महिला

क्या तनाव मेरे फाइब्रोमायल्जिया को बदतर बना सकता है?

वाइट स्वान फ़ाउंडेशन

फाइब्रोमायल्जिया क्या है?

फाइब्रोमायल्जिया एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें सामान्य थकान और लगातार होने वाली पीड़ा और दर्द होता है। किसी व्यक्ति में फाइब्रोमायल्जिया द्वारा अनुभव किए गए दर्द का कोई प्रकट शारीरिक कारण नहीं है,  और यही इस बीमारी को पहचानने में मुश्किल पैदा कर सकता है।

फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण?

यदि आप में कुछ हफ्तों या महीनों से लगातार निम्नलिखित तरह के लक्षण प्रकट हो रहे हैं, तो आप किसी डॉक्टर से फाइब्रोमायल्जिया की पहचान करने के लिए परामर्श कर सकते हैं:

• सामान्य थकान

• रात को अच्छी नींद लेने के बाद भी थकावट होना

• सिरदर्द और शरीर में दर्द

• उदासी या बार-बार चिंता की भावनाएं

• शरीर में टूटन महसूस होना

• काम में मन न लगना या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई

• पाचन समस्याएं

​फाइब्रोमायल्जिया का सही कारण ज्ञात नहीं है। अनुसंधान से पता चलता है कि जिन लोगों को गहरे तनाव या आघात का सामना करना पड़ा है, उनमें फाइब्रोमायल्जिया विकसित हो सकता है,  और इसमें आनुवंशिकी भी एक भूमिका निभा सकती है।

दोस्तों और परिवार को अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कैसे स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति अस्वस्थ हो सकता है या सामान्य रूप से कार्य करने में असमर्थ है। मात्र देख लेने से अक्सर किसी भी शारीरिक समस्या की पहचान नहीं हो पाती है, इसी वजह से व्यक्ति के चिड़चिड़ाने या बिना बात झल्लाने पर आसपास के लोग उसकी स्थिति का गलत आंकलन करते हैं।

व्यक्ति की भावनात्मक भलाई को फाइब्रोमायल्जिया कैसे प्रभावित करता है?

फाइब्रोमायल्जिया अक्सर किसी व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है क्योंकि उन्हें शारीरिक दर्द और थकान के कारण आसानी से नियमित गतिविधियां कर पाना मुश्किल लगता है। इससे तनाव होने के साथ ही आत्मसम्मान में कमी आ सकती है- वे या तो अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ रहते हैं, या उन्हें अलग कर देते हैं।

"फाइब्रोमायल्जिया का निश्चित रूप से एक मनोवैज्ञानिक आधार है। एक व्यक्ति दर्द का अनुभव करता है जो चोटों की तरह बाहरी रूप में दिखाई तो नहीं देता है,  लेकिन दर्द वास्तविक,  गंभीर और कभी-कभी असहनीय हो सकता है यहां तक ​​कि बिस्तर से बाहर निकलना एक बड़ा काम हो सकता है। दस में से नौ मामलों में फाइब्रोमायल्जिया की पहचान करना कठिन हो सकता है। गुड़गांव के मेदांता में न्यरोसाइकोलॉजिस्ट  डॉ. नताशा खुल्लर बताती हैं कि,  "इस बीमारी की पहचान होने से एक साल पहले तक ज्यादातर लोग डॉक्टरों से सलाह लेते रहते हैं और परीक्षण करवाते हैं।"

फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण अक्सर (और कभी-कभी) मनोवैज्ञानिक तनावों से जुड़े होते हैं। इसका मतलब यह है कि तनाव से लक्षण और ज्यादा खराब हो सकते हैं;  और तनाव का प्रबंधन, इसके लक्षणों के प्रबंधन में भी मदद कर सकता है। फाइब्रोमायल्जिया से ग्रस्थ दस में से नौ लोगों में अवसाद के लक्षण होते हैं, और दस में से कम से कम छह लोगों को अपने जीवनकाल के दौरान एक गंभीर अवसाद का अनुभव होगा।

फाइब्रोमायल्जिया और स्वयं की देखभाल

फाइब्रोमायल्जिया के लिए कोई पक्का इलाज नहीं है,  लेकिन उपचार से लक्षणों को संभालने और दर्द कम करने में मदद मिलती है। यदि जांच में आपके फाइब्रोमायल्जिया की पुष्टि हुई है, तो आपका डॉक्टर लक्षणों के प्रबंधन में मदद के लिए उपचार के साथ ही आपकी जीवनशैली में बदलाव के बारे में कह सकता है

चिकित्सा के रूप में दर्द निवारक दवा और अवसादरोधी की कम खुराक शामिल हो सकती है। तनाव से मुकाबला करने के लिए थेरेपी बेहतर साधन हो सकता है, इस तरह लक्षणों का प्रबंधन किया जा सकता है।

• एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें और नियमित आधार पर चिकित्सा करने पर विचार करें।

• चिकित्सक से परामर्श कर व्यायाम को नित्य का नियम बनाएं और इस पर अडिग रहें। व्यायाम शरीर में दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। यदि किसी खास दिन पर आप व्यायाम नहीं कर पाए हैं, तो अपने अंगों को हिला-डुला सकते हैं या घर के चारों ओर एक कुछ दूरी तक पैदल चल सकते हैं।

• सुनिश्चित करें कि आप स्वस्थ, संतुलित भोजन कर रहे हैं।

• एक अच्छी समर्थन प्रणाली बनाएं - आपको सहारा देने वाले दोस्तों और परिवार की पहचान करें,  जो आवश्यकता पड़ने पर आपको व्यावहारिक या भावनात्मक रूप से सक्षम हों।

• अपने तनावों का प्रबंधन करें। आपका चिकित्सक आपको यह समझने में मदद कर सकता है कि किन परिस्थितियों से आपको तनाव होता है और इससे बेहतर मुकाबला करने प्रक्रिया तंत्र बनाएं।

• गहरी और नींद का अभ्यास करें। अपने गैजेट्स को बेडरूम से बाहर छोड़ना और सोने से पहले एक शांत वातावरण आपकी नींद को बेहतर करने में मददगार साबित हो सकता है।

यह अंश मेदांता, दिल्ली में वरिष्ठ सलाहकार, न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट डॉ. नताशा खुल्लर कुमार के सहयोग से लिखा गया है।

वाइट स्वान फाउंडेशन
hindi.whiteswanfoundation.org