मानसिक बीमारियों की डॉक्टर द्वारा नियमित समीक्षा आवश्यक है

आयशा सुल्ताना 14 वर्षीय एक हंसमुख लड़की थी, जो एक सामान्य और सुखी जीवन जी रही थी। वह अपनी मां और बड़े भाई के साथ रहती थी,  जब वह छोटी बच्ची थी तभी उसके पिता चल बसे थे। उसे अपने स्कूल से प्यार था और सहपाठियों और शिक्षकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थी।

एक सुबह वह अचानक रोने लगी, यह कहते हुए कि "मुझे डर लग रहा है" और उसने स्कूल जाने से इनकार कर दिया। मैंने उस सुबह कुछ देर बाद उससे मुलाकात की। उसका चेहरे पर आंसुओं के दाग नजर आ रहे थे और उसके हावभाव उस जानवर की तरह थे, जिसे शिकार बन जाने का डर हो,  भयभीत और भ्रमित। जैसे ही हमने बातचीत शुरू की उसे कुछ आराम मिला। वह डरी हुई थी, क्योंकि कभी-कभी उसे घंटी बजने या कानाफूसी की आवाज़ें सुनाई देती थीं, जबकि यह पता नहीं होता था कि ये आवाजें आ कहां से रही हैं। पिछले कुछ महीनों में यह कई बार हुआ था, आमतौर पर परीक्षा से पहले, लेकिन उसे डराने लायक ज्यादा जोर से ज्यादा देर तक कभी नहीं सुनाई दी। आज सुबह यह आवाज बहुत तेज थी, "जैसे मेरे सिर के अंदर घंटियां घनघना रही हों"।

वैभव बीस वर्ष की उम्र के शुरूआती दौर में था, जब उसने अचानक यह अनुभव करना शुरू कर दिया कि उसके हाथ गायब हो गए हैं। अगर वह गाड़ी चला रहा होता, तो उसे रोकना पड़ता था क्योंकि उसे लगता था कि गाड़ी चलाने के लिए उसके पास कोई हाथ नहीं थे! या तेज हवा आने वाले दिन कमरे का फर्श अचानक चादर की तरह लहराने लगेगा, और उसे चलना बंद कर देना होगा। इन विचित्र धारणाओं से वह काफी डर गया और उसने एक चिकित्सक और नेत्र चिकित्सक से सलाह ली। नैदानिक ​​परीक्षा और संबंधित जांचों से भी उसके लक्षणों के बारे में कोई नतीजा नहीं निकल सका।

ऐसे मामलों में  प्रारंभिक उपचार, भयभीत करने वाले लक्षणों के नियंत्रण के लिए किया जाता है। आयशा और वैभव दोनों में ही एंटीसाइकोटिक दवा की थोड़ी मात्रा से ही अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिली। वे अपने सामान्य जीवन में वापस लौट पाए, हालांकि उन्हें दवाइयां जारी रखनी पड़ीं। एक बार जब उनका तात्कालिक डर नियंत्रित हो जाता है, तो वे अपनी प्रगति के बारे में बता सकते हैं कि वे किस अवस्था से गुजर रहे है, जिससे चिकित्सक अपने विचारों और धारणाओं के जरिए अंतिम निदान दे सकते हैं।

आयशा अब स्नातक पाठ्यक्रम के दूसरे वर्ष में हैं। अगले चार वर्षों में उसने कभी-कभार ही उन लक्षणों का अनुभव किया था, लेकिन वे बहुत थोड़े और कम तीव्रता के थे। उसने इस अवधि के दौरान इलाज के रूप में रक्षक दवा लेना जारी रखा। दो साल पहले,  अठारह साल की उम्र में,  उसके मिजाज में गंभीर बदलावों के आने से एक मिजाज स्थिर रखने की दवा जोड़ी गई। पिछले हफ्ते उसकी मां ने यह बताने के लिए फोन किया कि आयशा ने फिर से डर की तीव्र भावना होने की शिकायत शुरू कर दी है और कॉलेज जाने से इनकार कर रही है, जो कि पिछले छह वर्षों में नहीं हुआ है।

वैभव ने  दवा लेना और अगले एक साल तक हर तीन महीने में एक बार मुझसे मिलना जारी रखा। अजीब लक्षण पूरी तरह से गायब हो गए। उसमें नए लक्षण विकसित हुए और रोग से संबंधित तस्वीर स्पष्ट हो गई। एक निर्णायक इलाज किया गया और उसने उपयुक्त दवा लेना शुरू कर दिया। वह पिछले दस सालों से इस दवा ले रहा है (कुछ प्रकार की मानसिक बीमारियों को आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है)। उसने अपने मन से ही कुछ दिनों तक इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन लक्षणों के पुन: प्रकट होने के कारण फिर से दवा लेना शुरू कर दिया। वह विवाहित है,  एक सफल व्यवसाय चलाता है,  और संक्षेप में, पूरी तरह से एक सामान्य जीवन जी रहा है।

आयशा और वैभव ऐसे लोग हैं, जिनके शुरुआती लक्षणों पर नियमित रूप से नजर रखा जाना चाहिए। जब वे पहली बार जांचे गए तो निश्चित इलाज के लिए किसी मानदंड को पूरा नहीं कर रहे थे, क्योंकि रोग संबंधी तस्वीर ​​चित्र अब भी विकसित हो रही है। फिर भी,  तात्कालिक निदान के आधार पर दी जाने वाली दवाओं के प्रति उनमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली, और उनकी ज़िंदगी में बाधा कम आई, वरना स्थिति बिगड़ सकती थी।

मानसिक स्थिति के श्रृंखलाबद्ध परीक्षण समय के साथ निदान तक पहुंचने में सहायता करते हैं। कभी-कभी सभी लक्षण आगे के उपचार की आवश्यकता को समाप्त करते हुए कुछ हफ्तों या महीनों में गायब हो जाते हैं। हालांकि, बहुत से मामलों में, परिणाम बहुत अनुकूल नहीं होते। आयशा के मामले में, इस श्रृंखला में उतार-चढ़ाव हुआ है,  चार सालों के लिए कुछ हद तक स्थिर रहा, जिसके बाद नए लक्षण उभरे, पिछले हफ्ते की घटनाओं से पहले तक दो साल तक फिर से स्थिर हो गया।
इस तरह के मामले अक्सर कम उम्र लोगों के साथ होते हैं।

अपर्याप्त जानकारी के आधार पर किसी का इलाज करने का कोई मतलब नहीं होता है और यह उन कम उम्र लोगों और उनके परिवारों को नुकसान भी पहुंचा सकता है। लंबे समय तक लगातार जांच से नए लक्षणों का विश्लेषण करना संभव होता है,  उसके आधार पर निदान तक पहुंचा जाता है और उपचार को संशोधित किया जाता है।

इस श्रृंखला में श्यामला वत्स ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला है कि किशोरावस्था के परिवर्तन प्रारंभिक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को ढक सकते हैं। ये लेख बताते हैं कि किशोरावस्था के सामान्य व्यवहार के लिए मानसिक विकार के शुरुआती लक्षणों को किस रूप में लिया जा सकता है। किशोरवय लोग, जो अनावश्यक रूप से पीड़ित हैं, उनकी कहानियों से स्पष्ट है कि उनके  मित्रों और परिवार के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जब वे उनके किसी व्यवहार को सामान्य सीमा से बाहर होना पाते हैं तो इसे नियंत्रण से बाहर होने से पहले मदद लें।

डॉ श्यामला वत्स बंगलौर स्थित एक मनोचिकित्सक है जो बीस वर्षों से अधिक समय से अभ्यास कर रही हैं। यदि आपके पास कोई प्रश्न या टिप्पणी हैं, जो आप साझा करना चाहते हैं,  तो कृपया उन्हें columns@whiteswanfoundation.org पर लिखें।

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