आत्महत्या के शोक के लिए सपोर्ट ग्रुप - आशा की एक किरण
आत्महत्या निवारण

आत्महत्या के शोक के लिए सपोर्ट ग्रुप - आशा की एक किरण

डॉ नंदिनी मुरली

शोक मनाने के दौरान आपको समर्थन की जो मात्रा और गुणवत्ता मिलती है उससे आपके इस शोक से उबरने की क्षमता पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। आप यह अकेले नहीं कर सकते हैं और न ही आपको ऐसा अकेले करने की कोशिश करनी चाहिए। दोस्तों और शोक से ग्रस्त दूसरे लोगों के अनुभव और प्रोत्साहन से प्रेरित होना एक कमजोरी नहीं बल्कि एक स्वस्थ मानवीय जरुरत है।

एलन वोल्फेट, अंडरस्टैंडिंग योर ग्रीफ़

आत्महत्या का दुःख आपसे शोकाकुल होने का आपका अधिकार छीन लेता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इसे खुलेआम स्वीकारा नहीं जा सकता है, इसके प्रति सार्वजनिक रूप से शोक व्यक्त नहीं किया जा सकता है और इसे सामाजिक रूप से समर्थित और मान्य नहीं किया जा सकता है। चूंकि आत्महत्या को अभी भी एक निषेध मुद्दा माना जाता है आत्महत्या से हुई मौत की कोई सामाजिक स्वीकार्यता नहीं है। आत्महत्या से जुड़े कलंक, शर्म, गोपनीयता और चुप्पी के कारण आत्महत्या के अधिकांश उत्तरजीवी सामाजिक अलगाव और असंवेदनशीलता का अनुभव करते हैं।

आत्महत्या की पेचीदगी आत्महत्या से हुई मौत के बाद के दुःख की पेचीदगी में तब्दील हो जाती है। आत्महत्या के बाद अपने खुद के शोक के प्रारंभिक चरण के दौरान मुझे लगता था कि मेरी परिस्थिति को कोई भी समझ नहीं सकता है। स्वाभाविक बात है - वे कैसे समझ सकते थे? चूँकि यह एक अमान्य मौत थी, दु:ख और शोक के पारंपरिक मापदंडों को स्वचालित रूप से स्थानांतरित नहीं किया जा सकता था। लोगों के नेक इरादों के बावजूद मुझे महसूस होता था कि 'वे समझ नहीं पाएंगे'। इससे भी बदतर यह था कि मुझे ज्यादातर लोगों में समानुभूति की कमी महसूस होती थी क्योंकि वे एक ऐसी त्रासदी से घबरा गए थे जिसका उन्हें अपने जीवन में अभी तक कोई अनुभव नहीं था।

लेकिन अकस्मात ही मैंने आत्महत्या के शोक के लिए एक ऑनलाइन समर्थन समूह या सुसाइड ब्रीवमेंट सपोर्ट ग्रुप  (एसबीएसजी) - ग्रीफ रिलीफ फॉर सर्वाइवर्स ऑफ़ सुसाइड लास - को खोज निकाला। यह एक महसूस हो रही जरूरत का हल था। उनके व्यापक नियमों से प्रभावित होकर मैं इस समूह से जुड़ गयी। इसका एक नियम मुझे विशेष रूप से छू गया- 'यह एक सिमित समूह है और सदस्यता आत्महत्या से हुए नुकसान के निजी एहसास पर आधारित है'। समान रूप से पीड़ित लोगों की इस दलगत पहल का संचालन और नेतृत्व लिंडा मार्शल लेरॉक्स करती हैं जो की खुद एक आत्महत्या से हुए नुकसान की उत्तरजीवी रही हैं।

पहली बार मुझे लगा कि मैं अकेली नहीं हूं। आत्महत्या से शोकग्रस्त दूसरे लोगों से मिलने से मुझे आशा और हिम्मत मिली जिससे मैं इस भयानक नुकसान से गुजर पायी और आगे बढ़ सकी। यद्यपि दुःख और शोक के लिए कोई एक समान दृष्टिकोण नहीं है, यह जानकर कि दूसरे लोग इस नुकसान से कैसे मुकाबला कर रहे हैं, मैंने प्रेरणा और विनम्रता महसूस की। मैंने न केवल लिया, बल्कि दिया भी।

उदाहरण के लिए एक सदस्य आत्महत्या से हुई अपने साथी की मौत की पहली वर्षगांठ के बारे में साझा कर रही थी। सिंहावलोकन करने पर, सिर्फ आठ महीने पहले आत्महत्या से शोकग्रस्त होने के बावजूद मेरी प्रतिक्रिया ने मुझे चकित कर दिया। मैंने लिखा, “आपकी ईमानदारी और सच्चाई के लिए धन्यवाद। जब से मैंने अपने पति को आत्महत्या के कारण खोया है, हर कदम, हर पल, हर दिन एक चुनौती है। हां, पहला साल अविश्वसनीय रूप से चुनौतीपूर्ण है। मुझे बताया गया है कि इस नुकसान को अपनाने में कम से कम तीन साल का समय लगता है। तब तक, हम इसे जारी रखते हैं ... आगे बढ़ते रहते हैं ... नदी को धकेला नहीं जा सकता... पर हमे इसके प्रवाह के साथ आगे बढ़ते रहना है..."

ऐसी ही एक अकस्मात घटना में एक दंपति जिसने अपने छोटे बेटे को आत्महत्या के कारण खो दिया था उन्होंने स्पीक को खोजा (पिछले साल शुरू की गई आत्महत्या के रोकथाम की मेरी एक पहल) और मुझ तक पहुंचे। यह स्पीक सुसाइड ब्रीवमेंट सपोर्ट ग्रुप  (एसबीएसजी) की शुरुआत भी थी। जैसा की नाम से ही स्पष्ट है एसबीएसजी ऐसे परिवार के सदस्यों, दोस्तों, सहकर्मियों या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक मंच है जिन्होंने अपने किसी करीबी को आत्महत्या के कारण खो दिया है।

यह फोरम आत्महत्या से हुए नुकसान के उत्तरजीवियों पर ध्यान केंद्रित करता है; पीड़ित पर नहीं। समूह के सदस्यों के द्वारा एक सुरक्षित, सहायक और गैर-न्यायिक स्थान में संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने से सदस्यों को लचीलापन विकसित / निर्माण करने में मदद मिलती है। यह सदस्यों को दुःख को ध्यान से संसाधित करने में और इससे उबरने की नीतियों को विकसित करने में सहायक साबित होता है। यह उन्हें त्रासदी से निकलकर अपने जीवन का पुनर्निर्माण करने और बदलने में सक्षम बनाता है।

आत्महत्या के शोक का सपोर्ट ग्रुप कैसा होता है?

आत्महत्या के शोक के सपोर्ट ग्रुप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह के हो सकते हैं। इनका नेतृत्व समान रूप से पीड़ित लोगों या किसी पेशेवर (आमतौर पर एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर) के द्वारा हो सकता है। मेरे अनुभव में समान रूप से पीड़ित लोगों के नेतृत्व वाले सहायता समूह ज्यादा प्रभावी होते हैं क्योंकि जिए गए अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है। हालाँकि हर आत्महत्या अलग होती है और हर आत्महत्या के नुकसान के उत्तरजीवी के शोक मनाने का तरीका अलग होता है, इस समूह को जोड़ने वाला धागा इन सदस्यों के दर्दनाक दुःख का जीवंत अनुभव है।

आत्महत्या के नुकसान के उत्तरजीवी एक अद्वितीय बंधन से जुड़े हैं। जबकि हम सबकी स्थिति अद्वितीय है, हम समान भावनाओं, विचारों, प्रश्नों और दु:ख के चरणों से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। एसबीएसजी उन लोगों से मिलने और बातचीत करने का एक दुर्लभ अवसर देता है जिन्होंने इस दर्दनाक शोक को महसूस किया है।

एसबीएसजी के निम्नलिखित लाभ हैं: यह अलगाव का प्रतिकार करता है, एक सुरक्षित सहायक स्थान प्रदान करता है, विश्वास को पुनर्स्थापित करता है, प्रेरणास्रोत प्रदान करता है (ऐसे लोग जो एक सार्थक तरीके से इस त्रासदी से गुजरें हैं), सशक्त बनाता है और आशा जगाता है। एसबीएसजी गैर-श्रेणीबद्ध है। हर किसी का अनुभव समान रूप से मान्य है और सदस्यों को सुना, देखा और स्वीकार किया जाता है।

एसबीएसजी के तीन मुख्य काम है: सदस्यों को सांत्वना (दर्द को स्वीकार और भेद्यता का सम्मान करना), प्रोत्साहन (अनुभव को सामान्य और वैध बनाना), और शिक्षा (इससे उबरने के कौशल और रणनीतियों का प्रतिरूपण करना) प्रदान करना।

क्या एक सहायता समूह थेरेपी के समान होता है?

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एक एसबीएसजी बैठक एक व्यक्तिगत या सामूहिक थेरेपी या परामर्श सत्र नहीं है। एसबीएसजी आत्महत्या के नुकसान के उत्तरजीवियों के लिए पोस्टवेन्शन (आत्महत्या के बाद उत्तरजीवियों के लिए आयोजित हस्तक्षेप) सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका केंद्र आत्महत्या के नुकसान के उत्तरजीवियों को अपने जीवन के पुनर्निर्माण और सामान्यीकृत करने के लिए सशक्त और काबिल बनाना है। मॉडरेटर लोगों को अपने दुखों के संघर्ष और उनसे मुकाबला करने की नीतियों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है। अनुभवों को साझा करने के आधार पर ग्रुप दलगत रूप से संसाधन, सहारा और प्रोत्साहन उपलब्ध करवाता है। मॉडरेटर को मौत के तरीके को साझा करने के लिए विशेष रूप से संवेदनशील होना जरुरी है क्योंकि यह दूसरों के लिए संभावित रूप से दर्दनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत साझाकरण प्रोत्साहित किया जाता है और यदि आवश्यक हो तो एक शोक परामर्शदाता या आघात चिकित्सक का उल्लेख किया जा सकता है।

एसबीएसजी बैठक के दौरान चर्चा की जाने वाली कुछ सामान्य समस्याएं हैं: आत्महत्या से जुड़े मिथक और गलतफहमियां, आत्महत्या के दुःख से गुजरना (क्या उम्मीद कर सकते हैं), अवसाद और चिंता से गुजरना, शर्म और अपराधबोध, बच्चों का दुःख, इससे उभरने का कौशल और नीतियां, पेशेवर समर्थन, लचीलापन बनाना और अपने जीवन का पुनर्निर्माण करना।

ऐसा कोई नियम नहीं है जो निर्दिष्ट करता है कि एक शोक संतप्त व्यक्ति किस चरण में एक सहायता समूह में शामिल हो सकता है। व्यावहारिक बुद्धि के मुताबिक शोक के बाद कम से कम एक महीने तक इंतजार करना चाहिए। बेशक, समर्थन लेने का निर्णय एक व्यक्ति पर निर्भर करता है। परिवार और दोस्त उनके साथ ऐसी सेवाओं की जानकारी साझा कर सकते हैं।

इसके असंख्य लाभों के बावजूद, आत्महत्या के शोक के समर्थन समूह (ऑफलाइन और ऑनलाइन) को शुरू करना और बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। आत्महत्या से जुड़ा कलंक आत्महत्या के नुकसान के उत्तरजीवियों के लिए 'बाहर निकलना’ और समर्थन मांगना मुश्किल बना देता है। जब तक हम आत्महत्या सम्बन्धी बातचीत को मुख्यधारा में नहीं लाते तब तक इस तरह की पहल रडार स्क्रीन पर एकल बिंदु बन कर रह जाएगी।

डॉ नंदिनी मुरली संचार, लैंगिक और विविधता से जुड़ी एक पेशेवर है। आत्महत्या हानि की हालिया उत्तरजीवी, उन्होंने आत्महत्या पर चर्चाओं को बदलने और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए एमएस चेलामुथू ट्रस्ट एंड रिसर्च फाउंडेशन, मदुरै की पहल पर स्पीक की स्थापना की है। उन्होंने बाउंस फॉरवर्ड की स्थापना भी की, जो लोगों को दुःख से उबरने और अपने जीवन में बदलाव लाने में मदद करता है।

वाइट स्वान फाउंडेशन
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