कल्याण

दास्तान: वो रात में क़रीब तीन घंटे तक फ़र्श को अंगुलियों से बजाते रहते थे

वाइट स्वान फ़ाउंडेशन

कपिल की पत्नी सुनीता अपने पति की इस आदत से बहुत परेशान हो गई थीं. वो काम पर निकलने से पहले अपने वाहन को कई बार स्टार्ट करते और बंद करते थे. बिस्तर पर जाने से पहले विस्तार से कुछ टोटके करते थे और घर पर लगातार इधर से उधर चीज़ों को चेक करते रहते थे. सुनीता ने अपनी एक दोस्त से सुना था कि उनके घर के पास ही एक मनोचिकित्सक रहते हैं. सुनीता के कहने पर उनके पति कपिल उनके साथ मनोचिकित्सक के क्लिनिक पर गए.

नीता ने डॉक्टर को बताया कि जबसे उनकी शादी हुई है, उनके पति बिस्तर पर जाने से पहले कई किस्म की अजीबोग़रीब चीज़ें करते रहते हैं. वो अपनी अंगुलियों से फर्श को बजाते हैं, बिस्तर पर लेट जाते हैं, फिर बिस्तर से उठकर फर्श को बजाने लगते हैं, कभी कभी ये सिलसिला दो से तीन घंटों तक चलता रहता है. जिस बात से वो ज़्यादा चिंतित थीं और जिस वजह से वो डॉक्टर के पास अपने पति को लेकर आई थी, वो थी उनकी सुबह की हरकतें.

वो काम पर निकलने से पहले कई बार अपनी कार स्टार्ट करते और बंद करते थे और इस चक्कर में उन्हें ऑफ़िस के लिए देर भी हो जाती थी. सुनीता को डर था कि कहीं उनके पति की नौकरी न चली जाए. वो ख़ुद कामकाजी नहीं थीं और उनके दो युवा बच्चे थे, इसलिए उन्हें वित्तीय नतीजों की भी चिंता सताती थी, कि अगर पति की नौकरी नहीं रही तो घर कैसे चलेगा.

मनोचिकित्सक ने उनकी चिंताएँ ध्यान से सुनीं और फिर कपिल से पूछा कि इस बारे में विस्तार से वही समझाएँ कि आखिर उनके दिमाग में क्या चलता रहता है. कपिल थोड़ा शर्मिंदा महसूस कर रहे थे लेकिन फिर बातचीत के लिए तैयार हो गए. उन्होंने डॉक्टर को बताया कि अगर वो वैसा कुछ न करें तो उनकी घबराहट का स्तर असहनीय हो जाता है.

ऐसे अवसरों पर उन्हें लगने लगता है कि अगर वो वे ये सारे टोटके नहीं करेंगें या उस सिलसिले में उनसे कुछ छूट जाएगा तो उनके घर में या उनके परिवार पर विपत्ति आ जाएगी. हालांकि उन्होंने माना कि उनकी इन हरकतों का कोई औचित्य नहीं था फिर भी घबराहट बनी रहती थी.

अगले आधे घंटे में कपिल ने सुबह उठने से लेकर रात सोने जाने तक की अपनी तमाम गतिविधियों का ब्यौरा दिया कि वे क्या क्या चीज़ें लगातार करते रहते हैं. वो जानते थे कि इसका उनकी ज़िंदगी पर कई तरीक़ों से खलल पड़ रहा है लेकिन वो बेबस महसूस करते थे और इस तरह का व्यवहार रोकना उनके लिए मुश्किल था.

डॉक्टर ने कपिल की दशा की पहचान ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के रूप में की और दंपत्ति को ओसीडी के बारे में विस्तार से बताया. उसने उन्हें भरोसा दिलाया कि समाज में कई लोग ओसीडी से पीड़ित होते हैं और इसका इलाज भी उपलब्ध है.

कपिल कई महीनों से दवाओं और थेरेपी पर चल रहे हैं. सुनीता का कहना है कि वो पहले से 80 फ़ीसदी बेहतर हैं और कपिल उनकी इस बात से सहमत हैं. वो मानते हैं कि कभी कभी उन्हें अपने टोटके करने की तीव्र इच्छा होती है लेकिन इन पर काबू पाने में समर्थ हो जाते हैं और उन इच्छाओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. उनका काम सही ढंग से चल रहा है और अपनी बीमारी के चलते नौकरी जाने का उन्हें अब कोई डर नहीं सताता है.

ये दास्तान, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया गया है. बहुत सारे मरीज़ों के लक्षणों और विवरणों के आधार पर इसे तैयार किया गया है. ये दास्तान किसी एक ख़ास व्यक्ति की नहीं है बल्कि ये इस तरह के चिंता रोग से पीड़ित किसी भी व्यक्ति की दास्तान का प्रतिनिधित्व करती है.

वाइट स्वान फाउंडेशन
hindi.whiteswanfoundation.org