष्ट महसूस करेंगे. इसलिए अथक प्रयास ज़रूर करें, ये न सोचें कि आपका जीवन इसी पर निर्भर करता है क्योंकि ये सच नहीं है.

ये सब देखते हुए, आप उम्मीदों के साथ कैसे सौदा करते हैं - अपने आप की उम्मीदों से, अपने माता पिता की उम्मीदों से, अपने शिक्षकों की उम्मीदों से, और दुनिया जो उम्मीदें आप से रखती है? उम्मीदों पर खरा उतरने का सिर्फ़ एक ही तरीका है- अपने आप पर विश्वास करना, मार्क्स पर ज़्यादा ध्यान न देकर अपनी योग्यता को पहचानना. अच्छे अंक बोनस के रूप में काम आयेंगे.

अक्सर स्वयं के साथ की बातें नकारात्मक होती हैं. हमें लगता है कि हम नालायक व अयोग्य हैं और समाज भी हमारे बारे में क्या सोचेगा. माता-पिता और शिक्षक को हमसे निराशा होगी. वास्तविकता ये है कि दुनिया भी हमसे निराश होगी, पर ये उनका ही चुना हुआ पथ है जिससे उन्हें ही निपटना होगा. आपकी सफलता के लिए उनकी परिभाषा बदलती रहेगी और शायद आप कभी उस सफलता को छू भी न पाएँ.

ये आपके नियंत्रण में नहीं है. सबसे महत्त्वपूर्ण ये है कि आपको अपने आप से निराश नहीं होना चाहिए. आखिरकार आपके माता-पिता और शिक्षक आपको खुश देखना चाहते हैं और अगर आप ये साबित कर दें कि आप अपने विकल्प से खुश हैं तो उन्हें भी सांत्वना मिलेगी. अत: बेहतरीन प्रयास करें और खुद के लिए करें.

याद रखें, यदि एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा ज़रूर खुलेगा, बेशर्ते आप खुद उस दरवाज़े को ढूँढें. लेकिन कोई दरवाज़ा अच्छे प्रयास के बिना नहीं खुलता है, ये कभी न भूलें कि जीवन कहलाने वाले इस नाटक में आपका भी एक महत्त्वपूर्ण रोल है.

वाइट स्वान फाउंडेशन
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