कल्याण

स्वयंसेवा: इससे आपके मानसिक स्वास्थ्य में क्या अंतर आ सकता है

डॉ एडवर्ड हॉफमैन

क्या आप किसी तरह की स्वयंसेवा में शामिल है? अगर नहीं, तो इसकी आज ही शुरुआत करें।

कई अनुसंधान स्वयंसेवा से होने वाले व्यक्तिगत कल्याण की ओर इशारा कर रहे हैं। विज्ञान के पत्रकार ऐसे ही "टू फील गूड, डू गूड" जैसे शीर्षक वाले लेखों के द्वारा स्वयंसेवा के प्रभाव की बात नहीं कर रहे हैं। स्वयंसेवा और कल्याण के बीच एक ठोस रिश्ता है जो किशोरावस्था से लेकर बुढ़ापे तक जारी रहता है। 'युवाओं का सकारात्मक विकास' शीर्षक अध्ययन किशोरों पर स्वयंसेवा के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। स्वयंसेवा में शामिल न होने वाले किशोरों की तुलना में स्वयंसेवा करने वाले किशोरों में अनचाहे गर्भ या नशीले पदार्थों की लत की संभावना कम होती है और सकारात्मक शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक परिणामों की संभावना ज्यादा होती है।

ऐसे ही एक शोध अध्ययन में विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के डॉ जेन पिलविन ने पाया कि स्वयंसेवा से जोखिम वाले किशोरों में भी आत्म-सम्मान, सामाजिक संबंध और अपनेपन की बढ़ोतरी के रूप में फायदा होता है। इस अनुभव से उन्हें धौंस के हानिकारक प्रभावों से मुकाबला करने में भी मदद मिलती है। किशोरों की सेहत में भी फायदे देखे जा सकते हैं। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ हान्नाह स्क्रेयर के अनुसार ऊँची कक्षा के जिन बच्चों ने छोटे बच्चों के परामर्श कार्यक्रम में भाग लिया, उनके कोलेस्ट्रॉल का स्तर और शरीर का द्रव्यमान उन बच्चों की तुलना में कम हैं जिन्होंने कार्यक्रम में भाग नहीं लिया।

आधी उम्र बीत जाने के बाद क्या? वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के डॉ पैगी थोइट्स और डॉ लिंडी हिउवट के एक अध्ययन में पाया गया कि स्वयंसेवा न करने वाले व्यसकों की तुलना में स्वयंसेवक वयस्क व्यक्तिगत खुशहाली, जीवन की संतुष्टि, आत्म-सम्मान और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे पहलुओं में बेहतर हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्यक्तित्व-और-स्वयंसेवकवाद का एक चक्र है- जो लोग खुश रहते हैं और जिनके आत्म-सम्मान का स्तर ऊँचा है उनके स्वयंसेवक होने की संभावना ज्यादा है, जिससे उनके कल्याण में और भी बढ़ोतरी होती है। अभी हाल ही में, डॉ मार्टिन बाइंडर और डॉ एंड्रियास फ्रीटैग ने ब्रिटिश परिवारों से जुड़े एक बड़े पैमाने पर हुए अध्ययन में बताया कि एक लम्बे समय तक स्वयंसेवा में शामिल होने से ख़ुशी में बढ़ोतरी होती है और आश्चर्यजनक रूप से मनोदशा पर कोई "ड्रॉप-ऑफ प्रभाव" नहीं होता। शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि सार्वजनिक नीति-निर्माताओं को वयस्क स्वयंसेवकों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करना चाहिए। स्वयंसेवा से होने वाली व्यक्तिगत खुशी के बारे में अवगत कराना एक तरीका हो सकता है।

सेवानिवृत्ति के दौर से गुजरने वाले लोगों में भी इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण काफी मजबूत हैं। एक प्रतिनिधि अध्ययन में, वाशिंगटन विश्वविद्यालय की डॉ नैन्सी मोरो-हॉवेल और उनके सहयोगियों ने पाया कि स्वयंसेवा में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने वाले बूढ़े व्यसकों में समान मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य वाले गैर-स्वयंसेवकों की तुलना में कल्याण का स्तर ऊँचा है। संक्षेप में, खोज नर्विवाद हैं: यदि आप और भी ज्यादा खुश रहना चाहते हैं और अपने सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो दूसरों की अपने समय और कौशल के ज़रिये मदद करें।

इस तरह की वैज्ञानिक खोजें भारत पर प्रभाव डाल रही हैं। भारत की विशाल युवा आबादी के लिए नागरिक व्यस्तता और स्वयंसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय की डॉ रचना भांगाओकर और डॉ दुलारी मेहता ने एक युवा के मामले का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जानवरों से जुड़ी स्वयंसेवा के माध्यम से उस युवा को अपने जीवन का "उद्देश्य" मिला। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि "एक विकासशील राष्ट्र के रूप में भारत को राष्ट्र-निर्माण और सामाजिक बेहतरी के लिए 'उद्देश्यपूर्ण युवा वर्षों' की शुरुआत करनी चाहिए।"

11 अगस्त 2017 को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने "यूथ बिल्डिंग पीस" के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय- स्तरीय परामर्श का आयोजन किया। शांति-निर्माण गतिविधियों में युवाओं के नेतृत्व वाले संगठनों को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने युवा स्वयंसेवकों पर एक अभूतपूर्व रिपोर्ट जारी की और साथ ही साथ भारत के ऑनलाइन स्वयंसेवी मंच का प्रक्षेपण किया। यह युवा नेटवर्क, स्वयंसेवक से जुड़े संगठनों, नागरिक समाज संगठनों, सार्वजनिक संस्थानों और राज्य सरकारों को स्वयंसेवकों से ऑनलाइन जुड़कर मुफ्त समर्थन पाने में मदद करेगा।

कार्रवाई शुरू करना

स्वयंसेवा करने के अनगिनत तरीके है, पर आपके लिए क्या सही रहेगा? यहाँ छह सिफारिशें हैं:

1) कौनसे मुद्दों में आपको सबसे ज्यादा रूचि है? जानें - क्या आप किसी पार्क में सुधार करना चाहते हैं, किसी कला परिषद में शामिल होना चाहते हैं, या स्कूली बच्चों को पढ़ना चाहते हैं? अगर आप खुद को "कुछ अच्छा करने" के लिए मजबूर करने के बजाय किसी स्वयंसेवा गतिविधि को उत्साह से करें तो आप एक प्रभावी स्वयंसेवक बन सकते हैं।

2) आप किन कौशलों से दूसरों की मदद कर सकते हैं? कंप्यूटर विशेषज्ञता या फिर संगीत प्रदर्शन?

3) क्या आप कुछ नया सीखना चाहते हैं? कई संगठन स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करते हैं।

4) हद्द से ज्यादा प्रतिबद्ध न करें। अपने समय को सावधानीपूर्वक संतुलित करें। अपने आप पर ज्यादा तनाव न डालें जिससे बर्नआउट या अक्रियाशीलता हो जाये।

5) एक ऑनलाइन स्वयंसेवक के रूप में सेवा करने पर विचार करें - अगर आपके पास समय की कमी है, आप यातायात नहीं कर पा रहे या फिर आपकी शारीरिक क्षमता नहीं है तो इंटरनेट या फोन के माध्यम से दूसरों की मदद कर सकते हैं।

6) आप परिवार के सदस्यों या दोस्तों के साथ स्वयंसेवा कर सकते हैं। अनुसंधान से पता चलता है कि आप दूसरों की सेवा करके अपनों के और करीब आ सकते हैं।

डॉ एडवर्ड हॉफमैन न्यूयॉर्क शहर के येशिवा विश्वविद्यालय में एक सहायक सहयोगी मनोविज्ञान प्रोफेसर हैं। निजी अभ्यास में एक लाइसेंस प्राप्त नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक, वह मनोविज्ञान और संबंधित क्षेत्रों में 25 से अधिक किताबों के लेखक / संपादक हैं। डॉ हॉफमैन ने डॉ विलियम कॉम्प्टन के साथ 'पॉजिटिव साइकोलॉजी: द साइंस ऑफ हैप्पीनेस एंड फ्लोरिशिंग' नामक किताब लिखी हैं, और इंडियन जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकोलॉजी और जर्नल ऑफ ह्यूमनिस्ट साइकोलॉजी के संपादकीय बोर्डों में कार्य करते हैं। आप उन्हें columns@whiteswanfoundation.org पर लिख सकते हैं।

वाइट स्वान फाउंडेशन
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