हिंसा संबंधी आघात को थेरेपी में संभालना
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हिंसा संबंधी आघात को थेरेपी में संभालना

घरेलू हिंसा का सामना कर रही पीड़िताओं की मदद के लिए थेरेपिस्ट के लिए मार्गदर्शिका

भूमिका साहनी

घरेलू हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, दोनों विपरीत दिशा में चलने वाले संबंध हैं। यानी जो लोग पहले से ही एक जोखिमपूर्ण स्थिति में है (जिनमें मानसिक स्वास्थ्य सेवा का उपयोग कर रहे लोग भी शामिल हैं) उनके हिंसा का शिकार होने की संभावना अधिक है जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

लंबे समय तक होने वाली हिंसा, उसकी गंभीरता और पुनरावृति, एक से अधिक तरह की हिंसा के अनुभव, ये सब मिलकर रोगों की संख्या बढ़ाते हैं। जिन महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा नहीं होती है उनकी तुलना में अवसाद, चिंता और नशे की लत की चपेट में उन महिलाओं के आने की आशंका ज्यादा होती है जिनके साथ घरेलू हिंसा होती है।

घरेलू हिंसा को देखने से बच्चों की मानसिक सेहत पर भी नाकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से बच्चों में गंभीर समस्याएं उभरने की आशंका दो से चार गुना तक बढ़ जाती है। इससे सामाजिक विकास और अकादमिक प्रगति में मुश्किलें आ सकती हैं या यौन संबंधी गतिविधियों की शुरुआत समय से पहले हो सकती है। बच्चों में एंग्जाइटी और डिप्रेसन के आंतरिक लक्षण उभर सकते हैं जबकि आक्रामकता जैसा बाह्य लक्षण दिख सकता है। इसके अलावा बच्चों में बार-बार बीते दिनों की याद वाले आघात के लक्षण दिख सकते हैं।

Q

मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले घरेलू हिंसा का सामना कर रहे लोगों की मदद किस तरह से कर सकते हैं?

A

घरेलू हिंसा का सामना कर रहे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका होती है इसके बाद भी मानसिक स्वास्थ्य के इलाज के दौरान घरेलू हिंसा या उत्पीड़न के बारे में नियमित तौर पर नहीं पूछा जाता है। इसी कारण से उन्हें उपयुक्त रेफरल और सहायता भी नहीं दी जाती है।

कुछ देशों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और स्वास्थ्य सेवा में उत्पीड़न के मामलों के कम चिह्नित होने के चलते यह सिफारिश की जाती है कि स्वास्थ्य सेवा कर्मी महिलाओं से नियमित रूप से पूछें कि उन्हें अपने पार्टनर की हिंसा का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है।

विकासशील देशों में सीमित संसाधन और रेफरल सुविधाएं हो सकती हैं, ऐसा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी मानता है। इसके चलते वह महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के लिए सर्वमान्य स्क्रीनिंग व्यवस्था की अनुशंसा नहीं करता है। हालांकि डब्ल्यूएचओ स्वास्थ्य देखभाल करने वालों को प्रोत्साहित करता है कि वे महिला की चोट या हिंसा की शिकार लग रही महिलाओं के साथ इस मुद्दे को उठाएं।

सीधे सवाल ना किए जाने की स्थिति में घरेलू हिंसा की पीड़िताएं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने वालों को कुछ बताने में झिझकती हैं। यदि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले मानसिक बीमारी के लक्षणों का प्रबंधन कर रहे हैं, लेकिन आघात के कारण को अनदेखा कर रहे हैं, तो उपचार के सफल होने की संभावना कम है।

अगर महिलाओं में अवसाद और चिंता विकार हों या फिर मानसिक पीड़ा के लक्षण हों तो चिकित्सिकों को नियमित तौर पर महिलाओं से वर्तमान या अतीत में हुई घरेलू हिंसा की घटनाओं के बारे में पूछने की ज़रूरत है। उन्हें विशेषज्ञ सेवाओं के लिए रेफर करने में सक्षम होना चाहिए और घरेलू हिंसा के बारे में बताने वाली महिलाओं को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित भी होना चाहिए। यानी केवल चिकित्सीय उपचार पर फोकस नहीं करना है बल्कि रेफरल और सहायता पर भी ध्यान केंद्रित करना है।

हिंसा संबंधी आघात को थेरेपी में संभालना शक्ति के साथ संयुक्त तौर पर व्हाइट स्वान फाउंडेशन की एक सिरीज है। यह सिरीज मानसिक स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के लिए एक गाइड है जो थेरेपी के माध्यम से हिंसा के उत्तरजीवी पीड़िताओं की मदद के लिए है।

पत्रकार और प्रशिक्षण से सामाजिक कार्यकर्ता एवं शक्ति की सलाहकार भूमिका साहनी और निम्हान्स के मनोचिकित्सा विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. पारूल माथुर द्वारा लिखा गया है ।

वाइट स्वान फाउंडेशन
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