कल्याण

मानसिक विकास के लिए यात्रा

डॉ एडवर्ड हॉफमैन

क्या आप यात्रा करना पसंद करते हैं? कई लोगों के लिए, यह जीवन के सबसे पूर्ण अनुभवों में से एक है - यह न केवल खुशनुमा विश्राम को प्रेरित करता है, बल्कि नए दार्शनिक और आध्यात्मिक क्षितिज भी प्रदान करता है। इस दूसरे दृष्टिकोण से, प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन (जिनका असली नाम सैमुअल क्लेमेंस है) ने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में 'इनोसन्ट्स अब्रॉड' में घोषित किया कि "यात्रा पूर्वाग्रह, कट्टरपंथी और संकीर्ण मनोदशा के लिए घातक है। पृथ्वी के एक छोटे से कोने में रहकर व्यापक, स्वस्थ, धर्मार्थ विचारों और चीजों को हासिल नहीं किया जा सकता है।" कई दशकों बाद इसी तरह की भावनाओं को प्रतिबिंबित करते हुए, स्पेनिश-अमेरिकी दार्शनिक होर्जे संतायाना ने पर्यटन के लाभों का विस्तार करते हुए कहा कि, "परिचित से अपरिचित की ओर जाने में बुद्धिमानी होती है: यह दिमाग को चुस्त रखता है, पक्षपात को मारता है, और हास्य रस को बढ़ावा देता है।"

इस तरह की भावनाओं को निश्चित रूप से अल्फ्रेड एडलर, एरिक एरिक्सन और कार्ल जंग सहित आधुनिक मनोविज्ञान के दिग्गजों का समर्थन प्राप्त था। जर्मनी में हाईस्कूल से स्नातक होने के बाद, एरिकसन (विकासशील मनोविज्ञान और नाटक थेरेपी के संस्थापक) ने कला स्कूल में दाखिला लेने से पहले, अपनी पहचान खोजने के लिए यूरोप में एक वर्ष तक भटकते रहे। बाद के जीवन में, एरिकसन ने तर्क दिया कि ज्यादातर युवाओं को सार्थक रूप से स्वयं को खोजने के लिए स्कूली शिक्षा और कार्यबल में भाग लेने के बीच इस प्रकार के "अंतराल वर्ष" (या वर्षों) की आवश्यकता होती है। एडलर और जंग दोनों ने अपने काम को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर खुशी से यात्रा की। दोनों न केवल विभिन्न दर्शकों से प्राप्त प्रशंसा से आनंदित हुए, बल्कि यह महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि भी प्राप्त की कि संस्कृतियां व्यक्तित्व को कैसे प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, 1920 के दशक में ही, एडलर ने सटीक भविष्यवाणी की थी कि व्यक्तिगतता पर जोर देने के कारण अमेरिका मनोविज्ञान में विश्व में सबसे आगे होगा। उन्होंने काव्यात्मक तरीके से कहा कि, "संयुक्त राज्य अमेरिका एक महासागर की तरह है।" "इस तरह के देश में एक व्यक्ति के विकास के लिए अनंत संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। महत्वाकांक्षा के लिए प्रोत्साहन बहुत अच्छा है लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बहुत गहन है। यूरोप में, वे अभी भी बाथटब में तैर रहे हैं।"

जंग ने पूर्वी दुनिया के प्रति आजीवन आकर्षण महसूस किया, और 1937-1938 के बीच भारत की यात्रा ने उनके बाद की रचनाओं को स्थायी रूप से प्रभावित किया। इस यात्रा से पहले, स्वीट्जरलैंड में जन्में जंग ने महसूस किया कि योग जैसे भारतीय ध्यान अभ्यास पश्चिमी देशों के लिए वास्तव में उपयुक्त नहीं थे, लेकिन बाद में, उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम के लोगों को भारतीय संस्कृति से मनुष्य की मानसिकता के बारे में बहुत कुछ सीखना है। 1939 के लेख 'व्हाट इंडिया कैन टीच यू', में जंग ने हिंदू धर्म की "एक आदमी को ऊपर से नीचे" तक अपनाने के लिए प्रशंसा की और सराहनीय रूप से कहा कि भारत "मानव व्यक्तित्व के ऊपरी और निचले हिस्से के बीच घातक पृथक्करण" से बचा हुआ है।

यात्रा पर आज के अग्रणी मनोवैज्ञानिक शोधकर्ताओं में से न्यूजीलैंड विश्वविद्यालय ओटागो के डॉ सेबेस्टियन फिलेप हैं। पर्यटन के विषय में एक नया दृष्टिकोण स्थापित करने में, डॉ फिलेप ने पांच अलग-अलग प्रकार के अनुभवों के साथ प्रत्येक के विशेष मूल्यों की पहचान की: 1) रेक्रीशनल या मनोरंजक, जो कल्याणात्मक और निष्क्रिय आनंद प्रदान करता है; 2) डायवर्सनरी या अन्यमनस्कता हेतु, जो मुख्य रूप से वर्तमान तनाव से विकर्षण प्रदान करता है; 3) अनुभवी और 4) प्रयोगात्मक, जिसमें क्रमशः आत्म-प्रामाणिकता और जीवन के वैकल्पिक तरीकों की खोज शामिल है; और, 5) अस्तित्वपरक, जो हमारी सोच या अभिनय की आदतों को बदल सकता है। निस्संदेह, यह अस्तित्वपरक मोड है जो अक्सर व्यक्तिगत विकास को जन्म देता है।

मैंने हाल ही में युवा वयस्कों के बीच यात्रा जैसे अनुभवों पर चीन में एक अध्ययन का नेतृत्व किया है। आश्चर्य की बात नहीं है कि, बहुमत ने उत्थान क्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला की सूचना दी, जिसमें सौंदर्यशास्त्र (सुंदर वास्तुकला को देखते हुए), प्रकृति की सुंदरता, पारिवारिक एकता, गहरी दोस्ती, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की भावना शामिल है। उदाहरण के लिए, एक पुरुष छात्र ने टिप्पणी की, "जब आपके दिमाग और शरीर को पूरी तरह से आराम मिलता है, तो जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण बदल जाता है। आप बहुत कुछ सीखते हैं और आप बहुत विकसीत होते हैं।" एक महिला छात्र ने ऐसा ही कुछ कहा, "मुझे एहसास हुआ कि अगर मैंने अपनी पूरी कोशिश की, तो मेरे सपने सच हो सकते थे, और मैं खुद अपने जीवन की उत्तरदायी हूँ।"

जब चाहें यात्रा करना हमेशा संभव नहीं होता है, लेकिन हम हमेशा अपने अनुभवों पर प्रतिबिंबित कर सकते हैं। इन सवालों के जवाब देने के लिए थोड़ा समय निकालें: यात्रा ने आपके खुले दिमाग को कैसे मजबूत किया है, और आपकी सौंदर्य और उत्कृष्टता की प्रशंसा को कैसे प्रभावित किया है? आपके आभार के बारे में कुछ बताएं? आपको किन तरीकों से लगता है कि यात्रा आपकी रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता को बढ़ाती है? अंत में, अब आप कहाँ यात्रा करना चाहते हैं, और क्यों?

डॉ. एडवर्ड हॉफमैन न्यूयॉर्क शहर के येशिवा विश्वविद्यालय में अनुबंधित सहायक मनोविज्ञान के प्रोफेसर हैं। वह निजी प्रैक्टिस करने वाले एक लाइसेंस प्राप्त ​​मनोवैज्ञानिक चिकित्सक हैं। वह मनोविज्ञान और इससे संबंधित क्षेत्रों में 25 से अधिक पुस्तकों के लेखक/संपादक हैं। डॉ. हॉफमैन, हाल ही में डॉ विल्यम कॉम्प्टन के साथ पॉजीटिव साइकोलॉजी : द साइंस ऑफ हैप्पीनेस एंड फ्लोरिशिंग के सह-लेखक हैं और द इंडियन जर्नल ऑफ पॉजीटिव साइकोलॉजी एवं द जर्नल ऑफ ह्यूमेनिस्टिक साइकोलॉजी के संपादकीय बोर्डों में कार्यरत हैं। आप उन्हें columns@whiteswanfoundation.org पर लिख सकते हैं।

वाइट स्वान फाउंडेशन
hindi.whiteswanfoundation.org