किशोरावस्था

क्या आप अपने बच्चों के घर से दूर जाकर रहने को लेकर चिंतित हैं?

वाइट स्वान फ़ाउंडेशन

हर माता पिता की चाहत होती है कि उनके बच्चे जिम्मेदार और आत्मनिर्भर व्यस्क बने; और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को सच करने की इस उड़ान में सबसे बड़ी भूमिका माता-पिता की ही होती है। लेकिन वास्तव में, उनका घर से दूर चले जाना माता-पिता और बच्चे दोनों के लिए एक मुश्किल दौर होता है। लड़कियों के घर से दूर जाकर पढ़ने या काम करने को लेकर माता-पिता विशेषकर बहुत ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, और यह उनके लिए मददगार न होकर अहितकारी हो सकता है। यह कुछ उपाय हैं जो आपकी मदद करेंगे अपने बच्चे की इस यात्रा में सहायक बनने में-

पहले से उनको तैयार करें: इस चर्चा की शुरुआत तब होनी चाहिए जब बच्चे आपके साथ बैठकर यह आलोचना करते हैं कि वे आगे किस कालेज या विश्वविद्यालय में पढ़ने जाना चाहते हैं। यही सही मौका है जब आप उन्हें समझा सकते हैं कि घर के बाहर की दुनिया का अनुभव कैसा हो सकता है। उनकी यह समझने में मदद करें कि हालांकि शुरू में अपने लिए घर ढूँढना बहुत रोमाँचक लग सकता है, क्योंकि वहां उनके दोस्त कभी भी आ-जा सकते हैं। लेकिन इसके साथ उन्हें खर्चे सम्भालना और घर चलाने जैसी ज़िम्मेदारियाँ भी निभानी होगी, और शुरू में यह काफी मुश्किल लग सकता है। उन्हें आश्वस्त करें कि उनकी मदद करने के लिए आप हमेशा उनके साथ हैं।

उन्हें पैसों का महत्व समझाएं: जब बच्चे कालेज जाने लगें तो उन्हें अपने जेब खर्च को सोच-समझकर व्यय करना सिखाएं क्योंकि यही आदत आगे चलकर उनकी मदद करेगा जब उन्हें अकेले रहना होगा और अपना खर्चा सम्भालना होगा।  

उन्हें उत्तरजीविता के कौशल सिखाएं: हो सकता है आपका बच्चा छात्रावास में न रहकर अपने दोस्तों के साथ अलग घर लेकर रहना चाहे। बचपन से उन्हें खाना बनाना और सफाई रखने के कौशल सिखाएं। इससे आपकी मदद भी होगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगे।

रिश्तों को लेकर आलोचना करें: स्वतंत्रता और ज़िम्मेदारी के पहलुओं को लेकर उनके साथ बात करें। उन्हें आश्वस्त करें कि वे हर मुद्दे पर अपनी दुविधा या समस्याओं को लेकर आपसे फोन पर बात कर सकते हैं। अपने और बच्चों के बीच आलोचना के मार्ग को हमेशा खुला रखें।

हो सकता है कि आपके बच्चे के बाहर चले के बाद जो खालीपन आप महसूस करने वाली हैं उसे लेकर आप अभी से चिंतित हों या उदास महसूस कर रहे हों। अपने आपको इस परिस्थिति से जुझने के लिए सशक्त बनाएँ। स्वंय को बार बार याद दिलाएं कि कभी न कभी तो बच्चों को आपसे दूर जाना ही होगा, लेकिन घर से दूर रहने का मतलब रिश्तों में दूरियाँ नहीं है। आप उनके साथ हमेशा जुड़े रहेंगे फोन के माध्यम से, और उनका हालचाल आपको प्राप्त होता रहेगा।

बोना कोलाको भारत में लाइसेंस प्राप्त एक नैदानिक मनोचिकित्सक हैं। यह लेख उनकी मदद से लिखा गया है। किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य उनका पसंदीदा क्षेत्र हैं। 

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