मौल्लिका शर्मा

परवरिश के अनेक रंग

आपकी दुनिया अचानक बदल गई - पता चला कि आपके बच्चे को मानसिक बीमारी है - मौल्लिका शर्मा

यदि बीमारी की बात की जाए, तो स्वयं के बीमार होने पर, किसी दोस्त के, माता-पिता या अपने भाई-बहनों के बीमार पर उन्हें संभालना तो आसान है,  लेकिन अपने बच्चे की बीमारी या विकलांगता से निपटना पूरी तरह से अलग मामला होता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब मामला मानसिक बीमारी का है, तो यह पूरी तरह से अलग ही परिस्थिति पैदा कर देता है। ऐसा लगता है कि समस्या पर जटिलता का एक आवरण चढ़ा है, जो जरूरी नहीं कि जैसा दिख रहा है वैसा ही हो। इसे ठीक तरह से समझाने की मैं एक कोशिश करने जा रही हूं।

क्या होता है जब आप पहली बार आपको पता चलता है कि आपका बच्चा मानसिक बीमारी से पीड़ित है? मैं समझ सकती हूं कि आप भावनाओं के ऐसे भंवर में डूबने लगते हैं, जिसमें डर और चिंता, शर्म और उलझन, भ्रम और घबराहट, अविश्वास और पीड़ा शामिल होती है। ऐसी शंका और आशंकाएं कि अब आपके और आपके बच्चे का आगे क्या होगा, दुनिया क्या कहेगी। पूरी तरह निराशा में डूब जाने का अहसास। मैं ही क्यों? मेरा बच्चा ही क्यों? और इसे लेकर अपराध बोध की भावना। मैं खुद को कैसे माफ कर दूं? माता-पिता के रूप में शायद मुझसे की कुछ गलत हुआ है; मेरे ही खराब जीन होने के कारण बच्चे को यह हुआ;  शायद मेरे पालन-पोषण में ही कोई कमी रही। बच्चे को होने वाली तकलीफ के लिए इसी तरह के अपराध बोध से ग्रसित रहना।

ओह! भावनाओं का ऐसा भंवर और हममें से ज्यादातर लोग कभी इस बात को समझने की कोशिश नहीं करते कि, उनके बच्चे का अपना अलग अस्तित्व है। याद रखें उन्हें अकेले भी इस परिस्थिति से निपटने का समय दें।

एक तरफ तो हम स्थिति को नकारने का प्रयास करते हैं, दूसरी ओर उसके भविष्य को लेकर चिंता से घिर जाते हैं। क्या मेरा बच्चा आत्मनिर्भर हो पाएगा और अपना पूरा सामर्थ्य हासिल कर पाएगा? मेरे बच्चे की आगे की जिंदगी कैसी होगी? अभिभावक  के रूप में मेरा भविष्य कैसा होगा? व्यक्तिगत रूप में? जीवनसाथी के रूप में? अक्सर, विवाहित जोड़े के रूप में स्थिति पूरी तरह डांवाडोल होती है। अपराधबोध में डूबे जोड़े एक दूसरे पर उनके जीन  खराब होने का दोष मढ़ने लग जाते हैं। आप विश्वास नहीं कर पाएंगे कि दोषारोपण के इस खेल में यहां तक कि सबसे अधिक शिक्षित और प्रबुद्ध लोग शामिल हो जाते हैं!

हालात को नकारना हमें इसका सामना करने से रोकता है। बच्चे की मानसिक बीमारी का पता लगने पर इसे समझने के लिए हमें जो करने की आवश्यकता है, वह है एक दूसरी राय प्राप्त करना। ऐसी स्थिति में एक और राय लेकर इसकी पुष्टि करें और इसके लिए आगे क्या किया जा सकता है उसका सबसे अच्छा तरीका समझें। हमें इसके बारे में लगातार पढ़ते रहने की जरूरत है कि, हम खुद इस स्थिति को किस तरह समझें, कैसे इससे निपटें और अपने बच्चे को कैसे समझाएं। इसके साथ ही, परिवार या साथ के अन्य लोगों जिन्हें यह जानने कि जरूरत है कि बच्चे को कैसे सहारा दिया जा सकता है उन्हें इस बारे में कैसे बताएं, दुनिया को इस बारे में कैसे समझाया जाए।

इन  सबके बीच, यह महत्वपूर्ण है कि हमारे नजरिए में दृढ़ता रहनी चाहिए, जो बताती है, "यह किसी की गलती नहीं है - न तो आपकी और  ना ही आपके बच्चे की। स्थिति को स्वीकार करना ही आगे के लिए एकमात्र रास्ता है! ” एक प्रसिद्ध कहावत है कि - ज्यादातर बच्चे सिंहपर्णी के उस पौधे की तरह होते हैं जो कहीं भी जड़ें जमाने और कहीं भी जीवित रहने में सक्षम होते हैं। लेकिन आपका बच्चा एक आर्किड के फूल की तरह है - नाजुक लेकिन सुंदर, और ऑर्किड फूल शानदार ढंग से तभी खिल पाता है, जबकि उसकी पूरी तरह विशेष रूप से देखभाल की जाए। ऐसे फूल से बच्चों के लिए सही पालन-पोषण और सही वातावरण ही समाज के रचनात्मक, सफल और प्यार करने योग्य सदस्यों के रूप में उन्हें विकसित होने में मदद कर सकता है।

इसका मतलब क्या है? ऑर्किड फूलों के पोषण के लिए आप किस तरह एक अच्छा वातावरण बनाते हैं?

- स्वीकृति ही एक समाधान है - बच्चे को स्वीकार करें; उसकी बीमारी को स्वीकार करें; और सुनिश्चित करें कि बच्चे को यह न लगने लगे कि इसमें उसकी कोई गलती है।

- गैर-न्यायिक रूप से बच्चे की भावनाओं को पहचानें। दूसरों के सामने और स्कूल में बच्चे ग्रुप के साथ रहते हैं; घर में उन्हें कुछ समय अकेले रहने की जगह, स्वच्छंदता की जरूरत होती है। यदि वे चाहें तो घर में उन्हें ऐसा करने दें। इसका यह मतलब न समझें कि वे घर पर 'एक्टिंग' या किसी प्रकार का 'ढोंग' कर रहे हैं। गोपनीयता की उनकी आवश्यकता के प्रति भी आपको संवेदनशील रहना चाहिए।

- ध्यान लगाकर उनकी बात सुनें।

- बिना किसी शर्त उन्हें प्यार दें।

- बातचीत के लिए तैयार रहें। पढ़ाई की बातों के अलावा भी बच्चों से उनकी भावनाओं, विचारों, उनके मन में चल रही उधेड़बुन, दुविधाओं और असफलताओं के बारे में चर्चा करें।

-  उनकी उपलब्धियों के लिए तुरंत उदारता से और सार्वजनिक रूप से उनकी प्रशंसा करें, लेकिन यदि डांटना हो तो निजी तौर पर और कोमलता से डांट-डपट करें; याद रखें नकारात्मक प्रतिक्रिया की तुलना में सकारात्मक प्रतिक्रिया हमेशा ज्यादा शक्तिशाली होती है।

- अपने बच्चे की क्षमता को पहचानकर उस पर ध्यान दें,  और अक्सर उस बारे में बात करें, यह जानते हुए कि प्रत्येक बच्चा अद्वितीय होता है और उसकी अपनी विशिष्ट क्षमताएं होती हैं।

- बच्चे को सामाजिक रूप से प्रोत्साहित करना, क्योंकि रिश्ते बनाने में उन्हें समस्या हो सकती है - यह उन्हें हमउम्र संबंधों के सागर में अपने दम पर डूबने या तैरने में मददगार नहीं होता है। उन्हें एक लाइफ जैकेट की जरूरत होती है और वह आप हो सकते हैं!

- और, सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि न सिर्फ अपने बच्चे के लिए, बल्कि अपने स्वयं के लिए भी एक अच्छे पेशेवर की मदद लें।

- जी हां, आपके अपने लिए भी, क्योंकि आपके बच्चे के लिए यह सब करने में समर्थ होने के लिए जरूरी है कि आप स्वीकार करें और अपनी भावनाओं से यारी करें। अपना खुद का ख्याल रखें और समय-समय पर अपनी बैटरी रिचार्ज करना न भूलें। आपको अपने जेहन में यह रखना होगा कि इनमें से कुछ भी एक मां-बाप के रूप में, पति-पत्नी के रूप में, यहां तक कि एक इंसान के रूप में भी आपकी विफलता का आईना नहीं है। आपको अपने अंदर चल रही किसी भी तरह की अनावश्यक, निरर्थक और भावनात्मक उथल-पुथल से खुद को दूर रखने की आवश्यकता है। आपको याद रखना है कि आप अकेले नहीं हैं, हरेक व्यक्ति के जीवन में समस्याएं हैं। हर कोई अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर कुछ निजी लड़ाई लड़ रहा है। यह जानते हुए कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन भविष्य पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं होता है, इसलिए जरूरत इस बात की है कि आप वर्तमान पल में जीना सीखें, ताकि भयावह परिणामों से बचा जा सके। बाकी सब चीजों के साथ ही, घर के इस विषम परिस्थितियों वाले माहौल को झेल रहे अन्य बच्चों की मदद करने पर भी आपको ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है, और यदि संभव हो तो अपने वैवाहिक संबंध को बरकरार रखें। पेशेवर सहायता लिए बिना यह सब आपके लिए एक लंबा अनुशासन हो सकता है!

मौलिका शर्मा बैंगलोर की एक काउंसलर हैं,जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिए अपने कॉर्पोरेट करियर को छोड़ दिया। मौलिका वर्कप्लेस ऑप्शंस के साथ काम करती है,जो कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए बनी एक वैश्विक कंपनी है। मौलिका बैंगलोर की रीच क्लिनिक में प्रैक्टिस भी करती हैं। यदि इस कॉलम से संबंधित आपके कोई प्रश्न हैं,तो कृपया हमें हमें columns@whiteswanfoundation.org पर लिखें।