विशेष लेखन

देखभाल का परिचय

शारीरिक कमियों (अस्थायी और स्थायी) की वजह से जब हम रोज़मर्रा के सामान्य कामकाज नहीं कर पाते, तो हम अपने प्रियजनों की सेवाओं पर निर्भर होते हैं. उनकी देखभाल महत्त्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उस वजह से हम बेहतर ढंग से अपनी ज़िंदगी जी पाते हैं. अस्पताल या नर्सिंग ...

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देखभाल की चुनौतियाँ - डा एस. के. चतुर्वेदी

चित्र कथा

मानस भट्टाचार्य

अपने बेटे के पालक

" कैसी भी विकट परिस्तिथि मुझे हिला नहीं सकती. मैं शांत रहकर ये सोचने लगता हूँ कि उस परिस्तिथि को कैसे नियंत्रण में करूँ. बीस साल पहेले मेरे बेटे को, जो अब 45 बरस का है, स्किज़ोफ़्रेनिया से डायग्नोस किया गया था. मेरी पत्नी के निधन के बाद मैं ही बेटे का देखभाल कर रहा हूँ. मैं अपनी दिनचर्या कुछ व्यायाम और योग के साथ शुरू करता हूँ. अगर मैं अपने मन को शांत रखूँगा तभी अपने बेटे की भी देखभाल कर सकूँगा."

ग्लोरी जोसेफ़

सैकियाट्रिक नर्स

मैं हमेशा से एक नर्स बनना चाहती थी, लेकिन कभी एक मनोरोग नर्स बनने के बारे में सोचा नहीं था. जब मैं निम्हांस आई, मैंने देखा कि रोगियों को कितनी पीड़ा और निराशा से गुज़रना पड़ता है. गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को निजी स्वच्छता में दिलचस्पी नहीं होती है, अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति में जीने की इच्छा नहीं होती और उसे केवल ऐसे ख्याल आते हैं- ‘मुझे क्यों जीना है’ या ‘मैं जीना नहीं चाहता’. वे बस इतना ही चाहते हैं कि उन्हें कोई सुने और उनकी देखभाल करें."

डॉ एन जनार्धन

सैकियाट्रिक सोशियल वर्कर

"मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति अपने परिवार और समुदाय द्वारा एक बोझ माने जाते हैं. एक मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते मैं उन्हें स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करता हूँ. उनसे मिलने का मेरा मुख्य उद्देश्य यही होता है. जब उनका परिवार मेरे काम को पहचान कर मुझसे बात करने में सुरक्षित महसूस करते हैं तो मुझे गर्व होता है. वे अक्सर कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले मेरी राय लेते हैं."